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एंकर प्रिया जुनेजा के आत्महत्या की ख़बर पर क्यों चुप है मीडिया ? उठने लगें मीडिया माफ़िया पर सवाल –

Abhishek Ranjan Garg

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टीवी न्यूज़ एंकर प्रिया जुनेजा ने आत्महत्या कर लिया, प्रिया के आत्महत्या के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगें आखिर इतने कम उम्र की एक कामयाब होती लड़की ने आत्महत्या क्यों किया ? इसके साथ ही सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या पर चौबीस घन्टे ख़बर चलाने वाली मीडिया इस खबर को महत्व क्यो नही दे रही है.

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प्रिया ने आत्महत्या क्यो किया, यह पुलिस जांच का विषय है लेकिन एक नवयुवती टीवी एंकर के आत्महत्या के बाद मीडिया क्यों इस ख़बर को प्रमुखता से नहीं उठा रही अब लोग इसपर भी खुलकर बात कर रहे है.

वही कुछ युवा पत्रकारों ने मीडिया माफ़िया के खिलाफ़ पिछले 10 दिनों से डिजिटल युद्ध छेड़ रखा है. इनमें माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व और और वर्तमान छात्रो ने अपने अन्य सहयोगी पत्रकारों के साथ क़मर कस रखा है. ये युवा पत्रकार लगातार मीडिया में माफ़िया राज पर खुलकर लिख रहे है और सोशल मीडिया पर #mediamafia नाम का आंदोलन भी चला रहे है.

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अब यही युवा पत्रकार प्रिया जुनेजा के आत्महत्या के बाद मीडिया के दोहरे रवैया पर भी खुलकर लिख रहे है और मीडिया से सवाल कर रहे है की दिन रात सिनेमा माफ़िया पर चीख़ने वाली मीडिया अपने भीतर के माफ़िया राज पर क्यों चुप है, क्यों एक नवयुवती के आत्महत्या पर चुप्पी रखी है.

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प्रिया जुनेजा के आत्महत्या के बाद मीडिया के भीतर के माफ़िया राज के पोल खोल में लोग सक्रियता से लग गए है – ख़ैर अभी तक यह पता नही चल सका है कि प्रिया ने आत्महत्या क्यो किया लेक़िन मीडिया में इस ख़बर को प्रमुखता से नहीं दिखाए जाने को लेकर लोगो मे नाराजगी है.

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अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा ‘आसमां को जमीन’ पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके चुनिंदा शेर

Muzaffarpur Now

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मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) इस दुनिया में नहीं रहे. राहत इंदौरी की कोविड-19 के इलाज के दौरान मृत्यु हुई. इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने पुष्टि की. उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद यहां एक निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया थी.

अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा 'आसमां को जमीन' पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके 20 चुनिंदा शेर

आज ही (मंगलवार) सुबह 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी थी. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखायी देने पर कल (सोमवार) मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.” इंदौरी ने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.” 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहत कुरेशी उर्फ राहत इंदौरी के पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी था जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था.

उर्दू को विश्व पटल को एक नई और आधुनिक पहचान देने वाले शायरों में से एक राहत इंदौरी का इस दुनिया को छोड़ के जाना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. आज हम आपको मशहूर शायर राहत इंदौरी के कुछ चुनिंदा शेर शेयर कर रहे हैं. राहत इंदौरी जब अपने खास और बेहद कमाल के लहजे में स्टेज पर शेर पढ़ते थे तालियों की गड़गड़ाहट रुकती नहीं थी. उनका एक शेर ‘आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो..’ लोगों को बेहद पसंद है.

राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर

1. आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो.

मेरे हुजरे में नहीं, और कहीं पर रख दो,
आसमां लाये हो ले आओ, जमीं पर रख दो!
अब कहाँ ढूड़ने जाओगे, हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम, हमी पर रख दो!
उसने जिस ताक पर, कुछ टूटे दिये रखे हैं,
चाँद तारों को ले जाकर, वहीँ पर रख दो!

2. बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

3. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

4. तूफ़ानों से आँख मिलाओ
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

5. फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

6. बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

7. उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं

8. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

9. आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

10. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

11. तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

12. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

13. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

14. मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले

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शिक्षा मंत्री ने 11वीं क्लास में लिया दाखिला, मैट्रिक तक पढ़े होने के कारण होती थी फजीहत

Ravi Pratap

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झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने 11वीं क्लास में पढ़ेंगे. इसके लिए उन्होंने बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड के नावाडीह देवी महतो कॉलेज में जगरनाथ महतो ने एडमिशन ले लिया है. मंत्री जी की शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. मात्र मैट्रिक तक की इनकी शिक्षा पर निशाना साधा जा रहा था. इससे आजिज होकर इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने का निर्णय लिया.

एडमिशन करवाने के बाद श्री महतो ने कहा कि अब वह उच्च शिक्षा हासिल करेंगे. इसलिए आर्ट्स संकाय में एडमिशन करवाया है. कॉलेज जाकर मंत्री महतो ने नामांकन फॉर्म भरा. इसके बाद एक हजार एक सौ रुपये नामांकन शुल्क जमा कर रशीद लिया.

मंत्री जी के नामांकन को लेकर जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सारा काम देखते हुए सब कुछ करेंगे. ‘क्लास भी करेंगे और मंत्रालय भी संभालेंगे. घर में किसानी का काम भी करेंगे, ताकि मेरे काम को देखकर अन्य लोग भी प्रेरित हों.’

उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. अन्य नौकरियों में रहते हुए लोग आईएएस, आईपीएस की तैयारी करते हैं और सफल भी होते हैं.

बता दें कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा सेकेंड क्लास में पास की थी. और इन्होंने जिस कॉलेज की स्थापना इनेक सहयोग से ही हुआ है. उसी कॉलेज में इन्होंने अपना नामांकण कराया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिस दिन वह झारखंड के शिक्षा मंत्री बने थे, उसी दिन सोच लिया था कि अब आगे की पढ़ाई करेंगे. उनके मंत्री बनने के बाद लोगों ने कहा था कि दसवीं पास विधायक को शिक्षा मंत्री बनाया गया है. इसलिए हमने तय किया कि हम पढ़ेंगे. उच्च शिक्षा हासिल करेंगे और राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधा देंगे.

Input : Live Cities

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14 साल बाद मिला खोया हुआ पर्स, पुलिस ने शख्स को लौटाए पैसे

Muzaffarpur Now

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मुंबई में एक शख्स को उसको खोया हुआ पुराना पर्स वापस मिल गया। ये पर्स 14 साल पहले मुंबई की लोकल ट्रेन में खोया था और इस पर्स में उस समय 900 रुपये थे। साल 2006 में खोया हुआ ये पर्स शख्स को 14 साल बाद अब मिला है और पुलिस ने शख्स को उसकी राशि भी लौटा दी है।

14 साल पहले मुंबई लोकल में खो गया था ...

हेमंत पेडलकर साल 2006 में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-पनवेल लोकल ट्रेन में सफर कर रहे थे, जिस वक्त उनका पर्स ट्रेन में गुम हो गया। आज सरकारी रेलवे पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में बताया। इस साल अप्रैल महीने में हेमंत को जीआरपी की ओर से कॉल आई और उन्हें जानकारी दी गई कि उनका 14 साल पहले खोया हुआ पर्स अब मिल गया है।  हालांकि तब मुंबई में कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण हेमंत अपना पर्स लेकर नहीं आ पाए थे। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद पेडलकर जो कि पनवेल में रहते हैं, वाशी के जीआरपी ऑफिस गए और अपना पर्स वहां से बरामद किया और पुलिस ने हेमंत को पर्स में रखी राशि भी लौटाई।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि मेरे पर्स में 900 रुपये थे, जिसमें एक पांच सौ का नोट भी था जो साल 2016 में बंद कर दिया गया। पुलिस ने हेमंत को तीन सौ रुपये लौटा दिए और स्टाम्प पेपर काम के लिए पुलिस ने सौ रुपये काट लिए। हेमंत ने बताया कि पुलिस उसको 500 रुपये बदलकर देगी।

हेमंत ने कहा कि जब वो जीआरपी ऑफिस गए थे तो वहां कई लोग थे जो अपने चुराए हुए पैसे वापस लेने आए थे। इसमें कई हजारों नोट थे जो नोटबंदी के दौरान बंद हो चुके थे, इन लोगों को इस बात की चिंता थी कि उन्हें उनका पैसा कैसे और कब वापस मिलेगा।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि वो उनके पैसे वापस मिलने पर बेहद खुश हैं। एक जीआपरी अधिकारी ने बताया कि जिसने हेमंत पेडलकर का पर्स चुराया था, उसे कुछ समय पहले ही गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि हमें आरोपी से हेमंत का पर्स मिला, जिसमें 900 रुपये थे।

अधिकारी ने बताया कि हमने हेमंत को 300 रुपये लौटा दिए हैं और 500 रुपये तब लौटा दिए जाएंगे, जब पुराना नोट नए नोट से बदल दिया जाएगा।

Input : Amar Ujala

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