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Railway में 3 लाख से अधिक पद खाली, भर्ती की प्रक्रिया जारी: रेल मंत्री पीयूष गोयल

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रेलवे में तीन लाख से अधिक पद खाली हैं जिनमें से 2.94 लाख रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि रेलवे में स्वीकृत पदों की संख्या 15,24,127 है जिनमें से 12,17,900 पद भरे हुए हैं और 3,06,227 पद रिक्त हैं। गोयल ने बताया कि 2.94 लाख रिक्तियों के लिए सात रोजगार अधिसूचनाएं जारी की गई हैं और चार रोजगार अधिसूचनाओं के लिए भर्ती प्रकिया पूरी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि जोनों और मंडलों में 90,890 व्यक्तियों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है या जल्द ही करेंगे। गोयल ने इस वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले शेष 62,928 व्यक्तियों द्वारा कार्यभर ग्रहण किए जाने की संभावना जताई।

उन्होंने कहा कि अन्य तीन अधिसूचनाओं के लिए भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। रेल मंत्री के अनुसार, राजपत्रित पदों के लिए संघ लोक सेवा आयोग को 601 रिक्तियों के मांगपत्र भेजे गए हैं जिनमें डॉक्टरों के 200 पद शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि 2019-20 में सेवानिवृत्त होने वाले रेल कर्मचारियों की संख्या करीब 47,000 और 2020-21 में सेवानिवृत्त होने वाले रेल कर्मचारियों की संख्या लगभग 41,000 है।

Input : Live Hindustan

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देश के 12 लाख लोगों को रोजगार देंगी मोबाइल कंपनियां, 3 लाख लोगों को सीधे मिलेगी नौकरी

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केंद्रीय दूरसंचार और सूचना तकनीक मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा कि देश में आगामी पांच साल के दौरान करीब 11 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल हैंडसेट का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए सैमसंग, लावा, डिक्सन और एप्पल की खातिर काम करने वाली देसी-विदेशी करीब 22 कंपनियों ने सरकार के सामने प्रस्ताव पेश किए हैं. उन्होंने कहा कि कंपनियों की इस पहल से देश में करीब 12 लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. इसमें 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा, जबकि 9 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि कंपनियों ने सरकार के 41,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत अपने प्रस्ताव जमा कराए हैं. इससे देश में करीब 12 लाख रोजगार अवसरों का सृजन होगा. इनमें 3 लाख प्रत्यक्ष तथा 9 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

कुल 22 देसी-विदेशी कंपनियों ने किया आवेदन

प्रसाद ने कहा कि इनमें करीब 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल विनिर्माण करने और करीब 7 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात करने के प्रस्ताव हैं. मैं आवेदन करने वाली कंपनियों का निजी तौर पर शुक्रिया अदा करता हूं. उन्होंने कहा कि पीएलआई के तहत कुल 22 कंपनियों ने आवेदन किया है. इसमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की कंपनियां शामिल हैं.

कीमत को लेकर सरकार ने रखी शर्त

प्रसाद ने कहा कि इस योजना के तहत प्रस्ताव जमा कराने वाली विदेशी कंपनियों में सैमसंग, फॉक्सकॉन होन हेई, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन शामिल हैं. इस योजना का लाभ लेने के लिए इन विदेशी कंपनियों के लिए 15,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के मोबाइल फोन विनिर्माण की शर्त रखी गयी थी. भारतीय मोबाइल फोन विनिर्माता कंपनियों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है.

पीएलआई योजना से मोबाइल फोन निर्माण की बढ़ेगी रफ्तार

फॉक्सकॉन होन हेई, विस्ट्रॉन तथा पेगाट्रॉन अनुबंध पर एप्पल आईफोन का विनिर्माण करती हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, मोबाइल फोन की वैश्विक बिक्री में एप्पल की हिस्सेदारी 37 फीसदी और सैमसंग की 22 फीसदी है. पीएलआई योजना से देश में मोबाइल फोन का विनिर्माण कई गुणा बढ़ने की उम्मीद है.

हजारों करोड़ रुपये निवेश करेंगी कंपनियां

प्रसाद ने कहा कि आवेदन स्वीकार होने के बाद ये कंपनियां कई हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी. उन्होंने कहा कि लावा, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, सोजो मैन्युफक्चरिंग सर्विसेस और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी भारतीय कंपनियों ने भी पीएलआई के तहत आवेदन किया है, जबकि 10 अन्य कंपनियों ने विशेषीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे श्रेणी के तहत आवेदन किया है. ये प्रस्ताव करीब 45,000 करोड़ रुपये के हैं.

योजना में चीनी कंपनियां नहीं हैं शामिल

उन्होंने कहा कि इनमें आवेदन करने वाली प्रमुख कंपनियों में एटीएंडएस, एसेंट सर्किट्स, विजिकॉन, वालसिन, सहस्रा, विटेस्को और नियोलिंक शामिल हैं. इस योजना के तहत किसी भी चीनी कंपनी ने आवेदन नहीं किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश की कंपनियों के निवेश का विरोध नहीं करता है, लेकिन कंपनियों को अनुमति पाने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा. सरकार को इससे एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है.

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मोती की खेती से कर सकते हैं मोटी कमाई, मोदी सरकार कर रही है मदद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 67वां संस्करण में मोती की खेती (Pearl Cultivation) करने वाले की तारीफ की. पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के कुछ युवा पहले सामान्य नौकरी करते थे. फिर वे मोती की खेती करने लगे. अब वह खुद तो कमा रहे हैं, साथ ही प्रवासियों को भी खेती के बारे में जानकारी दे रहे हैं. अगर आप को लगता है कि अच्छी कमाई नहीं हो रही है तो मोती की खेती में हाथ आजमा सकते हैं. मोती की खेती के लिए सरकार से ट्रेनिंग भी ले सकते हैं यही नहीं बैंकों से मोती की खेती के लिए आसान शर्तों पर लोन भी लिया जा सकता है.आइए जानते हैं मोती की खेती के बारे में सबकुछ…

Pearl Farming Information For Beginners | Agri Farming

आजकल मोती की खेती चलन तेजी से बढ़ रहा है. कम मेहनत और लागत में अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है. मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है. मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है. मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानी अक्टूबर से दिसंबर तक का समय माना जाता है. इसके लिए आपको 500 वर्गफीट का तालाब बनाना होगा. तालाब में आप 100 सीप पालकर मोती उत्पादन शुरू कर सकते हैं. प्रत्येक सीप की बाजार में कीमत 15 रुपए से 25 रुपए होती है. वहीं ताबाल में स्‍ट्रक्‍चर सेट अप पर करीब 15 हजार रुपए तक का खर्च आता है. इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट पर भी करीब 1,000 रुपए और 1,000 रुपए के उपकरण भी लेने होते हैं.

Pearl Farming | Pearl farming is the industry responsible fo… | Flickr

कितनी हो सकती है कमाई

एक सीप से एक मोती 15 से 20 महीने बाद तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1,500 रुपए तक मिल सकती है. बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है. ऐसे में अगर एक मोती से औसतन 1,000 रुपए मिल जाता है तो कुल मिलाकर 1 लाख रुपए तक की कमाई आसानी से हो सकती है. सीप की संख्‍या को बढ़ाकर आप चाहें तो अपनी कमाई भी बढ़ा सकते हैं.

ट्रेनिंग की होगी जरूरत

मोती की खेती थोड़ा वैज्ञानिक खेती है. इसलिए इसे शुरू करने से पहले आपको प्रशिक्षण की जरूरत पड़ेगी. इंडियर काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च के तहत एक नया विंग बनाया गया है. इस विंग का नाम सीफा यानी सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर है. यह मोती की खेती की ट्रेनिंग देती है. इसका मुख्यालय उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्‍वर में है. यहां पर कोई भी 15 दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है. इस ट्रेनिंग के बाद आपको सीप की व्यवस्था करनी होगी. यह सीप आप सरकारी संस्‍थानों से या मछुआरों से ले सकते हैं.

सीप को कैसे करें तैयार

सबसे पहले इन सीप को खुले पानी में डालना पड़ता है. फिर 2 से 3 दिन बाद इन्हें निकाला जाता है. ऐसा करने से सीप के ऊपर का कवच और उसकी मांसपेशियां नरम हो जाती हैं. लेकिन इन सीप को ज्‍यादा देर तक पानी से बाहर नहीं रखना चाहिए. जैसे ही सीपों की मांशपेशियां नरम हो जाएं इनमें मामूली सर्जरी के माध्यम से उसकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद किया जाता है. इसके बाद इस छेद में से रेत का एक छोटा सा कण डाला दिया जाता है. जब इस तरह से सीप में रेत का कण डाला जाता है, तो सीप में चुभन होती है. इसके चलत सीप अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोड़ना शुरू कर देता है. अब 2 से 3 सीप को एक नायलॉन के बैग में रखकर तालाब में बांस या किसी पाईप के सहारे छोड़ा जाता है. बाद में इस सीप से 15 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाता है. अब कवच को तोड़कर मोती निकाला जाता है.

Input : News18

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बांस उद्योग में बेहतर है मौका, मोदी सरकार भी कर रही है मदद

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बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए और प्लास्टिक के इस्तेमाल के खतरे से बचने के लिए सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाई दी थी। इसके बाद से बांस उद्योग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बांस से बने कई सामान बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें से बहुत से सामान ऐसे हैं जो घर में सजावट के लिए इस्तेमाल में आते हैं और कई सारे सामानों का इस्तेमाल दिनचर्या में लाया जाता है। बांस से बनी क्रॉकरी खूब बिक रही है। इसके अलावा बांस के बोतल, कप-प्लेट तमाम सामान लोगों द्वारा खूब पसंद किए जा रहे हैं। अगर आप भी बांस से जुड़े व्यापार में शामिल होना चाहते हैं तो आपको इसके लिए सरकार की ओर से मदद भी मिलेगी।

To this craftakari, paper is the new bamboo- The New Indian Express

मोदी सरकार फिलहाल लोकल पर ज्यादा जोर दे रही है। जिससे स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मोदी सरकार ने साल 2018 में बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटा दिया था। किसान अब बिना किसी रुकावट के आसानी से बांस की खेती कर सकते हैं। राष्ट्रीय बैंबू मिशन को तकनीकी सहायता देने के लिए बैंबू टेक्निकल सपोर्ट ग्रुप (BTSG) का भी गठन किया गया है। जानिए कुछ ऐसे ही कामों के बारे में…

Artisans struggling to keep bamboo craft alive- The New Indian Express

बांस से जुड़े उत्पाद

खादी ग्रामोद्योग आयोग बांस की बोतल बनाकर बाजार में बेचती है। खादी ग्रामोद्योग आयोग खादी, शहद जैसे कुटिर उद्योगों के साथ अब बांस उद्योग का विस्तार कर रहा है। खादी ग्रामोद्योग आयोग लोगों को बांस के सामान तैयार करने की ट्रेनिंग दे रहा है साथ ही काम शुरू करने के लिए लोन की व्यवस्था भी करा रहा है। इस बारे में ज्यादा जानकारी आप खादी ग्रामोद्योग आयोग की वेबसाइट www.kvic.gov.in/kvicres/index.php से ले सकते हैं। मालूम हो कि बास की बोतल या अन्य सामान बनाने की ट्रेनिंग आप राष्ट्रीय बांस मिशन की वेबसाइट nbm.nic.in से भी हासिल कर सकते हैं। यहां ऐसे कई संस्थानों के बारे में बताया गया है जो बांस से सामान बनाने की ट्रेनिंग देते हैं। इस लिंक nbm.nic.in/Hcssc.aspx से आप ज्यादा जानकारी ले सकते हैं।

Amid war on plastic, Patan bamboo artisan fights battle for ...

बांस उद्योग के लिए कितना खर्च

बांस उद्योग में कई तरह के काम होते हैं जिसकी लागत अलग-अलग होती है। मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, अगर किसी को बांस के आभूषण बनाने की यूनिट शुरू करना हो तो उसे 15 लाख रुपये की शुरुआती जरुरत पड़ेगी। इस बारे में अधिक जानकारी आप apps.mpforest.gov.in/MPSBM/ से ले सकते हैं।

The bamboo bait! | India Beckons

इसके अलावा आप नेशनल बेंबू मिशन की वेबसाइट nbm.nic.in से भी जानकारी ले सकते हैं।

मोदी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। केंद्र ने बांस के आयात पर सीमा शुल्क को 10 फीसद से बढ़ाकर 25 फीसद कर दिया है।

Kerala bamboo crafts workshop in bamboo village, Uravu | Wandertrails

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