पटना। बिहार में जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी तेज कर दी गई है। अगस्त से राज्य के सभी 145 निबंधन कार्यालयों में रजिस्ट्री प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस करने का लक्ष्य रखा गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेजों की जांच, सत्यापन, सहमति और निबंधन से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएंगी।

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने निबंधन कार्यालयों को आठ से दस चरणों में डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की योजना तैयार की है। विभाग के अनुसार, इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों के समय की बचत होगी। साथ ही जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए भारी फाइलों के साथ बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत भी कम होगी।

हाजीपुर से हुई पेपरलेस व्यवस्था की शुरुआत
राज्य में पेपरलेस निबंधन व्यवस्था की शुरुआत हाजीपुर जिला निबंधन कार्यालय से की गई है। प्रथम चरण में कुल 10 निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हाजीपुर में व्यवस्था लागू होने के बाद अब 18 जुलाई को नौ अन्य निबंधन कार्यालयों को भी पेपरलेस किया जाएगा।

इनमें जिला निबंधन कार्यालय जहानाबाद के अलावा पातेपुर (वैशाली), फतुहा और संपतचक (पटना), सोनपुर (सारण), डेहरी ऑन-सोन (रोहतास), मंझौल (बेगूसराय), बाबूबरही (मधुबनी) तथा सोनवर्षा (सहरसा) के अवर निबंधन कार्यालय शामिल हैं।
विभाग का लक्ष्य इसी महीने करीब दो दर्जन निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस व्यवस्था शुरू करने का है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

ऑनलाइन होगी दस्तावेजों की जांच और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
नई व्यवस्था में जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन तैयार और अपलोड किए जा सकेंगे। दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी।
खरीदार, विक्रेता और संबंधित अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर के आधार पर निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होने के साथ रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में भी सुविधा होगी।
खरीदार और विक्रेता का होगा आधार सत्यापन
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में खरीदार और विक्रेता दोनों का सहमति-आधारित आधार सत्यापन किया जाएगा। भूमि या संपत्ति हस्तांतरण के लिए ओटीपी के माध्यम से संबंधित पक्षों की सहमति ली जाएगी। इस प्रक्रिया को ई-साइन प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
डिजिटल सत्यापन से दस्तावेजों की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही फर्जी दस्तावेज, जालसाजी और रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव जैसी गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिल सकती है।

सभी कार्यालयों में उपलब्ध है ई-निबंधन सुविधा
जो निबंधन कार्यालय अभी पूरी तरह पेपरलेस नहीं हुए हैं, वहां ई-निबंधन की सुविधा उपलब्ध है। इसके माध्यम से लोग जमीन, फ्लैट या विवाह निबंधन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।
ऑनलाइन दस्तावेज जमा करने के बाद आवेदक अंतिम रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी सुविधा के अनुसार तिथि और समय का चयन कर सकते हैं। निर्धारित समय पर निबंधन कार्यालय पहुंचकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यह ऑनलाइन सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है।

डीड लेखन और सर्विस प्रोवाइडर व्यवस्था में भी होगा बदलाव
पेपरलेस निबंधन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए डीड लेखन और सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े नियमों में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। नई डिजिटल प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, दस्तावेज लेखकों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण देने की भी तैयारी की जा रही है।
नई व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद बिहार में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी होने की उम्मीद है।










