Jio Fiber Plans हुए लॉन्च, जानें कैसे आपकी जिंदगी और घर खर्च पर पड़ेगा इसका असर
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Jio Fiber Plans हुए लॉन्च, जानें कैसे आपकी जिंदगी और घर खर्च पर पड़ेगा इसका असर

Santosh Chaudhary

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रिलायंस जियो ने 14 अगस्त को अपनी फाइबर सेवाओं को लॉन्च करने की घोषणा की थी। आज यानि 5 सितंबर 2019 को जियो फाइबर की टैरिफ भी जारी कर दी। सेल्युलर सेवाओं में वर्चस्व कायम करने के बाद रिलायंस ने अब ऑप्टिकल फाइबर, केबल टीवी और लैंडलाइन के सेक्टर में धमाकेदार एंट्री कर ली है। जी हां, यह तीनों सेवाएं रिलायंस अपने जियो फाइबर के जरिए आपके घर तक लेकर आएगा। यानि अब आपको तीन अलग-अलग सेवाओं की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सिर्फ एक सर्विस लेकर आप एक साथ ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन फोन और केबल टीवी का लुत्फ ले सकते हैं। आपका प्रश्न हो सकता है कि तीन के बदले एक सेवा लेने पर क्या आपके पैसे भी बचेंगे? इसी प्रश्न का उत्तर हम यहां ढूंढेंगे।

केबल टीवी कितना महंगा
अगर आप केबल टीवी देखना चाहते हैं तो फ्री टू एयर चैनल के लिए भी आपको कम से कम 100 रुपये खर्च करने पड़ते हैं इसके अलावा अपने पसंदीदा चैनलों के लिए अलग से कीमत चुकानी पड़ती है। इस तरह से आपको केबल टीवी देखने के लिए हर महीने 250 से 500 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। डीटीएच कंपनियों के सैटटॉप बॉक्स लगाने पर इस मासिक फीस में 5-10 फीसद की छूट भी मिल जाती है, लेकिन इसके बावजूद आपका बिल उस तरह से कम नहीं होता जैसा पहले आपको 300 रुपये में सभी चैनल देखने को मिल जाते थे।

ब्रॉडबैंड के लिए चुकानी पड़ती है मोटी फीस
तेज इंटरनेट आज की जरूरत बन चुकी है। आप और हम सभी ने अपने-अपने घरों में ब्रॉडबैंड सेवाएं ली हुई हैं, ताकि एंटरटेनमेंट और काम में कोई रुकावट न आए। इसके लिए भी आपको कम से कम 500 रुपये प्रति माह चुकाने पड़ते हैं। इतने कम के प्लान में आपको स्पीड के साथ कुछ समझौता जरूर करना पड़ता है।

लैंडलाइन फोन
मोबाइल बढ़ने के साथ-साथ लैंडलाइन की लोकप्रियता लगातार कम हुई है। इसके बावजूद हममें से कई लोग अपने घरों पर लैंडलाइन कनेक्शन लेते हैं। कभी नेटवर्क न होने या लंबी बातचीत के लिए हम सभी लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करते हैं। अगर हम लैंडलाइन फोन घर पर लगाते हैं तो इसके लिए भी हमें एक कीमत तो हर महीने चुकानी ही पड़ती है। लैंडलाइन पर हर माह होने वाला खर्च कम के कम 100 रुपये तो होगा ही।

कुल कितना खर्च करते हैं आप
केबल टीवी, ब्रॉडबैंड कनेक्शन और लैंडलाइन फोन के लिए इस तरह से आपको हर महीने 700 से 1000 रुपये तक कम से कम खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा सभी के अलग-अलग बिल भरने की चिंता भी आपके बाल झड़ने की वजह बनते हैं। टीवी चैनलों और ब्रॉडबैंड स्पीड के साथ आपको समझौता करना पड़ता है। जबकि रिलायंस के जियो फाइबर में आपको एक बिल में यह सभी सेवाएं एक साथ मिल जाती हैं और वह भी काफी किफायती दर पर। आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी इसी तरह के प्लान लाएंगी, ताकि उनका यूजरबेस जियो फाइबर की तरफ न खिसके।

जियो फाइबर के लिए कितना करना होगा खर्च
अब बात करते हैं जियो फाइबर की। इसके लिए आपको कितना खर्च करना होगा? कैसी सेवा होगी, कितना तेज इंटरनेट चलेगा आदि पर…

रिलायंस ने जियो फाइबर के प्लान ब्रॉन्ज, सिल्वर, गोल्ड, डायमंड, प्लैटिनम और टाइटेनियम कैटेगरी में उतारे हैं। इसका बेसिक प्लान जहां सिर्फ 699 रुपये में मिलेगा वहीं मासिक प्लान के लिए अधिकतम 8499 रुपये चुकाने होंगे। बेसिक प्लान में 100 एमबीपीएस की स्पीड के साथ 100 जीबी मुफ्त डाटा, मुफ्त वाइस कॉल, टीवी वीडियो कॉलिंग और कॉन्फ्रेंस की सुविधाएं मिलेंगी। दूसरे प्लान 849 रुपये का है और इसमें 100 एमबीपीएस की स्पीड के साथ 200 जीबी डाटा मुफ्त मिलेगा और अन्य सभी सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी।

1299 में 500 जीबी डाटा
अगर आप हर महीने करीब 1300 रुपये खर्च करने को तैयार हैं तो इस प्लान के तहत रिलायंस 250 एमबीपीएस की डाटा स्पीड के साथ 500 जीबी डाटा देने का वादा कर रहा है। इसके अलावा 2499 के प्लान में 500 एमबीपीएस की स्पीड के साथ 1250 जीबी डाटा देगा। 3999 के प्लान के साथ 1 जीबीपीएस की स्पीड से 2500 जीबी डाटा और 8499 रुपये के प्लान में 1 जीबीपीएस डाटा स्पीड के साथ 5000 जीबी डाटा दिया जाएगा।

2500 की वनटाइम पेमेंट
जियो फाइबर के लिए आपको पहली बार में 2500 रुपये चुकाने होंगे। इसमें 1500 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट है, जिसे आप बाद में वापस ले सकते हैं। इसके अलावा 1000 रुपये नॉन रिफंडेबल इंस्टॉलेशन चार्ज होगा, जो आपको वापस नहीं मिलेगा।

वेलकम ऑफर में क्या-क्या मिलेगा
जियो ने वेलकम ऑफर की भी घोषणा की है। जियो के फॉरेवर एनुअल प्लान्स के तहत आपको जियो होम गेटवे, जियो 4K सेट टॉप बॉक्स, टीवी सेट (गोल्ड प्लान या उससे ऊपर के लिए) और ओटीटी एप्स का सबस्क्रिप्शन आपको मिलेगा।

तीन पर भारी एक कनेक्शन
इस तरह से अगर आपके पुराने लैंडलाइन कनेक्शन, केबल टीवी कनेक्शन और ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जियो फाइबर की तुलना की जाए तो आपको कम पैसों में शानदार क्वालिटी, स्पीड की सेवाएं मिलेंगी। मत भूलिए की 1299 या इससे ऊपर के प्लान के साथ आपको 4K टीवी मुफ्त मिल रहा है। यानि आप इस एक कनेक्शन के साथ अपना काफी पैसा बचा सकते हैं।

पहले से ही थी ऐसी उम्मीदें
पहले से ही माना जा रहा था कि कंपनी Jio Fiber के प्लान्स की कीमत की भी घोषणा करेगी जो कि Rs 700 प्रति महीने से शुरू होकर Rs 10,000 प्रति महीने के बीच हो सकती है। माना जा रहा था कि Reliance Jio Fiber में यूजर्स को Welcome Offer के साथ Free Set Top Box, Smart HD TV, ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन जैसे ऑफर्स भी मुहैया कराएंगे जाएंगे और ऐसा ही हुआ भी। Reliance Jio Fiber के तहत यूजर्स को हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सर्विस का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। आइए जानते हैं Jio Fiber में यूजर्स को क्या-क्या मिलेगा…

मुफ्त लैंडलाइन कनेक्शन
Jio Fiber में ग्राहकों को मुफ्त में लैंडलाइन कनेक्शन दिया जाएगा। इस लैंडलाइन कनेक्शन से यूजर्स भारत में सभी मोबाइल और लैंडलाइन कनेक्शंस पर मुफ्त फोन कॉल का लाभ उठा सकते हैं। काफी समय से Jio Fiber की यह सभी सेवाएं कुछ शहरों में टेस्टिंग के लिए उपलब्ध थीं। जिन यूजर्स के पास पहले से कनेक्शन है, वो लैंडलाइन कनेक्शन के लिए MyJio ऐप से अप्लाई कर सकते हैं।

Input : Dainik Jagran

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लिंचिंग पर पीएम को पत्र लिखने वालों के खिलाफ आखिर मुजफ्फरपुर में ही केस क्यों ?

Ravi Pratap

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मॉब लिंचिंग के विरोध में इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देश की तमाम मशहूर शख्सियतों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जिला अदालत ने दिया है.मुजफ्फरपुर के स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा ने दो महीने पहले मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी सीजेएम सूर्यकांत तिवारी की कोर्ट में अर्जी दी थी कि इन लोगों ने ऐसा करके देश के प्रधानमंत्री की छवि धूमिल की है जो कि राजद्रोह जैसा जुर्म है, इसलिए इनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए.

 

सीजेएम ने ओझा की याचिका पिछले महीने बीस अगस्त को स्वीकार कर ली थी जिसके इसके बाद गुरुवार यानी तीन अक्टूबर को सदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई. एफआईआर में ओझा ने आरोप लगाया है कि देश की इन जानी-मानी हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया. याचिकाकर्ता ने इन सभी लोगों पर अलगाववादी प्रवृत्ति का समर्थन करने का भी आरोप लगाया.

23 जुलाई को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े देश के तमाम लोगों ने मांग की थी कि मॉब लिंचिंग जैसे मामलों में जल्द से जल्द और सख्त सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए. पत्र लिखने वालों में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फिल्मकार मणि रत्नम, अपर्णा सेन, गायिका शुभा मुद्गल, अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप सहित विभिन्न क्षेत्रों की कम से कम 49 हस्तियां शामिल थीं.

पुलिस के मुताबिक इस मामले में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं. अब इन लोगों को या तो अग्रिम जमानत लेनी होगी या फिर गिरफ्तार होने के लिए तैयार रहना होगा.

क्या है बिहार कनेक्शन

जिन हस्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है उनमें से शायद ही किसी का संबंध बिहार से हो. फिर भी यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर में क्यों दर्ज हुआ, यह सवाल उठना लाजिमी है. हालांकि ऐसे पहले भी कई मामले सामने आते रहे हैं जिनमें वादी का सीधे तौर पर किसी मामले से संबंध न हो और उस जगह का भी संबंध न हो जहां शिकायत की जा रही हो, फिर भी कई बार अदालतों के आदेश पर या सीधे ही पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी जाती है.

सुप्रीम कोर्ट में वकील दुष्यंत पाराशर कहते हैं, “यदि कोई मामला जनहित का हो या फिर देश और समाज के बड़े हिस्से के हितों से सरोकार रखता हो तो उन्हें कोई भी और किसी भी जगह दर्ज करा सकता है. ऐसे में कोर्ट खुद संज्ञान लेती है कि मामले में कितनी गंभीरता है. ऐसे मामलों में न्यायाधिकार क्षेत्र नहीं देखा जाता है.”

दुष्यंत पाराशर कहते हैं कि किसी व्यक्ति के बयान से यदि किसी की भावना आहत होती है तो जरूरी नहीं कि उस व्यक्ति ने जहां बयान दिया है या वो जहां से ताल्लुक रखता है, वहीं केस दर्ज कराया जाए. पीड़ित व्यक्ति या आहत व्यक्ति कहीं भी केस दर्ज करा सकता है. उनके मुताबिक, ये विवेचना और फिर कोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चल जाएगा कि मामले में कितना दम है या फिर जिस व्यक्ति की भावना आहत हुई है क्या वह सचमुच ऐसा मामला है जो व्यापक स्तर पर जनसमुदाय की भावनाओं से सरोकार रखता हो.

हालांकि कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि ऐसे मामलों में जो प्रार्थना पत्र दिया जाता है उसमें इस बात को स्पष्ट करना जरूरी होता है कि क्या यह मामला सच में जनहित या देशहित से जुड़ा है और इसमें न्यायाधिकार क्षेत्र का मुद्दा नहीं आएगा. उत्तर प्रदेश में अभियोजन विभाग में अतिरिक्त निदेशक रह चुके हरिहर पांडेय कहते हैं, “सामान्य मामलों में तो इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि मामला किस न्यायाधिकार क्षेत्र का है लेकिन कुछ मामलों में इसका विस्तार भी होता है और राजद्रोह जैसे मामलों में इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता. लेकिन यह भी सच है कि इसमें इस बात को पूरे प्रमाणों और दस्तावेजों के साथ बताना भी पड़ेगा कि ये कैसे राजद्रोह है.”

केस दर्ज करने के कैसे कैसे आधार

वरिष्ठ वकीलों और कानूनी जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामलों को कहीं भी दर्ज कराने में कोई दिक्कत भले ही न हो लेकिन इस तरह के मामलों में नोटिस जारी करके या फिर एफआईआर के आदेश देने के पीछे कई बार जजों के ‘चर्चा में आने की ख्वाहिश’ भी रहती है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील डॉक्टर सुरत सिंह कहते हैं कि जनहित याचिकाओं और न्यायिक सक्रियता के मामलों में अदालतों की आलोचना इसीलिए हुई क्योंकि कई ऐसे मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्राथमिकता के तौर पर सुने जाने लगे, जो कि जनहित के नाम पर तो लाए गए थे लेकिन उससे भी व्यापक जनहित के मामलों को इनकी तुलना में नजरअंदाज कर दिया गया. ऐसा सिर्फ इसलिए कि उन मामलों की चर्चा होती थी और अखबारों में खबरें छपती थीं.

तीन साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के एक जज को इसलिए निलंबित कर दिया था क्योंकि वो आए दिन किसी न किसी मामले में चर्चित राजनीतिक हस्तियों या फिर ऐसे ही लोगों को नोटिस जारी करके कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश देते थे. साल 2016 में महोबा के एक सिविल जज अंकित गोयल को इसलिए निलंबित कर दिया गया था क्योंकि वह न्यायिक कार्यों में अविवेकपूर्ण फैसले लेते थे. उनके खिलाफ यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस के आदेश पर की गई थी.

दरअसल अंकित गोयल ने सितंबर 2015 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह के खिलाफ नोटिस जारी कर उन्हें हाजिर होने को कहा था. इसके अलावा उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी किसी मामले में खुद ही संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ धारा 124A और आईपीसी की धारा 505 के तहत मामला दर्ज किया था. उन्होंने तत्कालीन मंत्री आजम खान को भी किसी मामले में हाजिर होने का निर्देश दिया था.

रिपोर्ट : निधि चोपड़ा

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प्लास्टिक की जगह अब बांस की बोतल में पीएं पानी, गडकरी आज करेंगे लॉन्च

Santosh Chaudhary

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2 अक्टूबर से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्र’तिबंध लगाने की तैयारी में है. इसीलिए सरकार एक नया विकल्प लाई है. इसके विकल्प के तौर पर एमएसएमई मंत्रालय (MSME) के अधीन कार्यरत खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल का निर्माण किया है, जो प्लास्टिक बोतल की जगह इस्तेमाल होगी. केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने बांस की इस बोतल को एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च कर दिया है.

क्या होगी इस बोतल की कीमत- इस बांस की बोतल की क्षमता कम से कम 750 एमएल की होगी और इसकी कीमत 300 रुपये से शुरू होगी. यह बोतलें पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं. दो अक्तूबर से खादी स्टोर में इस बोतल की बिक्री की शुरुआत होगी.

2 अक्टूबर है और इस दिन गांधी जयंती के अवसर पर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सरकार पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रही है.

हालांकि केवीआईसी द्वारा पहले ही प्लास्टिक के गिलास की जगह मिट्टी के कुल्हड़ का निर्माण शुरू किया जा चुका है. इस प्रक्रिया के तहत अभी तक मिट्टी के एक करोड़ कुल्हड़ बनाए जा चुके हैं.

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ये चीजें भी की गई लॉन्च

केवीआईसी ने वित्त वर्ष के अंत तक एक करोड़ की क्षमता को तीन करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. माना जा रहा है कि इससे रोजगार भी पैदी होगा.

गडकरी बांस की बोतल के अलावा खादी के अन्य प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किया है. नितिन गडकरी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर से खादी ग्रामोद्योग उत्पादों पर विशेष छूट दिए जाने की घोषणा की और कई नए उत्पादों का उद्घाटन किया.

इसके साथ सोलर वस्त्र(सोलर चरखा से बना), गोबर से बना साबुन और शैम्पू, कच्ची घानी सरसो तेल सहित कई उत्पाद लांच किया गया है.

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न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

Santosh Chaudhary

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बिहार में तीन दिनों से जारी भारी बारिश ने नीतीश सरकार की विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है. राजधानी पटना बाढ़ और बारिश के पानी में पूरी तरह डूब चुका है जबकि पूर्वी बिहार के ज्यादातर हिस्सों में भी बारिश के रौद्र रूप ने लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. राज्य में भारी बारिश और बाढ़ से अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है. पटना में आई बाढ़ ने आम आदमी तो क्या सरकार के मंत्रियों को भी नहीं बख्शा है और हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि डिप्टी सीएम सुशील मोदी का भी एनडीआरएफ को रेस्क्यू करना पड़ा. सुशील मोदी के सरकारी आवास में भी बाढ़ का पानी घुस चुका है. सुशील मोदी रेस्क्यू के बाद अपने सामान के साथ एक फ्लाईओवर पर खड़े नजर आए जिसके बाद उनकी यह तस्वीर वायरल हो गई.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

 

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

सारण से बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री रह चुके राजीव प्रताप रूडी के भी आवास में बाढ़ का पानी भर गया है. अगर आप इन दिनों उनके घर जाना चाहेंगे तो पैदल या गाड़ी से नहीं बल्कि नाव से जाना होगा. पूरा पटना जलमग्न हो गया है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

राजधानी पटना में आई बरसाती बाढ़ से आम और खास सब डूबे हुए है. कई इलाकों में मकानों की पहली मंजिल आधे से ज्यादा डूब चुकी है. इसी बीच पटना के कदम कुआं इलाके से हाईकोर्ट के जज साहब और उनके परिवार का रेस्क्यू करना पड़ा.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

बिहार की स्वरकोकिला शारदा सिन्हा का भी पटना के राजेन्द्रनगर स्थित घर में पानी घुस गया जिसके बाद उन्हें एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पहुंचाया.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

पटना साहिब सीट से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राजधानी पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी थी.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

गली, मोहल्ले, स्कूल-कॉलेज, सड़क, बाजार से शोरूम तक के अंदर पानी घुस गया है. पटना में जलजमाव से प्रभवित लोगों की मदद के लिए बिहार सरकार ने गृह मंत्रालय से 2 हेलिकॉप्टर की मांग की है. साथ ही कोल इंडिया से जल जमाव को निकालने के लिए पम्प की भी मांग की है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के मद्देनजर रविवार को फिर बैठक की और पटना में जलजमाव वाले इलाकों का दौरा की हालात का जायजा लिया. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के दोनों किनारे स्थित 12 जिलों में लोगों के लिए दिक्कत की स्थिति पैदा हो गई है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

पानी में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने की कोशिश की जा रही है. पानी का कर्फ्यू लागू है और सहमा हुआ सा शहर अपनी बेबसी पर रोता नजर आ रहा है. बिहार में बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों की दो दिन की छुट्टी कर दी गई है. पटना दरिया हो चुका है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

मूसलाधार बारिश के मद्देनजर रविवार को फिर बैठक की और पटना में जलजमाव वाले इलाकों का दौरा की हालात का जायजा लिया. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के दोनों किनारे स्थित 12 जिलों में लोगों के लिए दिक्कत की स्थिति पैदा हो गई है.

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पानी में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने की कोशिश की जा रही है. पानी का कर्फ्यू लागू है और सहमा हुआ सा शहर अपनी बेबसी पर रोता नजर आ रहा है. बिहार में बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों की दो दिन की छुट्टी कर दी गई है. पटना दरिया बन चुका है.

Input : Ajj Tak

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