वैशाली में कायम हुआ था विश्‍व का पहला गणतंत्र
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वैशाली में कायम हुआ था विश्‍व का पहला गणतंत्र

Santosh Chaudhary

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पुरातत्‍व विभाग के प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि वैशाली में ही दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र कायम किया गया था.

विश्‍व में सबसे पहला गणतंत्र का तमगा बिहार के वैशाली के पास है. वैशाली, बिहार के वैशाली जिले में स्थित एक गांव है. यहां की मुख्य भाषा ‘वज्जिका’ है. पुरातत्‍व विभाग के प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि वैशाली में ही दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र कायम किया गया था. आइए जानते हैं विश्‍व के प्रथम गणतंत्र वैशाली की खासियत और वहां के प्रमुख स्‍थलों के बारे में :

Credit : Ek Bihari

अशोक स्तंभ

कोल्हु में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया एक स्तंभ है जिसके शीर्ष पर शेर बना है. वैशाली का यह स्तंभ अशोक द्वारा निर्मित दूसरे स्तंभों से बिल्कुल अलग और शुरुआती स्तंभ है. खुदाई द्वारा मिले इस बेलाकार स्तंभ की ऊंचाई 18.3 मीटर है, जो लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है जिस पर उनका कोई अभिलेख नहीं.

राजा विशाल का गढ़

अशोक स्तंभ के नज़दीक ही खुदाई में एक बहुत ही बड़ा टीला भी मिला. इसकी परिधि 1 किमी है. इसके चारों ओर 2 मीटर ऊंची दीवार है और चारों तरफ 43 मीटर चौड़ी खाई. ऐसा माना जाता है उस जमाने में यहां संसद हुआ करती थी, जिसमें लोगों की समस्याओं को सुना और उस पर बहस किया जाता था.

अभिषेक पुष्करणी

यह वैशाली गणराज्य द्वारा तकरीबन ढाई हजार वर्ष पूर्व एक सरोवर है. ऐसी मान्यता है कि इस गणराज्य में जब भी कोई नया शासक चुना जाता था तो उनको यहीं पर अभिषेक करवाया जाता था.

विश्व शांति स्तूप

इस पवित्र सरोवर के नज़दीक ही जापान के निप्पोनजी बौद्ध समुदाय द्वारा बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है. गोल घुमावदार गुंबद, अलंकृत सीढ़ियां और उनके दोनों ओर स्वर्ण रंग के बड़े सिंह जैसे पहरेदार शांति स्तूप की रखवाली कर रहे ऐसा लगते हैं. सीढ़ियों के ठीक सामने ध्यानमग्न बुद्ध की स्वर्णिम प्रतिमा है, जिसके चारों ओर भिन्न-भिन्न मुद्राओं में बुद्ध की दूसरी प्रतिमाएं.

बावन पोखर मंदिर

बावन पोखर के उत्तर किनारे पर बना पाल कालीन मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां लगी हुई हैं.

बौद्ध स्तूप

यहां बने स्तूपों का पता 1958 में खुदाई के बाद चला, जिसका महत्व भगवान बुद्ध के राख पाए जाने की वजह से और बढ़ गया. बुद्ध के पार्थिक अवशेष पर बने 8 मौलिक स्तूपों में से एक है, जो बौद्ध अनुयायियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

कैसे पहुंचें

  • हवाई मार्ग- पटना यहां का नज़दीकी एयरपोर्ट है. यहां के लिए ज्यादातर शहरों से फ्लाइट की सुविधा अवेलेबल है.
  • रेल मार्ग- हाजीपुर, यहां का नज़दीकी रेलवे स्टेशन है. यहां से वैशाली 35 किमी दूर है. दिल्ली, कोलकाता, मुंबई लगभग सभी बड़े शहरों से यहां के लिए ट्रेनें अवेलेबल हैं.
  • सड़क मार्ग- पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों से आप आसानी से सड़कमार्ग द्वारा यहां तक पहुंच सकते हैं.

MUZAFFARPUR

अब एलएस कॉलेज से करिए योग में पीजी डिप्लोमा

Santosh Chaudhary

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l.s college -muzaffarpur

एलएस कॉलेज में यौगिक स्टडीज कोर्स में पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं। प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय की सालभर की कड़ी मशक्कत के बाद इस कोर्स को यहां चालू कराने में सफलता मिल पाई है। बुधवार को विश्वविद्यालय ने प्राचार्य को पत्र भेजकर कोर्स शुरू करने की मंजूरी की जानकारी दी। सीसीडीसी डॉ.अमिता शर्मा ने प्राचार्य को बताया कि सभी वैधानिक निकायों से अनुमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने भी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी है। सौ सीटों के लिए यह अनुमति मिली है। इसी सत्र से यह कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत शुरू होगा। प्राचार्य ने कहा कि यह कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह कोर्स दर्शनशास्त्र विभाग की देखरेख में चलेगा। इसके लिए 100 सीटें निर्धारित की जाएंगी।

जल्द ही नामांकन संबंधी सूचना जारी होगी। स्नातक पास छात्र-छात्रएं इस कोर्स में नामांकन करा सकते हैं। साथ ही आसपास के जिलों व दूसरे विश्वविद्यालयों के योग शिक्षक भी इस कोर्स में फैकल्टी के रूप में शामिल किए जा सकते हैं। कोर्स चालू होने को लेकर शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई है। साथ ही प्राचार्य को इस बात के लिए बधाई भी दी है कि उनकी तत्परता व मेहनत की बदौलत कॉलेज को ये उपलब्धि हासिल हो पाई है। बधाई देने वालों में डॉ. एसके मुकुल, डॉ. एसआर चतुर्वेदी, डॉ. गजेंद्र कुमार, डॉ. शशि कुमारी सिंह, डॉ. शैल कुमारी, प्रो. त्रिपदा भारती, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. जफर अहमद सुल्तान, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जयकांत सिंह जय, डॉ. एनएन मिश्र, डॉ. अजय कुमार, डॉ. ललित किशोर, डॉ. सतीश कुमार समेत अन्य शिक्षक शामिल हैं।

Input : Dainik Jagran

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MUZAFFARPUR

बा’लिका गृ’ह कां’ड में साकेत को’र्ट आज सुना सकता है फै’सला

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर बा’लिका गृ’ह यौ’न हिं’सा कां’ड में साकेत को’र्ट गुरुवार को फै’सला सुना सकता है। मुख्य अ’भियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 लोगों पर पॉ’क्सो समेत विभिन्न धा’राओं में मुक’ दमा चल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ इस मा’मले की सुनवाई कर रहे हैं।

अभियुक्तों में बालिकागृह के कर्मचारी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। यह भी संयोग ही है कि बाल दिवस (14 नवंबर) को पीड़ित बच्चों को न्याय मिलेगा। हालांकि वकीलों की हड़ताल के कारण फैसला टलने की भी आशंका है। पिछले साल मई में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में कई बच्चियों से दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर पर पॉक्सो व दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था। सभी 20 आरोपितों को 23 फरवरी को कड़ी सुरक्षा में दिल्ली लाया गया था।

वकीलों की हड़ताल से असमंजस की स्थिति : पुलिस से हुए विवाद को लेकर दिल्ली में इस समय वकीलों की हड़ताल चल रही है। ऐसे में फैसले को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि फैसले के समय उपस्थित रहने के लिए दिल्ली पहुंचे बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने मोबाइल पर बताया कि कोर्ट में यह मामला सूचीबद्ध है। इसमें फैसला सुनाए जाने की तिथि निर्धारित है।

ये हैं आरोपित : ब्रजेश ठाकुर, बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सदस्य विकास कुमार, बालिका गृह की कर्मचारी इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी, विक्की, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु।

बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की कराई पहचान

सीबीआइ ने बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की पहचान कराई है। ये वे अधिकारी हैं, जिनकी विभागीय संचिकाओं में कई मौके पर हस्ताक्षर हैं। इसके लिए इकाई के दो कर्मचारियों को सीबीआइ ने पटना तलब किया था। इनमें बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा, रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन सहित अन्य शामिल हैं। इसमें से रोजी रानी व रवि रोशन फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। वहीं दिवेश कुमार शर्मा ने ही इस मामले में महिला थाना में केस दर्ज कराया था। सीबीआइ की जांच में बाल संरक्षण इकाई शुरू से ही निशाने पर रही है। सीबीआइ की टीम ने कई बार यहां आकर जांच की तथा संचिकाओं को अपने साथ ले भी गई। सीबीआइ यह जानना चाह रही थी कि बाल संरक्षण इकाई की बैठकों व कार्यक्रमों में ब्रजेश ठाकुर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु किस हैसियत से भाग लेती थी। दोनों के हस्ताक्षर की पहचान भी कर्मचारियों से पहले कराई गई। इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के फोटो की पहचान भी पीड़िताओं से कराई गई।

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Input : Dainik Jagarn

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BIHAR

अब बिहार में छह दिनों में जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र

Santosh Chaudhary

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राज्य के निवासियों को अब जन्म और मृ’त्यु प्रमाणपत्र के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। जन्म और मृ’त्यु प्रमाणपत्र महज छह दिन में बनाए जा सकेंगे। इस सेवा को भी सरकार लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के दायरे में ला दिया गया है। नई सेवा के जुड़ने के साथ ही आरटीपीएस के तहत अब कुल 61 तरह की सेवाएं मिल सकेंगी। बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में कुल सात प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।

प्रखंडों में जारी होंगे प्रमाणपत्र : बैठक के बाद कैबिनेट के प्रधान सचिव डॉ. दीपक प्रसाद ने बताया कि जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र प्रखंड स्तर पर प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक जारी करेंगे। इसके लिए आवेदक को जन्म अथवा मृत्यु के एक महीने के अंदर आवेदन करना होगा। यदि छह दिन में प्रमाणपत्र नहीं मिलता है तो इसके लिए जिला स्तर पर सांख्यिकी पर्यपेक्षक और इसके बाद जिलाधिकारी के यहां अपील के प्रावधान भी रखे गए हैं।

दो ही स्तर पर अपील का निपटारा करने के लिए 15-15 दिन की मियाद रखी गई है। एक महीने से अधिक दिन पर संबंधित प्रमाणपत्र का आवेदन प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर करना होगा। यदि एक वर्ष से 15 वर्ष की अवधि में कोई व्यक्ति जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम भी जुड़वाना चाहे तो वह प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन कर सकता है। इस कार्य के लिए भी छह दिन की मियाद तय की गई है।

Input : Dainik Jagran

 

 

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