डेब्यू मैच में रन नहीं बना सका तो लगा मैं किसी लायक नहीं, पॉजिटिव लोगों की वजह से आज यहां हूं: सचिन

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मेरी जिंदगी में जब परिस्थितियां विपरीत हुईं, उसी समय में मैंने धैर्य के साथ कठिन मेहनत करना सीखा। आज कह सकता हूं कि यही वह समय होता है, जब चरित्र की पहचान होती है।

निगेटिव औरनिगेटिव मिलकर पॉजिटिव हो जाएं, ऐसा सिर्फ गणित में होता है। जीवन में दो निगेटिव मिलकर और भी ज्यादा निगेटिविटी फैला देते हैं। सही मायनों में निगेटिविटी से मेरा पहला वास्ता पाकिस्तान में डेब्यू मैच के दौरान पड़ा। इस टेस्ट में जल्दी आउट हो जाने की वजह से मुझे नकारात्मक भावनाओं ने घेर लिया। मुझे खुद की क्षमताओं पर संदेह होने लगा था। बार-बार में ख्याल आने लगा कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लायक हूं भी या नहीं। लेकिन, आसपास के पॉजिटिव लोगों के सहयोग से मैं निगेटिव विचारों से बाहर निकल आया। इसी दौरान मुझे धैर्य के साथ कठिन मेहनत करने की सीख मिली। निगेटिविटी हमेशा जल्दी हावी होती है। चुनौती यही है कि इसे करीब न भटकने दें। दैनिक भास्कर ‘नो निगेटिव मंडे’ की थीम पर डटा हुआ है और चार साल पूरे कर बाउंड्री लगाई है। यह बेहद सराहनीय है।

कई बार ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जब लोग अपनी फिलॉसॉफी को छोड़ने या समझौता करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। लेकिन, यही वे मौके होते हैं जब चरित्र की परीक्षा होती है। इसी संदर्भ से जुड़ी एक बात मुझे याद आती है। यह मेरे स्कूली दिनों की बात है। एक बार स्कोरर ने मेरे स्कोर में 6 रन अतिरिक्त जोड़ दिए। इस बात पर स्वर्गीय आचरेकर सर मुझसे काफी िनराश हुए। उन्होंने कहा- ‘मुझे फर्क नहीं पड़ता कि तुमने स्काेर किया या नहीं। लेकिन, शार्टकट लेने के लिए कभी प्रभावित मत होना। आज झटपट सफलता पाने के माहौल में शार्टकट लेने के प्रलोभन आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन ये टिकाऊ नहीं होते।

परिवार, दोस्त और मेरा स्टाफ मेरा सपोर्ट सिस्टम है। जब दुनिया मेरी आखिरी पारी पर बात कर रही होती थी, तब मेरा सपोर्ट सिस्टम और मैं अगली इनिंग पर फोकस कर रहे होते थे। इसलिए हमें हमेशा सही चीजों पर फोकस करना चाहिए। सकारात्मक रहना चाहिए। -सचिन तेंडुलकर