मुजफ्फरपुर, 5 अगस्त: श्रावणी मेला 2026 को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित, सुविधायुक्त और दुर्घटनामुक्त बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी कुमार गौरव ने बुधवार को समाहरणालय सभाकक्ष में समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुदृढ़ एवं त्रुटिहीन तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि श्रावणी मेला का सफल आयोजन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विशेषकर दूसरे और तीसरे सोमवार को अत्यधिक भीड़ रहती है, इसलिए भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सभी दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रतिनियुक्ति स्थलों पर पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी निभाने तथा अनुमंडल पदाधिकारियों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया। साथ ही स्पॉट ब्रीफिंग सुनिश्चित करने को भी कहा गया।

बैठक में नियंत्रण कक्ष, वॉच टावर, ड्रॉप गेट, सीसीटीवी निगरानी, बिजली, साफ-सफाई, चिकित्सा शिविर, एसडीआरएफ, पेयजल, शौचालय, पार्किंग और यातायात व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर से सरैयागंज टावर तक श्रद्धालुओं के मार्ग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश देते हुए कहा कि पूरा मार्ग अवरोधमुक्त होना चाहिए। पार्किंग केवल निर्धारित स्थलों पर हो तथा श्रद्धालुओं के रास्ते में किसी भी प्रकार की अनधिकृत दुकान या वेंडर नहीं रहने चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने फकुली मोड़ से बाबा गरीबनाथ मंदिर तक पूरे मार्ग को सुरक्षित एवं सुविधायुक्त बनाने का निर्देश दिया। भवन निर्माण विभाग को मजबूत बैरिकेडिंग, पीएचईडी को शौचालय, चापाकल और यूरिनल की समुचित व्यवस्था तथा यातायात पुलिस को सभी प्रेशर और क्रिटिकल प्वाइंट चिन्हित कर पर्याप्त बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। वॉच टावरों पर भी पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए।
बैठक में बैरिकेडिंग, सड़क मरम्मत, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, ठहराव स्थल, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा व्यवस्था, अग्निशमन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, साइनेज और विधि-व्यवस्था सहित सभी व्यवस्थाओं की विभागवार समीक्षा की गई। आयोजन समिति के सदस्यों से भी सुझाव लिए गए।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर बल देते हुए कहा कि राजस्व, भवन निर्माण, नगर निगम, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, पीएचईडी, पथ निर्माण, एनएचएआई, पुलिस, प्रशासन, विद्युत, अग्निशमन, बुडको तथा अन्य संबंधित विभाग टीम भावना के साथ कार्य करें ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टेंट सिटी, बेहतर सड़क, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पार्किंग, नियंत्रण कक्ष, वॉच टावर, ध्वनि विस्तारक यंत्र, सीसीटीवी कैमरे, उत्कृष्ट प्रकाश व्यवस्था और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। चिकित्सा सेवाओं के लिए एम्बुलेंस, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है, जबकि आपदा प्रबंधन के तहत पांच स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमों को प्रतिनियुक्त किया गया है।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी आपदा एवं आकस्मिक कार्ययोजना तैयार रखी जाए और उसका पूरी गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए।










