छपरा. आगामी 5 सितंबर 2020 को शिक्षक दिवस (Teachers Day 2020) पर सारण की धरती एक बार पुनः गौरवान्वित होगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) इस दिन सारण जिले में के गड़खा प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय चैनपुरा भैसमारा के प्रधानाध्यापक अखिलेश्वर पाठक को “राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020” से नवाजेंगे. छपरा के शिक्षक अखिलेश्वर पाठक को इस बार राष्ट्रपति पुरस्कार (President Award) के लिए चयनित किया गया है जिनके सम्मान से राष्ट्रीय पटल पर प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की धरती सारण एक का नाम पुनः रौशन होगा.

17 साल पहले बने थे शिक्षक
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 के लिए बिहार के सारण से चयनित शिक्षक अखिलेश्वर पाठक ने न्यूज 18 से बातचीत करते हुए अपने शिक्षण के अनुभवों को साझा किया. गड़खा प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय चैनपुर भैंसमारा के प्रधान शिक्षक अखिलेश्वर पाठक का कहना है कि समयनिष्ठ एवं कर्तव्यनिष्ठता को अगर जीवन का आधार मान लिया जाए तो किसी भी ऊंचाई को प्राप्त किया जा सकता है. अपने शिक्षण अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में अपने पहले पदस्थापन विद्यालय सोनपुर के मध्य विद्यालय गंगाजल के तत्कालीन प्रधान शिक्षक की मृत्युपरांत विद्यालय संचालन की जिम्मेवारी मिली.

प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर किया विकास
प्रधान शिक्षक एवं विद्यालय संचालन की जिम्मेवारी तथा तत्कालीन विद्यालय की दयनीय स्थिति देखकर उनमें कुछ करने की ललक पैदा हुई. विद्यालय की तस्वीर कैसे बदले इसके लिए प्रयास शुरू हुआ, स्थानीय ग्रामीणों से विद्यालय व्यवस्था में बदलाव की बातचीत हुई, ग्रामीणों ने सकारात्मक पहल की, व्यवस्था में बदलाव शुरू देख अपने लक्ष्य के नजदीक पहुंचा, विद्यालय की तस्वीर बदल गई. इसी दौरान 2003 में ही “हाउ टू टीच” प्रोग्राम के लिए मास्टर ट्रेनर चयनित किया गया, कारवां आगे बढ़ा 2005 के बाद 2007 में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लिए जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर बनाया गया, बालिका शिक्षा के लिए जेंडर कोऑर्डिनेटर बनाया गया, विद्यालय प्रधान शिक्षक के पद पर रहते हुए सभी दायित्वों का निर्वहन ससमय एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ करता रहा.

स्कूल नहीं आती थी बच्चियां तो बनवाया शौचालय
बालिका शिक्षा के प्रति अखिलेश्वर पाठक का विशेष रुझान रहा लड़कियों को विद्यालय आने में दिक्कत होती थी क्योंकि शौचालय की सुविधा नहीं थी लिहाजा उन्होंने जन सहयोग से विद्यालय में शौचालय बनाया जिसके बाद बच्चियों को विद्यालय आने में काफी आसानी हुई. पाठक ने बताया कि वर्ष 2019 के माह जुलाई में उनकी पोस्टिंग बतौर प्रधानाध्यापक के रूप में मध्य विद्यालय चैनपुर भैसमारा में हुई. विद्यालय के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के संचालन का भी दायित्व पाठक को प्राप्त हुआ.

प्रोजेक्टर की मदद से पढ़ते हैं बच्चे
अखिलेश्वर पाठक ने इन विद्यालयों में भी अपने सूझबूझ से तमाम सुविधाएं व्यवस्थित कीं और आज इस विद्यालय में सरकारी सुविधाओं में प्राइवेट स्कूलों की झलक दिखती है क्योंकि यहां बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाया जाता है आरओ का पानी पिलाया जाता है. प्राइवेट स्कूलों की तरह तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं. अखिलेश्वर पाठक ने हाल के दिनों में क्वॉरेंटाइन सेंटर का भी संचालन किया जहां वों मजदूरों को योग की शिक्षा देते दिखाई पड़े थे वहां भी उनकी काफी तारीफ हुई थी और अब जब राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सम्मान मिलने की खबर आई है तो इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है.
Input : News18




