नालंदा/पटना: कांग्रेस सांसद और प्रख्यात लेखक डॉ. शशि थरूर इन दिनों बिहार के बदले हुए स्वरूप और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को देखकर काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं। ‘नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025’ में शिरकत करने पहुंचे थरूर ने न केवल बिहार के विकास की प्रशंसा की, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए कार्यों को ‘विश्व स्तरीय’ करार दिया।

‘बापू टावर’ को बताया वर्ल्ड क्लास, बिजली-पानी पर जताई खुशी
पटना प्रवास के दौरान शशि थरूर ने नवनिर्मित बापू टावर का दो घंटे तक सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने इसे एक ‘वर्ल्ड क्लास म्यूजियम’ बताते हुए कहा कि बिहार के बारे में उनकी पुरानी धारणाएं पूरी तरह बदल गई हैं।

थरूर ने स्वीकार किया, “पहले बिहार के बारे में जो सुना था कि वहां हालात ठीक नहीं हैं, आज वह सब अतीत की बात लगती है। अब यहाँ बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ हैं और सब कुछ बहुत व्यवस्थित नजर आ रहा है।”

अपनी यात्रा के दौरान थरूर नालंदा स्थित ह्वेनसांग मेमोरियल कॉम्प्लेक्स भी पहुंचे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने इस संग्रहालय को ‘उल्लेखनीय’ बताया। उन्होंने लिखा कि यह म्यूजियम सातवीं शताब्दी के उस महान यात्री और विद्वान (ह्सुएन त्सांग) के जीवन और संघर्षों को बखूबी दर्शाता है, जिनका भारतीय इतिहास में गहरा योगदान रहा है।

साहित्य उत्सव को संबोधित करते हुए डॉ. थरूर ने नालंदा के दार्शनिक अर्थ की व्याख्या की। उन्होंने कहा:

अविरल दान: नालंदा का अर्थ ही है ‘न अलम दा’ अर्थात ऐसा ज्ञान जिसका दान कभी समाप्त न हो।

ज्ञान का अखाड़ा: प्राचीन नालंदा सिर्फ रटने की जगह नहीं, बल्कि ‘अगोरा ऑफ द इंटेलेक्ट’ (ज्ञान का अखाड़ा) था, जहां वाद-विवाद और तर्कों से सत्य को परखा जाता था।

साहित्य को व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बताते हुए थरूर ने नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल की सराहना की। उन्होंने खुशी जताई कि यहाँ मैथिली, अंगिका, बज्जिका जैसी स्थानीय बोलियों के साथ-साथ मलयालम जैसी दक्षिण भारतीय भाषाओं को भी मंच मिल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि विरासत को संजोने के साथ-साथ इसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी समय की मांग है।

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