धनबाद. आईआईटी बॉम्बे से बीटेक और एमटेक करने वाले श्रवण कुमार ने 30 जुलाई 2019 को धनबाद रेल मंडल में ग्रुप डी कर्मचारी के रूप में नौकरी ज्वाइन की। पर वे चर्चा में तब आए, जब उनकी डिग्री सामने आई। लोग उनसे मिलने पहुंचने लगे। हर कोई यह जानना चाह रहा है कि आईआईटीयन होकर ग्रुप डी की नौकरी क्यों ज्वाइन की? बात रेलवे के अफसरों तक पहुंची। मंगलवार को उन्हें मिलने के लिए डीआरएम ऑफिस बुलाया गया। पहले सीनियर डीईएन मिले और फिर उन्होंने रेलवे के अन्य अधिकारियों से भी श्रवण को मिलाया। यहां तक कि डीआरएम अनिल मिश्रा ने भी श्रवण से मुलाकात की। सभी ने श्रवण को प्रेरित किया।

डीआरएम अनिल मिश्रा के सामने बैठे आईआईटीयन ट्रैकमेन श्रवण कुमार (लाल रंग के शर्ट में)।

आईआईटी बॉम्बे से 2015 में पासआउट श्रवण कुमार धनबाद (झारखंड) रेलवे स्टेशन पर ट्रैकमैन का काम देख रहे हैं। मेट्रोलॉजी एंड मैटेरियल साइंस की पढ़ाई कर चुके श्रवण वर्तमान में चंद्रपुरा में पब्लिक वर्क्स इंस्पेक्टर डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। यहां उनका काम चंद्रपुरा-टेलो सेक्शन में रेलवे ट्रक का मेंनटेंस देखना है। इस नौकरी में उनका चयन आरआरबी एनटीपीसी के तहत हुआ था। श्रवण ने 2010 में आईआईटी में दाखिला लिया था।

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घर की हालत खराब थी, ऐसे इसे वरदान मान लिया

बिहार के रहने वाले श्रवण के पिता नहीं हैं। वे अपने परिवार के पहले इंजीनियर हैं। वे कहते हैं कि पिता ने बच्चों को पढ़ा कर अपना और परिवार का पेट भरा है। पर आर्थिक स्थिति बिगड़ती ही जा रही थी। अच्छी नौकरी का प्रयास विफल हो रहा था। ऐसी स्थिति में जब उन्हें ग्रुप डी की नौकरी में सफलता मिली तो पूरा परिवार ने इसे ही वरदान मान लिया।

एक दिन बड़ा अधिकारी बनूंगा
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वण के मुताबिक, “सरकारी नौकरी में जॉब सिक्युरिटी सबसे अच्छी है। कोई नौकरी छोटी या बड़ी नहीं होती। मेरे कई दोस्त प्राइवेट सेक्टर में हैं, लेकिन वह सरकारी नौकरी ही करना चाहते हैं। मुझे उम्मीद है कि मैं भविष्य में एक दिन बड़ा अधिकारी बनूंगा।”

Input : Dainik Bhaskar

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