मुजफ्फरपुर में रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग ने सख्त कदम उठाया है। करीब पांच साल पहले घूस लेते पकड़े गए दारोगा सदरे आलम को आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने विभागीय जांच पूरी होने के बाद यह निर्णय लिया। उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस तरह के भ्रष्ट अधिकारियों का पुलिस विभाग में बने रहना न केवल आम जनता के भरोसे को कमजोर करता है, बल्कि अन्य कर्मियों पर भी नकारात्मक असर डालता है। इसलिए ऐसे कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है।

यह मामला 30 सितंबर 2021 का है, जब निगरानी विभाग की टीम ने अहियापुर थाना क्षेत्र के जीरोमाइल चौक के पास एक चाय दुकान पर सदरे आलम को 11 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। सिपाहपुर निवासी तबस्सुम आरा ने शिकायत की थी कि उनके बेटे से जुड़े एक मामले में दारोगा रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाकर उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद सदरे आलम को जेल भेजा गया था, हालांकि बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया और पुनः पुलिस सेवा में शामिल हो गया। इस दौरान उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रही और बीच में उसका तबादला वैशाली जिला पुलिस बल में कर दिया गया।

लंबी जांच प्रक्रिया के बाद विभागीय अधिकारियों ने उसे भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया। जांच रिपोर्ट और संचालन पदाधिकारी की अनुशंसा के आधार पर डीआईजी ने 2 अप्रैल 2026 से उसकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस संबंध में बर्खास्तगी का पत्र वैशाली के एसपी को भी भेज दिया गया है।

इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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