SKMCH में वायरोलॉजी लैब जल्द होगा शुरू, 1.35 करोड़ से हो रही स्थापना

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श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में वायरोलॉजी लैब जल्द ही खुलने जा रहा है। इसकी तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस लैब की स्थापना पर 1.35 करोड़ रुपये खर्च किया गया है।

प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने बताया कि यह उत्तर बिहार का पहला मॉर्डन लैब होगा। यहां वायरस संबंधित गंभीर संक्रामक रोगों की जांच होगी।

यह योजना केंद्र सरकार की है। इस लैब को लेकर बुधवार को प्राचार्य डॉ. विकास कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें डॉ. विनोद कुमार, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. महेश प्रसाद, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. आनंद कुमार मिश्रा समेत अन्य कई विभाग के विभागाध्यक्ष शामिल थे। सभी ने कई बिंदुओं पर इस लैब से संबंधित विचार विमर्श किया।

कर्मियों का हो चुका साक्षात्कार भारत सरकार द्वारा एसकेएमसीएच में वायरोलॉजी लैब के लिए साइंसटिस्ट-1 (मेडिकल) के लिए एक पद, साइंसटिस्ट-1 (नन मेडिकल) एक पद, रिसर्च असिस्टेंट को एक पद एवं लैब टेक्नीशियन का दो पद सृजित किया गया है। इन पदों पर कार्य के लिए अभ्यार्थियों का साक्षात्कार लिया जा चुका है। इसमें पांच पदों के लिए 57 उम्मीदवार शामिल हुए। इसमें साइंसटिस्ट-1 (मेडिकल) के लिए एक भी उम्मीदवार नहीं पहुंचे थे।

किन बीमारियों की होगी जांच

वायरोलॉजी लैब में वायरस जनित घातक एईएस व स्वाइन फ्लू की जांच होगी। इसके अलावा डेंगू, चिकनगुनिया, इन्फ्लुएंजा, रेबीज, खसरा, हेपेटाइटिस, येलो फीवर, पोलियों, चेचक, एड्स आदि तमाम वायरल बीमारियों की जांच होगी।

जांच को जाना पड़ता पटना

एइएस व स्वाइन फ्लू के साथ कई वायरल डिजीज के संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए पटना आरएमआरआइ व अन्य जगह जाना पड़ता है। वहीं भर्ती मरीजों का अस्पताल से वहां सैंपल भेजा जाता है। इस लैब के खुलने से इन रोगों की जांच मेडिकल कॉलेज में ही हो जाएगी।

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि आइसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की योजना के तहत एसकेएमसी परिसर में वायरोलॉजी लैब की स्थापना हो रही है। इसकी यहां बहुत जरूरत थी। इसके स्थापित होने से उत्तर बिहार के मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

Input : Dainik Jagran