मुजफ्फरपुर: गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनियां गांव में 17 मार्च की रात हुई घटना में एक ग्रामीण की मौत के बाद पुलिस महकमे में बड़ा एक्शन लिया गया है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने छापेमारी में शामिल थानेदार सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही दो होमगार्ड के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

निलंबित पुलिसकर्मियों में थानेदार राजा सिंह, एसआई मनीष कुमार, सिपाही रंजन कुमार, महिला सिपाही चांदनी कुमारी, चालक हवलदार ओमप्रकाश और चौकीदार प्रह्लाद कुमार शामिल हैं। वहीं, होमगार्ड अपरजीत कुमार और मनीष कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है।

अविवेकपूर्ण छापेमारी पर कार्रवाई

एसएसपी ने जांच के आधार पर कहा कि बिना पूरी जानकारी के चोरनियां में छापेमारी का निर्णय लिया गया, जो अविवेकपूर्ण था। स्थानीय स्तर पर पहले भी पुलिस कार्रवाई का विरोध हो चुका था, बावजूद इसके जरूरी सतर्कता नहीं बरती गई। यहां तक कि चौकीदार ने भी पुराने घटनाक्रम की जानकारी समय पर साझा नहीं की।

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छापेमारी दल ने हालात को संभालने में पर्याप्त संयम और विवेक नहीं दिखाया। एसडीपीओ पूर्वी-1 अलय वत्स ने जांच के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसके आधार पर निलंबन का आदेश जारी किया गया।

कैसे हुई थी घटना

17 मार्च की रात पुलिस टीम चोरनियां गांव में छापेमारी के लिए पहुंची थी। इस दौरान आरोपित की ओर से शोर मचाने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और लाठी-डंडों से हमला किया, साथ ही फायरिंग भी की गई।

स्थिति बिगड़ने पर थानेदार ने आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की। इसी दौरान अफरा-तफरी में ग्रामीण जगतवीर राय की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस टीम किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रही।

राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद तेज हुई कार्रवाई

घटना के दूसरे दिन ही थानेदार को लाइन हाजिर कर दिया गया था। इसके बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गांव का दौरा कर कई सवाल उठाए, जिससे मामला और तूल पकड़ गया। अगले ही दिन एसएसपी ने सख्त कदम उठाते हुए पूरी टीम को निलंबित कर दिया।

पॉक्सो केस में भी कार्रवाई

इसी बीच, एक अन्य मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अहियापुर थाना के तीन पूर्व एएसआई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अखिलेश प्रसाद, सुमनजी झा और त्रिलोकीनाथ झा पर आरोप है कि वे पांच साल पुराने केस में गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे थे।

कोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाते हुए उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को निर्धारित की गई है।

चोरनियां कांड के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। वहीं, प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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