सरकारी योजनाओं के तहत विद्यालयों में वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न की कालाबाजारी के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चार व्यक्तियों के विरुद्ध बेनीबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि सरकारी अनुमोदित खाद्यान्न को निर्धारित विद्यालयों तक पहुंचाने के बजाय उसे विचलित कर कालाबाजारी करने का प्रयास किया जा रहा था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डोर स्टेप डिलीवरी (डीएसडी) परिवहन अभिकर्ता अशोक इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अशोक कुमार, वाहन चालक धर्मेंद्र कुमार तथा मजदूर संजीव कुमार और राजा कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत बेनीबाद थाना कांड संख्या 43/26, दिनांक 14 मार्च 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायत मिलते ही प्रशासन ने की त्वरित कार्रवाई
सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी की शिकायत सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच का निर्देश दिया। उन्होंने डीएम एसएफसी को पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। इसके बाद राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक द्वारा जांच कर सभी तथ्यों के साथ बेनीबाद थानाध्यक्ष को आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

सात विद्यालयों के लिए भेजा गया था 35.50 क्विंटल चावल
जांच में सामने आया कि टीपीडीएस गोदाम गायघाट से मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत प्रखंड के सात विद्यालयों में वितरण के लिए कुल 35.50 क्विंटल (71 बैग) चावल निर्धारित वाहन संख्या BR06GA3843 से भेजा गया था। वाहन पर चालक के साथ दो मजदूर भी मौजूद थे और खाद्यान्न वितरण के लिए सात चालान जारी किए गए थे।

जांच के दौरान पाया गया कि सात विद्यालयों में से केवल चार विद्यालयों तक ही चावल पहुंचाया गया था, जबकि शेष विद्यालयों को खाद्यान्न नहीं मिला। ऑनलाइन ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार चार विद्यालयों में कुल 15 क्विंटल (30 बैग) चावल का वितरण किया गया था।
इन विद्यालयों में—
• मध्य विद्यालय शिवदाहा – 9 क्विंटल
• प्राथमिक विद्यालय शिवदाहा अनुसूचित जाति – 1 क्विंटल
• प्राथमिक विद्यालय मुस्लिम – 4.5 क्विंटल
• प्राथमिक विद्यालय बरूआरी – 0.5 क्विंटल
का वितरण दर्ज पाया गया।
जांच में सामने आई अनियमितता
यदि कुल 35.50 क्विंटल चावल में से 15 क्विंटल वितरित किया जा चुका था, तो वाहन पर शेष 20.5 क्विंटल (41 बैग) चावल होना चाहिए था। लेकिन जांच के दौरान वाहन पर 50 बैग चावल पाए गए, जो निर्धारित मात्रा से 9 बैग अधिक थे।
इससे स्पष्ट हुआ कि खाद्यान्न को निर्धारित विद्यालयों तक पहुंचाने के बजाय कहीं और विचलित कर कालाबाजारी करने का प्रयास किया जा रहा था। इसी आधार पर परिवहन अभिकर्ता, चालक और दोनों मजदूरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पारदर्शी और मजबूत वितरण व्यवस्था पर जोर
जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न के उठाव, परिवहन और वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी और पश्चिमी को सभी टीपीडीएस गोदामों से विद्यालयों और अन्य लाभार्थी संस्थानों तक खाद्यान्न आपूर्ति की नियमित निगरानी करने तथा ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली का प्रभावी उपयोग करने का निर्देश दिया है।

गरीब बच्चों का हक नहीं होने देंगे प्रभावित
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि मध्याह्न भोजन योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित किया जाने वाला खाद्यान्न गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए होता है। ऐसे में इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या कालाबाजारी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था सरकारी खाद्यान्न के दुरुपयोग या कालाबाजारी में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को दिए निर्देश
जिलाधिकारी ने जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के सभी आपूर्ति अधिकारियों तथा विद्यालय प्रबंधन समिति को खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही विद्यालयों में खाद्यान्न प्राप्ति और उपयोग से संबंधित अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करने को कहा है।
इसके अलावा प्रशासन ने खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए औचक निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए निगरानी तंत्र को और सख्त किया जाएगा।






