खुशखबरी: बिहार में मार्च तक 7000 असिस्टेंट प्रोफेसरों की हो जाएगी नियुक्ति, जानिए
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खुशखबरी: बिहार में मार्च तक 7000 असिस्टेंट प्रोफेसरों की हो जाएगी नियुक्ति, जानिए

Santosh Chaudhary

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अगले साल मार्च तक बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसराें की नियुक्ति हो जाएगी। शिक्षा विभाग ने बुधवार काे इन विश्वविद्यालयों के कुलसचिवाें के साथ बैठक के बाद यह लक्ष्य तय किया है। इसके लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग के जरिए दिसंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। अब तक दो हजार से कम रिक्तियां मिली हैं, जबकि सभी विश्वविद्यालयों में लगभग सात हजार पद रिक्त हैं।

विभाग ने मगध, पाटलिपुत्र, बीआरए, एलएन मिथिला, केएसडीएस और मजहरूल हक विश्वविद्यालय काे 15 तक रिक्तियां भेजने का निर्देश दिया है। अबतक जो रिक्तियां मिली हैं, उसके अनुसार वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 556, पूर्णिया विश्वविद्यालय में 330, तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर में 197, मुंगेर विश्वविद्यालय में 266, बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 301 और पटना विश्वविद्यालय में 151 पद रिक्त हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से बैठक में कहा गया कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से  सहायक प्राध्यापकों के खाली पदों पर  नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र आरंभ होगी। इसके लिए विभाग द्वारा उन छह विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को एक सप्ताह के अंदर शिक्षकों की रिक्तियों का ब्योरा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया जिन्होंने कई बार निर्देश देने के बाद भी रिक्तियों की सूची नहीं सौंपी है।

मगध विवि (बोधगया), एलएन मिश्र मिथिला विवि (दरभंगा), वीर कुंवर सिंह विवि (आरा), जयप्रकाश विवि (छपरा), पूर्णिया विवि और मुंगेर विवि ने अबतक विश्वविद्यालय सेवा आयोग को सहायक प्राध्यापकों के खाली पदों की सूची नहीं मुहैया करायी है।

बैठक में सभी विश्वविद्यालयों में लोक अदालत से जुड़े मामलों के निष्पादन एवं कन्या उत्थान योजना के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक रेखा कुमारी, उपनिदेशक अजीत कुमार, दीपक कुमार सिंह एवं राजेश कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

विश्वविद्यालयों के शिक्षकों-कर्मचारियों को मिलेगा नया वेतनमान

बिहार के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और  कर्मचारियों को सातवां पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ इसी माह (नवम्बर) से मिलेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक सप्ताह के भीतर राशि का ब्योरा उपलब्ध कराने का आदेश सभी विश्वविद्यालयों को दिया है ताकि 20 नवम्बर तक नये वेतनमान की पूरी राशि जारी की जाए। इस संबंध में बुधवार को शिक्षा विभाग के स्व.मदन मोहन झा सभागार में सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

 

8 हजार शिक्षकों तथा 15 हजार कर्मियों को मिलेगा लाभ

शिक्षा विभाग द्वारा नवम्बर से नया वेतनमान का भुगतान किये जाने से सभी विश्वविद्यालयों में करीब 8 हजार शिक्षकों एवं 15 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। 6 मार्च 2019 को राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक सातवां वेतनमान के प्रभावी होने से वेतन में 15 से 18 फीसद की वृद्धि हुई है।

हालांकि सातवें वेतनमान को लागू करने में आठ माह की देरी हो चुकी है और अभी तक छठा वेतनमान ही शिक्षकों व कर्मियों को मिल रहा था। सिर्फ पटना विश्वविद्यालय ने सातवां वेतनमान के तहत नवम्बर से शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन भुगतान किया है।

Input : Dainik Jagran

 

MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर शे’ल्टर हो’म रे’प के’स: ये हैं वो गु’नहगा’र जिनपर CBI ने लगाए हैं गं’भीर आ’रोप

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर शे’ल्टर हो’म यौ’न शो’षण मा’मले में करीब  7 महीने की नियमित सुनवाई के बाद साकेत कोर्ट (Saket Court) ने अपना फैस’ला सुर’क्षित रख लिया था. आज इस माम’ले में फै’सला आ जाएगा. इस मा’मले में 21 आरो’पियों पर चा’र्जशीट (Cha’rgesheet) दा’यर की गई थी जिसमें मुख्य आ’रोपी बा’लिका गृ’ह के संचालक ब्रजेश ठाकुर (Brajeh Thakur) को मु’ख्य आ’रोपी बनाया गया है. CBI ने ब्रजेश ठाकुर सहित सभी 21 आ’रोपियों पर बेहद ही सं’गीन आ’रोप लगाए हैं.

इस मामले में दायर चार्जशीट की कॉपी के अनुसार इस गुनाह में एक पूरा नेक्सस काम करता था जिसका मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर था. इसमें उसके साथ रवि रोशन और मामू सहित बालिका गृह के अन्य कर्मचारी सहयोगी था. वह अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लड़कियों को गंदे भोजपुरी गानों पर डांस करने को विवश करता था और लड़कियों को दूसरे के पास भेजता भी था.

इस गुनाह में अन्य कई बराबर के भागीदार रहे हैं. आइये इनमें से कुछ प्रमुख चेहरों की भूमिका के बारे में जानते हैं.

ब्रजेश ठाकुर: बालिका गृह का वास्तविक मालिक था और वही इसका संचालन करता था. एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति का वह कार्यपालक निदेशक पद पर था. इसी एनजीओ के माध्यम से बालिका गृह का संचालन होता था. उस पर बालिका गृह की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है.

शाइस्ता परवीन उर्फ मधु: यह ब्रजेश ठाकुर की खास राजदार थी और एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति के प्रबंधन से जुड़ी थी. यह लड़कियों को सेक्स की शिक्षा देती थी और गंदे गाने पर डांस करने को विवश करती थी. इससे मना करने वाली लड़कियों को सजा के तौर पर नमक रोटी खाने को दिया जाता था.

रवि कुमार रोशन: यह बाल संरक्षण पदाधिकारी (सीपीओ) था. ब्रजेश के साथ-साथ इस पर भी अधिकतर लड़कियों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है. वह छोटे कपड़े में वल्गर गाने पर डांस करने के लिए लड़कियों को विवश करता था.

विकास कुमार: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य था. उस पर भी लड़कियों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है. यह अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लड़कियों को स्लीपिंग पिल्स देता था.

दिलीप कुमार वर्मा: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का अध्यक्ष था. लड़कियों ने उसकी पहचान फोटो से की. इसने उसे सबसे गंदा आदमी बताया. यह लड़कियों से साथ दुष्कर्म करता था. यह ब्रजेश ठाकुर का खास था.

रोजी रानी: यह बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक थी. लड़कियों ने उसे सारी घटनाओं की जानकारी दी, लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया. उस पर आरोपितों को सहयोग करने का आरोप लगाया गया है.

डॉ. प्रमीला: यह बालिका गृह की लड़कियों की स्वास्थ्य जांच करती थी. लड़कियों ने उसे बताया कि ब्रजेश, रवि रोशन, विजय व विकास ने उसके साथ दुष्कर्म किया है.  इस पर उसने बस इतना कहा कि कोई बात नहीं तुम लोगों को दवा दे दूंगी. इसने पीड़िता की कोई मदद नहीं की.

रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर साहेब उर्फ मास्टर जी: यह ब्रजेश के पारिवारिक प्रेस का मैनेजर था. लड़कियों ने इसे गंदा आदमी बताया है. यह लड़कियों को गंदी नजर से देखता था. यह लड़कियों से साथ दुष्कर्म और पिटाई करता था.

डॉ. अश्वनी उर्फ आसमनी: बालिका गृह की लड़कियां इस डॉक्टर से काफी भयभीत रहती थीं. यह लड़कियों को ट्रैक्यूलाइज्ड कर बेहोश करता था. यह अपने आला से लड़कियों को बिना कपड़े के जांच करता था.

विजय कुमार तिवारी, गुड्डू और कृष्णा राम: सभी ब्रजेश ठाकुर का नौकर था. सभी पर लड़कियों से दुष्कर्म करने और पिटाई करने का आरोप लगाया गया है.

विक्की: मधु का भतीजा है. यह भी रात में बालिका गृह पहुंचता था. किशोरियों से यौन हिंसा करता था.

इंदू कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी: सभी बालिका गृह की कर्मचारी थीं. इन सभी पर लड़कियों को नशे की दवाई देने, मारपीट करने के आरोप हैं. इनपर बालिका गृह की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने वाले ब्रजेश, विकास, दिलीप, रवि रोशन और अन्य का सहयोग करने का भी आरोप है.

एक महिला कर्मचारी पर लड़कियों से साथ आपत्तिजनक स्थिति में सोने का भी आरोप है. यह अन्य महिला कर्मचारियों के साथ मिलकर लड़कियों की पिटाई करती थी.

Input : News18

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MUZAFFARPUR

अब एलएस कॉलेज से करिए योग में पीजी डिप्लोमा

Santosh Chaudhary

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l.s college -muzaffarpur

एलएस कॉलेज में यौगिक स्टडीज कोर्स में पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं। प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय की सालभर की कड़ी मशक्कत के बाद इस कोर्स को यहां चालू कराने में सफलता मिल पाई है। बुधवार को विश्वविद्यालय ने प्राचार्य को पत्र भेजकर कोर्स शुरू करने की मंजूरी की जानकारी दी। सीसीडीसी डॉ.अमिता शर्मा ने प्राचार्य को बताया कि सभी वैधानिक निकायों से अनुमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने भी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी है। सौ सीटों के लिए यह अनुमति मिली है। इसी सत्र से यह कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत शुरू होगा। प्राचार्य ने कहा कि यह कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह कोर्स दर्शनशास्त्र विभाग की देखरेख में चलेगा। इसके लिए 100 सीटें निर्धारित की जाएंगी।

जल्द ही नामांकन संबंधी सूचना जारी होगी। स्नातक पास छात्र-छात्रएं इस कोर्स में नामांकन करा सकते हैं। साथ ही आसपास के जिलों व दूसरे विश्वविद्यालयों के योग शिक्षक भी इस कोर्स में फैकल्टी के रूप में शामिल किए जा सकते हैं। कोर्स चालू होने को लेकर शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई है। साथ ही प्राचार्य को इस बात के लिए बधाई भी दी है कि उनकी तत्परता व मेहनत की बदौलत कॉलेज को ये उपलब्धि हासिल हो पाई है। बधाई देने वालों में डॉ. एसके मुकुल, डॉ. एसआर चतुर्वेदी, डॉ. गजेंद्र कुमार, डॉ. शशि कुमारी सिंह, डॉ. शैल कुमारी, प्रो. त्रिपदा भारती, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. जफर अहमद सुल्तान, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जयकांत सिंह जय, डॉ. एनएन मिश्र, डॉ. अजय कुमार, डॉ. ललित किशोर, डॉ. सतीश कुमार समेत अन्य शिक्षक शामिल हैं।

Input : Dainik Jagran

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MUZAFFARPUR

बा’लिका गृ’ह कां’ड में साकेत को’र्ट आज सुना सकता है फै’सला

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर बा’लिका गृ’ह यौ’न हिं’सा कां’ड में साकेत को’र्ट गुरुवार को फै’सला सुना सकता है। मुख्य अ’भियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 लोगों पर पॉ’क्सो समेत विभिन्न धा’राओं में मुक’ दमा चल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ इस मा’मले की सुनवाई कर रहे हैं।

अभियुक्तों में बालिकागृह के कर्मचारी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। यह भी संयोग ही है कि बाल दिवस (14 नवंबर) को पीड़ित बच्चों को न्याय मिलेगा। हालांकि वकीलों की हड़ताल के कारण फैसला टलने की भी आशंका है। पिछले साल मई में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में कई बच्चियों से दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर पर पॉक्सो व दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था। सभी 20 आरोपितों को 23 फरवरी को कड़ी सुरक्षा में दिल्ली लाया गया था।

वकीलों की हड़ताल से असमंजस की स्थिति : पुलिस से हुए विवाद को लेकर दिल्ली में इस समय वकीलों की हड़ताल चल रही है। ऐसे में फैसले को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि फैसले के समय उपस्थित रहने के लिए दिल्ली पहुंचे बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने मोबाइल पर बताया कि कोर्ट में यह मामला सूचीबद्ध है। इसमें फैसला सुनाए जाने की तिथि निर्धारित है।

ये हैं आरोपित : ब्रजेश ठाकुर, बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सदस्य विकास कुमार, बालिका गृह की कर्मचारी इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी, विक्की, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु।

बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की कराई पहचान

सीबीआइ ने बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की पहचान कराई है। ये वे अधिकारी हैं, जिनकी विभागीय संचिकाओं में कई मौके पर हस्ताक्षर हैं। इसके लिए इकाई के दो कर्मचारियों को सीबीआइ ने पटना तलब किया था। इनमें बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा, रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन सहित अन्य शामिल हैं। इसमें से रोजी रानी व रवि रोशन फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। वहीं दिवेश कुमार शर्मा ने ही इस मामले में महिला थाना में केस दर्ज कराया था। सीबीआइ की जांच में बाल संरक्षण इकाई शुरू से ही निशाने पर रही है। सीबीआइ की टीम ने कई बार यहां आकर जांच की तथा संचिकाओं को अपने साथ ले भी गई। सीबीआइ यह जानना चाह रही थी कि बाल संरक्षण इकाई की बैठकों व कार्यक्रमों में ब्रजेश ठाकुर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु किस हैसियत से भाग लेती थी। दोनों के हस्ताक्षर की पहचान भी कर्मचारियों से पहले कराई गई। इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के फोटो की पहचान भी पीड़िताओं से कराई गई।

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