चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन व्रती महिलाएं गुरुवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी। शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पवित्र पर्व संपन्न होगा। संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यह व्रत आत्मसंयम, शुद्धता और मानसिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि संध्या अर्घ्य गुरुवार को शाम 6:40 बजे और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य शुक्रवार सुबह 6:08 बजे दिया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु विभिन्न जलाशयों, तालाबों और नदियों में एकत्रित होकर सूर्य देव की उपासना करेंगे।
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि चैती छठ का महत्व दिवाली के बाद होने वाले छठ पर्व के समान ही माना जाता है। खासतौर पर माताएं इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करती हैं।
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद खरना संपन्न किया जाता है। खरना के दिन व्रती गुड़ और चीनी से बनी खीर ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास रखते हैं, जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।
(नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।)