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इसी जगह पर हुई थी भगवान शिव और देवी पार्वती की शादी, आज भी मौजूद हैं 6 निशानियां

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लोकमान्यातओं के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हुआ था। रुद्रप्रयाग ज‌िले में मौजूद त्रियुगी नारायण मंदिर में शिव पार्वती का विवाह हुआ था।

इस गांव में भगवान व‌िष्‍णु और देवी लक्ष्मी का एक मंद‌िर है, ज‌िसे श‌िव पार्वती के व‌िवाह स्‍थल के रूप में जाना जाता है। इस मंद‌िर के परिसर में ऐसे कई चीजें आज भी मौजूद हैं, ज‌िनका संबंध श‌िव-पार्वती के व‌िवाह से माना जाता हैं।

श‌िव-पार्वती के व‌िवाह में भगवान व‌िष्‍णु ने देवी पार्वती के भाई की भूम‌िका न‌िभाई थी। भगवान व‌िष्‍णु ने उन सभी रीत‌ियों को न‌िभाया जो एक भाई अपनी बहन के व‌िवाह में करता है। कहते हैं इसी कुंड में स्नान करके भगवान व‌िष्‍णु ने व‌िवाह संस्कार में भाग ल‌िया था।

यह है वह स्‍थान जहां पर भगवान श‌िव और पार्वती व‌िवाह के समय बैठे थे। इसी स्‍थान पर ब्रह्मा जी ने भगवान श‌िव और देवी पार्वती का व‌िवाह करवाया था।

भगवान श‌िव को व‌िवाह में एक गाय म‌िली थी। माना जाता है कि यह वह स्तंभ है, जिस पर उस गाय को बांधा गया था।

श‌िव पार्वती के व‌िवाह में ब्रह्माजी पुरोह‌ित बने थे। व‌िवाह में शाम‌िल होने पहले ब्रह्माजी ने ज‌िस कुंड में स्‍नान क‌िया था वह ब्रह्मकुंड यह है। तीर्थयात्री इस कुंड में स्नान करके ब्रह्माजी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

त्रियुगी नारायण मंद‌िर की इस अखंड धुन‌ी के चारों ओर भगवान श‌िव ने पार्वती के संग फेरे ल‌िए थे। आज भी इस कुंड में अग्न‌ि को जीव‌ित रखा गया है। मंद‌िर में प्रसाद रूप में लकड़‌ियां भी चढ़ाई जाती है। श्रद्धालु इस प‌व‌ित्र अग्न‌ि कुंड की राख अपने घर ले जाते हैं। कहते हैं यह राख वैवाह‌िक जीवन में आने वाली सभी परेशान‌ियों को दूर करती है।

 

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मान्यता है कि मंदिरों में जाने से मन होता है शांत, बढ़ती है सकारात्मकता

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पुरानी परंपरा है कि हर व्यक्ति को तीर्थ यात्रा जरूर करनी चाहिए। तीर्थ यात्रा जैसे चार धाम की यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, काशी जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने का काफी अधिक महत्व बताया गया है। आमतौर पर लोग तीर्थ यात्रा को धर्म और दान-पुण्य से जोड़कर देखते हैं, लेकिन मंदिर और तीर्थों की यात्रा के कई फायदे मिलते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए तीर्थ यात्रा से जुड़ी मान्यताएं…

तीर्थ यात्रा से जुड़ी खास बातें

मंदिर जाने से हमारी सोच होती है सकारात्मक

वास्तु के अनुसार मंदिरों की बनावट ऐसी होती है, जहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हमेशा बना रहता है। मंदिर में आने वाले भक्तों के नकारात्मक विचार नष्ट होते हैं और सोच सकारात्मक बनती है। मंदिरों और तीर्थों को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इसी वजह से मंदिर या तीर्थ पर जाने से हमारे मन को शांति मिलती है। शांत मन और सकारात्मक सोच के साथ किए गए काम में सफलता मिलती है।

स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद

आमतौर पर अधिकतर प्राचीन तीर्थ और मंदिर ऐसी जगहों पर बनाए गए हैं, जहां का प्राकृतिक वातावरण हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। ज्यादातर मंदिरों में सीढ़ियां होती ही हैं, इन सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने से व्यायाम होता है। भजन-कीर्तन में तालियों बजाने से एक्यूप्रेशर के लाभ मिलते हैं। घंटी आवाज नकारात्मक सोच को खत्म करती है।

तीर्थ यात्रा से ज्ञान बढ़ता है

प्राचीन तीर्थ स्थलों पर जाने से पौराणिक ज्ञान बढ़ता है। देवी-देवताओं से जुड़ी कथाएं और परंपराएं मालूम होती हैं। प्राचीन संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। मंदिर के पंडित और आसपास रहने वाले लोगों से संपर्क होता है, जिससे अलग-अलग रीति-रिवाजों को जानने का अवसर मिलता है। भगवान और भक्ति से जुड़ी मान्यताओं की जानकारी मिलती है। जिसका लाभ दैनिक जीवन की पूजा में मिलता है।

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रामायण की इन चौपाइयों का करें जाप, पानी की तरह बरसेगा पैसा

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श्री रामचरित मानस पवित्र ग्रंथ और दिव्य महाकाव्य है। इस मनोहारी काव्य की कुछ चौपाइयां आपके घर में सुख-समृद्धि और धन प्राप्ति के योग बनाती है। कहा जाता है की जिस घर में नियमित रूप से रामायण का पाठ होता है उस घर में कभी आर्थिक संकट नहीं आता। रामायण की कुछ चौपाईयां ऐसी हैं जिनका जाप करने से व्यक्ति का जीवन विलक्षणता से व्यतीत होता है। इन चौपाइयों को पढ़ें व इन्हें सिद्ध भी करें। परिणाम स्वरुप आपको कभी घर में धन की कमी व आर्थिक समस्याएं नहीं होंगी। अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग चौपाईयों का जाप करना होता है। तो आइए जानते हैं उन चौपाईयों के बारे में….

धन प्राप्ति के लिए 

जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं।
धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।

ऋद्धि सिद्ध की प्राप्ति के लिए 

साधक नाम जपहिं लय लाएं।
होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं।।

परीक्षा में सफलता के लिए 

जेहि पर कृपा करहिं जनुजानी।
कवि उर अजिर नचावहिं बानी।।
मोरि सुधारहिं सो सब भांती।
जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।

लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए

जिमि सरिता सागर मंहु जाही।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं।
धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।

ऋद्धि सिद्ध की प्राप्ति के लिए

इसके लिए रामायण के इस मंत्र का जाप करें जो इस प्रकार है
साधक नाम जपहिं लय लाएं।
होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं।।

Input:Patrika

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मां कामाख्या देवी अम्बुबाची महोत्सव, 22 जून से शुरू

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पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में गुवाहाटी के पास स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। लेकिन इस अति प्राचीन मंदिर में देवी सती या मां दुर्गा की एक भी मूर्ति नहीं है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार इस जगह देवी सती की योनि गिरी थी, जो समय के साथ महान शक्ति-साधना का केंद्र बनी।

अम्बुबाची मेला

अम्बुबाची मेला कामाख्या मंदिर का सबसे महत्त्वूर्ण और पावन पर्व है जो की असम राज्य के गुवाहाटी नामक स्थान पर स्थित है, हर वर्ष जून के महीने में यह पर्व बहुत ही आस्था और विश्वास से तीन से पांच दिनों के लिए मनाया जाता है।

Kamakhya devi mandir

अम्बुबाची मेला 2019

वर्ष 2019 में अम्बुबाची पर्व या मेला 22 जून 2019 से शुरू होगी और 25 जून को समाप्त होगी, फिर 26 जून को कामाख्या मंदिर के द्वार भक्तो के विशेष दर्शन के लिए खोले जायेंगे।

22 से 25 जून के बीच कामाख्या मंदिर के द्वार बंद रहेंगे माता कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण, इस दौरान सारे भक्त गण मंदिर परिसर में पूजा, अर्चना और सिद्धि करेंगे।

Maa kamakhya devi festival

अम्बुबाची मेला दिन और समय 2019

  • अम्बुबाची मेला प्रारम्भ: 22 जून 2019, दिन: शनिवार
  • कामाख्या मंदिर द्वार बंद: 22 जून 2019, दिन: शनिवार
  • कामाख्या मंदिर द्वार खोला जायेगा: 26 जून 2019, दिन: बुधवार
  • माता कामाख्या का दर्शन और प्रसाद वितरण: 26, 27, 28 जून 2019, दिन: बुधवार, वृहस्पतिवार, शुक्रवार

अम्बुबाची मेला का महत्तव

कामाख्या शक्तिपीठ के इतिहास के अनुसार, इस शक्तिपीठ का निर्माण देवी सती के योनि गिरने से हुई थी, और देवी सती के मासिक धर्म के आने के समय को ही पवित्र समय माना गया और अम्बुबाची मेले को बड़े ही आस्था विश्वास से मनाने की परंपरा शुरू हुई।

ऐसा माना जाता है की देवी सती इन दिनों यही विराजमान होती है और अपने भक्तो को आशीर्वाद स्वरुप हर मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद देती है। अम्बुबाची मेला तांत्रिक और वैदिक दोनों तरीको से सबसे उत्तम समय माना गया है, इस दौरान सभी तांत्रिक और वैदिक पंडित पूजा और साधना करने अपनी सिद्धियों पर विजय पाते है।

इसलिए हिन्दू धर्म में अम्बुबाची मेले का महत्तव बहुत ही ऊँचा माना गया है, कामाख्या मंदिर में हर एक नेता, राजनेता, अभिनेता, सेलिब्रिटी दर्शन के लिए आते रहते है।

 

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