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E-Challan: जुर्माना नहीं भरा तो क्या होगा? कैसे वसूली कर सकती है पुलिस या सरकार?

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एक सितंबर से देश भर में लागू हुए नए मोटर व्हीकल एक्ट 2019 (New Motor Vehicle Act 2019) के बाद से भारी जुर्माने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों में ऑन स्पॉट चालान से कहीं ज्यादा डर ई-चालान (E-Challan) का है, क्योंकि इसमें वाहन चालक को चालान कटने का तुरंत पता नहीं चलता। ई-चालान के वक्त पुलिसकर्मी वाहन या चालक का कोई पेपर जब्त नहीं करता। ऐसे में अगर ई-चालान जमा न किया जाए तो क्या होगा? क्या सरकार या ट्रैफिक पुलिस या संबंधित क्षेत्र का परिवहन विभाग किसी भी तरह से जुर्माने की वसूली कर सकता है? कैसे चेक करें आपके वाहन का ई-चालान हुआ है या नहीं? यहां मिलेगा आपके हर सवाल का जवाब…

मालूम हो कि एक सितंबर से संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से वाहन चालकों में इसके भारी-भरकम जुर्माने को लेकर भय व्याप्त है। उधर पुलिस भी वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन कराने के लिए जमकर हैवी चालान कर रही है। पिछले 15 दिनों में ही 23 हजार, 35 हजार, 59 हजार, दो लाख रुपये, 1.16 लाख रुपये और 6.5 लाख रुपये के चालान कटने के कई मामले सामने आ चुके हैं। ये तो वो चालान हैं, जो ऑन स्पॉट किए गए और जिसका वाहन चालकों को तुरंत पता लग गया।

महंगा हो सकता है बीमा

अगर कोई वाहन चालाक ई-चालान या ऑन स्पॉट चालान नहीं भरता है, तो इसकी वसूली उसके वाहन बीमा से की जा सकती है। मतलब अगली बार जब आप बीमा कराएंगे तो हो सकता है, आपके पेंडिंग चालान की रकम भी उसमें शामिल हो। इससे आपके वाहन की बीमा पॉलिशि मंहगी हो सकती है। अगर आपने वाहन का बीमा ही नहीं कराया तो कभी भी ट्रैफिक पुलिस पेपर चेकिंग के दौरान आपका लंबा चालान काट सकती है। इतना ही नहीं अगर आपने उस बीच किसी को गाड़ी बेचने का प्रयास किया तब भी आप ऐसा नहीं कर सकेंगे, क्योंकि आप जब भी वाहन का बीमा कराएंगे, उसमें चालान की राशि जुड़ होगी।

इरडा ने शुरू किया नई योजना पर काम

बताया जा रहा है कि भारतीय नियामक बीमा प्राधिकरण (इरडा) ने लंबित जुर्माने को बीमा से जोड़ने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली में लागू किया जा सकता है। दिल्ली में प्रयोग सफल रहने पर इस योजना को पूरे देश में लागू किया जा सकता है। इस योजना को लागू करने के लिए नौ लोगों की एक समिति भी बनाई गई है। इसमें दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, इरडा, इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति आठ सप्ताह में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार इस दिशा में फैसला ले सकती है।

जाना पड़ सकता है जेल

अगर आपने ई-चालान वक्त पर जमा नहीं किया तो आपका चालान कोर्ट चला जाएगा। ऑन स्पॉट किया जाने वाला चालान भी एक अवधि के बाद ट्रैफिक पुलिस द्वारा कोर्ट भेज दिया जाता है। इसके बाद वाहन स्वामी को कोर्ट में जाकर ही जुर्माना जमा करना पड़ता है। ऑन स्पॉट चालान में वाहन चालक का पेपर जब्त होता है, लिहाजा उसे छुड़ाना संबंधित व्यक्ति की मजबूरी होती है। हांलाकि, यहां भी कुछ लोग ये सोचकर पेपर छोड़ देते हैं कि वह दूसरा पेपर बनवा लेंगे, जो कि संभव नहीं है। ई-चालान में व्यक्ति ये सोचकर कोर्ट नहीं जाता कि उसका कोई पेपर तो जब्त किया नहीं गया तो क्या फर्क पड़ता है। तो हम आपको बता दें कि अगर आप ऐसा कुछ सोचकर चालान का भुगतान करने से छोड़ रहे हैं, तो ये आपकी बड़ी गलती हो सकती है। ऐसा करने पर कोर्ट आपके खिलाफ सम्मन जारी कर सकती है। कई बार सम्मन करने पर भी अगर आप कोर्ट में हाजिर नहीं होते हैं, तो आपके खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी हो सकता है। साथ ही कोर्ट पुलिस को संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश भी दे सकती है। ऐसी स्थिति में आपको भारी जुर्माने के साथ ही जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

नहीं बेच सकते वाहन

अगर आपने चालान जमा नहीं किया तो आप उस वाहन को किसी और भी बेच नहीं सकते हैं। किसी और को वाहन बेचने पर गाड़ी के पेपर दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं होंगे। इतना ही नहीं आप गाड़ी को बंधक (मॉर्टगेज) रखकर उस पर लोन भी नहीं ले सकते हैं। अगर आपकी गाड़ी की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) चालान के वक्त जब्त कर लिया गया है और आपने उसे नहीं छुड़ाया है, तो दूसरी बार चालान के वक्त आपका वाहन पुलिस द्वारा सीज भी किया जा सकता है।

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पुलिस को वसूली का अधिकार नहीं

चालान कटने की स्थिति में पुलिस को आपसे जुर्माना वसूलने का अधिकार नहीं है। मतलब अगर आप चालान खत्म कराने के लिए पुलिस को जुर्माना देते हैं तो वह जुर्माना ले तो सकती है, लेकिन ऐसा करने के लिए पुलिस किसी वाहन चालक को मजबूर नहीं कर सकती। सीधे शब्दों में कहें तो पुलिस आपको रोककर चालान तो कर सकती है, लेकिन आपसे चालान का जुर्माना जबरन नहीं वसूल सकती। जुर्माने की वसूली के लिए कोर्ट द्वारा आदेश जारी किया जाता है। इसके बाद पुलिस-प्रशासन वसूली की कार्रवाई करती है।

ऐसे चेक करें ई-चालान हुआ या नहीं

अगर आपको भी ये जानना चाहते हैं कि आपका कोई ई-चालान पेंडिंग तो नहीं है या कहीं आपका भी तो ई-चालान नहीं हुआ पड़ा है, तो आप इंटरनेट की मदद से इसका पता लगा सकते हैं। इसके लिए आपको https://echallan.parivahan.gov.in/ पर जाना होगा। यहां आपको चेक चालान स्टेटस का विकल्प मिलेगा। इस विकल्प पर जाकर आप अपनी गाड़ी के नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस के नंबर या एसएमएस से प्राप्त ई-चालान के नंबर से उसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एसएमएस से ई-चालान की जानकारी भेजने के साथ ही इसका लिंक भी दिया जाता है। यहां पर आपको चालान का ऑनलाइन भुगतान करने का विकल्प भी मिल जाएगा।

Input : Dainik Jagran

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टीएमसी के ‘बाबुल’ प्यारे हुए : संन्यास की घोषणा करने वाले भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो तृणमूल कांग्रेस में हुए शामिल

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हाल में मोदी मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करने वाले बंगाल के आसनसोल से भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो आखिरकार शनिवार को नाटकीय ढंग से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में कोलकाता में उन्होंने तृणमूल का दामन थामा। अभिषेक ने बाबुल का पार्टी में स्वागत किया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से ट्वीट करके भी इसकी जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि सांसद बाबुल सुप्रियो के तृणमूल परिवार में शामिल होने पर हम उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत करते हैं।

मोदी मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद से थे नाराज

पिछले दिनों हुए कैबिनेट विस्तार में मोदी मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद से ही बाबुल नाराज चल रहे थे। इसके बाद हाल में उन्होंने राजनीति से ही संन्यास लेने की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह और किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। हालांकि इसके बाद काफी मन मनौव्वल के बाद बाबुल ने कहा था कि वह सांसद पद से इस्तीफा नहीं देंगे। लेकिन शनिवार को वे नाटकीय तरीके से तृणमूल में शामिल हो गए। गायक से राजनीति में आए बाबुल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद 2014 में उन्होंने आसनसोल सीट से तृणमूल कांग्रेस की नेता डोला सेन को हराकर पहली बार सांसद चुने गए थे। पहली बार सांसद चुने जाने के बाद उन्हें नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनने वाली पहली सरकार ने भी शामिल किया गया था। इसके बाद 2019 में भी उन्होंने आसनसोल से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें मोदी सरकार दो में भी मंत्री बनाया गया था, लेकिन कुछ दिनों पहले हुए कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से ही बाबुल नाराज चल रहे थे। बाबुल सुप्रियो ने टीएमसी में शामिल होकर सबको चौंका दिया है।

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सोनू सूद की बढ़ीं मुश्किलें, IT विभाग ने किया 20 करोड़ की टैक्स चोरी और फर्जी लेनदेन का दावा

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बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. आयकर विभाग  की टीम लगातार चौथे दिन सोनू सूद के जुड़े 28 ठिकानों पर एक साथ छापे मार रही है. सूत्रों ने दावा क‍िया है कि व‍िभाग को छापेमारी के दौरान टैक्‍स की बड़ी हेराफेरी  के पुख्‍ता सबूत म‍िले हैं. खबर है कि आयकर विभाग की टीम ने मुंबई, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, दिल्ली और गुरग्राम में एक साथ रेड डाली है. आयकर विभाग के मुताबिक, टीम को जांच के दौरान करीब 20 करोड़ की टैक्स चोरी का पता चला है. बता दें कि सर्च के दौरान आयकर विभाग की टीम को 1 करोड़ 8 लाख रुपये कैश बरामद हुए हैं जबक‍ि 11 लॉकर्स के बारे में भी पता चला है.

सूत्रों ने दावा क‍िया है कि आयकर व‍िभाग को इस छापेमारी में टैक्‍स की बड़ी हेराफेरी के पुख्‍ता सबूत म‍िले हैं. टैक्‍स की हेरफेरी सोनू सूद के पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी हुई है. अभी तक की जानकारी के मुताबिक फिल्‍मों से म‍िली फीस में भी टैक्‍स की बड़ी गड़बड़ी देखी गई है. इन अन‍ियम‍ित्ताओं के बाद अब इनकम टैक्‍स व‍िभाग सोनू सूद की चैर‍िटी फाउंडेशन के अकाउंट्स की भी जांच कर रही है. आयकर विभाग के मुताबिक एक्टर ने अपनी बेहिसाब आय को फर्जी कंपनियों के ज़रिए रूट किया है. अब तक की जांच में टीम को 20 फर्जी एंट्री का पता चला है.

21 जुलाई 2020 से अब तक एक्टर द्वारा बनाए गए चैरिटी फॉउंडेशन ने करीब 18.94 करोड़ रुपये दान के रूप में एकत्र किए, जिसमें से करीब 1.9 करोड़ रुपये कई राहत कार्यों में खर्च किए गए जबकि 17 करोड़ रुपए अब भी पड़े हुए हैं. जांच के दौरान ये भी पता चला है कि FCRA का उलंघन करते हुए सोनू सूद की इस चैरिटी फाउंडेशन में 2.1 करोड़ रुपए जमा किए गए.

इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, जांच की इसी कड़ी में लखनऊ में सोनू सूद के करीबी कारोबारी की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप के कई ठिकानों पर भी रेड की गई है. सोनू सूद ने भी इस ग्रुप के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट किया है, जिससे हुई कमाई को छिपाने के आरोप भी उन पर लगे हैं. तफ़्तीश में पता चला है कि ये ग्रुप भी बोगस बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर चुका है. आयकर विभाग की टीम ने ऐसे करीब 65 करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़े कागजात बरामद किए हैं. इसके साथ ही ये भी पता चला है कि करोड़ो रुपये का कैश और डिजिटल ट्रांसजेक्शन भी इस इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप ने किया है, जिसको एकाउंट बुक में दर्शाया नहीं गया है. 175 करोड़ रुपये इस कंपनी ने जयपुर की एक फर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप में भी इन्वेस्टमेंट दिखाकर कर चोरी की कोशिश की है.

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असम: शॉर्ट्स पहनकर कॉलेज पहुंची छात्रा को नहीं मिल रही थी एंट्री, पैर में पर्दा लपेटकर देनी पड़ी परीक्षा

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असम से एक हैरान कर देना वाला मामला सामने आया है. एक परीक्षा में शॉर्ट्स पहनने वाली 19 वर्षीय छात्रा को परीक्षा में बैठने से पहले अपने पैरों के चारों ओर पर्दा लपेटने के लिए मजबूर किया गया. छात्रा के साथ इस व्यवहार के बाद बढ़ते आक्रोश को देखते हुए असम कृषि विश्वविद्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है. छात्रा के परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई है.

छात्रा बुधवार को अपने गृहनगर बिश्वनाथ चरियाली से गिरिजानंदा चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज (GIPS) की प्रवेश परीक्षा देने के लिए तेजपुर गई थी. परीक्षा हॉल में निरीक्षक ने उसके शॉर्ट्स पर आपत्ति जताई.

छात्रा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों बात करने के बाद निरीक्षक को बताया कि प्रवेश पत्र में कोई ड्रेस कोड नहीं है. उसने उन्हें यह भी बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में भी वह शॉर्ट्स पहनकर गई थी.

छात्रा के परिवार का आरोप है कि निरीक्षक ने उसकी एक नहीं सुनी.

छात्रा भागकर परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े अपने पिता के पास पहुंची और उनसे ट्राउज़र लाने को कहा. छात्रा के पिता बाबुल तमुली ने कहा कि जब तक वह बाजार से ट्राउज़र लेकर लौट पाते तब तक कॉलेज के अधिकारियों ने उनकी बेटी को पैरों को ढकने के लिए एक पर्दा दिया था.

तमुली ने पीटीआई को बताया, “मेरी बेटी को आघात पहुंचा और उसने कुछ स्थानीय पत्रकारों से अपमानजनक घटना के बारे में बात की और यह मुद्दा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. कई लोगों ने इस घटना की निंदा की है, लेकिन कई ने मेरी बेटी पर एक शैक्षणिक संस्थान में ड्रेस कोड का पालन नहीं करने के लिए हमला किया है, जिसने उसे और अधिक मानसिक रूप से परेशान कर दिया है.”

उन्होंने कहा, “हमने आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है और मेरी बेटी की मानसिक भलाई के हित में मामले को यहीं रहने दिया है. हम चाहते हैं कि वह अपने शैक्षणिक भविष्य पर ध्यान केंद्रित करे.”

कांग्रेस प्रवक्ता बोबीता शर्मा ने कहा कि एक युवा लड़की को शॉर्ट्स पहनने के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देना एक खतरनाक और प्रतिगामी मानसिकता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, “यह एक पहाड़ बना रहा है और परीक्षा से ठीक पहले छात्र के मानसिक उत्पीड़न के समान है. मुझे खेद है कि एक लड़की जो पहनती है उसके बारे में समाज इतना प्रतिगामी हो गया है. ऐसी मानसिकता लड़कियों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है.”

केके हांडिक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में जनसंचार के प्रोफेसर जयंत सरमा ने कहा, “लोगों को तालिबान जैसा रवैया छोड़ देना चाहिए.”

Source : NDTV

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