WhatsApp पर भेजते हैं फटाफट मैसेज तो बंद होगा आपका अकाउंट, इस दिन से होगी शुरुआत
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WhatsApp पर भेजते हैं फटाफट मैसेज तो बंद होगा आपका अकाउंट, इस दिन से होगी शुरुआत

Himanshu Raj

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दुनिया की सबसे बड़ी इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस देने वाली कंपनी व्हाट्सऐप ने थोक में मैसेज भेजने वालों के लिए खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। व्हाट्सऐप अब ऐसे लोगों का अकाउंट बंद कर देगा जो थोक में हर रोज मैसेज भेजते हैं। साथ ही कंपनी ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार में…
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व्हाट्सऐप ने अपने ब्लॉग में कहा है कि वह ऐसे लोगों का व्हाट्सऐप अकाउंट बंद करेगी जो बल्क (थोक) में दूसरे लोगों को मैसेज भेजते हैं। इसकी शरुआत 7 दिसंबर 2019 से होगी। कंपनी ने अपने ब्लॉग में कहा है कि व्हाट्सऐप पर 90 फीसदी मैसेज निजी मैसेज होते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से थोक मैसेज का ट्रेंड चल रहा है।

थोक मैसेज सबसे ज्यादा तमाम राजनीतिक पार्टियों और डिजिटल मार्केटिंग करने वालों की ओर से भेजे जा रहे हैं। इसकी आड़ में हर रोज तमाम तरह की फर्जी खबरें भी शेयर हो रही हैं। ऐसे में व्हाट्सऐप का यह कदम थोक मैसेज और फेक न्यूज पर लगाम लाने के काम आएगा। अगली स्लाइड में जानें कितने मैसेज भेजने पर होगा नियमों का उल्लंघन…

व्हाट्सऐप ने कहा है कि यदि किसी अकाउंट से 15 सेकेंड के अंदर 100 मैसेज भेजे जाते हैं तो उस अकाउंट पर बल्क मैसेज का दोषी माना जाएगा और उसका अकाउंट बंद किया जाएगा। साथ ही यदि अकाउंट बनने के 5 मिनट के बाद से ही बहुत सारे लोगों को मैसेज भेजे जाते हैं तो भी कंपनी उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

वहीं उन अकाउंट्स को भी कंपनी बंद करेगी जिन्हें कुछ देर पहले ही बनाया गया है और उस अकाउंट से लगातार दर्जनों ग्रुप्स बनाए जा रहे हों। उदाहरण के तौर पर यदि आप कोई व्हाट्सऐप अकाउंट बनाते हैं और तुरंत कई सारे ग्रुप्स बनाते हैं और उसमें कई लोगों को जोड़ते हैं तो कंपनी आपके अकाउंट को बंद कर सकती है।

Input:Amar Ujala

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सावधान! FaceApp के जरिए बुढ़ापे वाली तस्वीर बनाने से पहले 100 बार सोच लें…

Santosh Chaudhary

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लोग Old Age का फिल्टर लगाकर फोटो शेयर कर रहे हैं, जिसमें वह बूढ़े दिखाई दे रहे हैं. लेकिन इस सब के बीच ऐप के टर्म्स एंड कंडीशंस ने प्राइवेसी को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है.

FaceApp जो कि 2017 में लॉन्च हुआ था, एक बार फिर अपने ‘the old age’ फिल्टर को लेकर वायरल हो रहा है. ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोग अपनी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. लोग Old Age का फिल्टर लगाकर फोटो शेयर कर रहे हैं, जिसमें वह बूढ़े दिखाई दे रहे हैं. लेकिन इस सब के बीच ऐप के टर्म्स एंड कंडीशंस ने प्राइवेसी को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है.

ट्विटर पर लोग उठा रहे सवाल

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कंपनी ने भी इस मामले को टेकक्रंच के समक्ष उठाया है. रूस बेस्ड फेसऐप ने कहा है कि वो सिर्फ बेहतर परफॉर्मेंस के लिए क्लाउड में फोटो प्रोसेसिंग करता है, लेकिन वो अन्य तस्वीरें फोन से क्लाउड में ट्रांसफर नहीं करता. ट्विटर पर बहुत से यूजर्स ने ऐप के टर्म्स एंड कंडीशन को लेकर सवाल उठाए हैं. इसमें एक अहम मामला ये सामने आ रहा है कि अगर आप ऐप यूज कर रहे हैं तो आप उसे (फेसऐप) इस बात का लाइसेंस दे रहे हैं कि वो आपकी एडिटेड फोटो कहीं भी यूज कर सकता है, यहां तक की कमर्शियल काम के लिए भी.

आप कुछ भी नहीं कर पाएंगे

टर्म्स एंड कंडिशंस में पर्पिचुअल, इरवोकेबल, रॉयलटी फ्री और वर्ल्डवाइड जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब ये है कि अगर आप एक बार अपनी तस्वीर एडिट करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो कंपनी इस तस्वीर का दुनिया में कहीं भी अपने प्रमोशन के लिए इस्तेमाल कर सकती है. PhoneArena पर भी एक लेख छपा है, जिसमें कहा गया है कि ऐप आपके एडिटेड फोटोज मॉस्को में billboard (प्रचार) पर भी यूज कर सकती है और आप इसे लेकर कुछ भी नहीं कर सकते, क्योंकि ऐप के टर्म्स एंड कंडिशंस ही कुछ ऐसे हैं.

क्लाउड में क्यों स्टोर की जा रही है फोटो

फेसऐप के स्टेटमेंट में एक बात ये भी कही गई है कि हम भले ही आपकी फोटो क्लाउड में स्टोर करते हों. लेकिन ऐसा करने की मुख्य वजह सिर्फ परफॉर्मेंस और ट्रैफिक है. हम ये बात सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि यूजर बार-बार अपनी एडिट फोटो अपलोड न करे. ज्यादातर तस्वीरें अपलोड की तारीख के 48 घंटे के भीतर क्लाउड से डिलीट कर दी जाती है. लेकिन कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी में 48 घंटों में क्लाउड सर्वर से फोटो डिलीट करने की बात का कहीं जिक्र नहीं है.

कैसे काम करता है ये App

ये ऐप फोटो एडिट करने के लिए न्युरल नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जो एक तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है. ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया पर लोग खूब पोस्ट कर रहे हैं. यहां तक की क्रिकेटर्स, सेलिब्रेटीज़ भी इस ऐप का इस्तेमाल कर फोटो शेयर कर रहे हैं.

Input : News18

 

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ऐसे रखें Apps व Mobile की सेटिंग, ना डाटा चोरी होगा और ना लीक होंगी गोपनीय सूचनाएं

Santosh Chaudhary

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क्या आप स्मार्ट मोबाइल फोन यूज करते हैं? अगर हां, तो क्या आपने मोबाइल में ढेर सारे एप्लीकेशन (ऐप) डाउनलोड कर रखे हैं? अगर अब भी आपका जवाब हां है तो हो सकता है आप गंभीर खतरे मे हों या बहुत जल्द फंसने वाले हों। साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल ऐप न केवल हमारी सुरक्षा बल्कि गोपनीयता में भी सेंध लगा रहे हैं।

ऐसे में हमारे लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि किस तरह के मोबाइल ऐप को कौन सी परमिशन देनी चाहिए और कौन सी नहीं? य़हां हम आपको कुछ प्रमुख मोबाइल ऐप और उनके लिए जरूरी अनुमतियों के बारे में भी बताएंगे। साथ ही हम यहां आपको ये भी बताएंगे कि मोबाइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपको किस तरह की सेटिंग्स या उपाय अपनाने चाहिए। क्योंकि, छोटी सी लापरवाही आपको बड़े खतरे में डाल सकती है।

साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार इंटरनेट पर यूजर्स तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक वह सजग हैं। मोबाइल एप्स बड़ी आसानी से यूजर्स से उनका डाटा एकत्र करने की अनुमति ले लेती हैं। इस तरह के एप्स आपके मोबाइल की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखते हैं और आपको बिना बताए किसी भी डाटा का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं। इन एप्स को आपकी पल-पल की गतिविधि की जानकारी होती है। आप कहां जा रहे हैं? आप किसे फोन या मैसेज कर रहे हैं? आप मोबाइल पर क्या देख या कर रहे हैं?

दो तरह की होती है परमिशन

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार एंड्रॉयड फ्रेमवर्क में सामान्य तौर पर दो तरह की अनुमति होती है। एक सामान्य अनुमति और दुसरी सेंसिटिव अनुमति। सामान्य अनुमति जैसे वाईफाई, ब्लूटूथ, वॉलपेपर और अलार्म आदि के लिए एप अलग से इजाजत नहीं मागते, ये उन्हें स्वतः मिल जाती है। सेंसटिविटी अनुमति जैसे कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, कॉल व एसएमएस लॉग और स्टोरेज आदि के लिए ऐप्स को यूजर की इजाजत की जरूरत होती है। सामान्यतः यूजर्स इसकी अनुमति दे भी देते हैं, क्योंकि बिना परमिशन के ऐप सही से काम नहीं करते या डाउनलोड ही नहीं होते हैं।

ऐसे करे ऐप को दी गई अनुमति का रिव्यू

डाटा चोरी से बचने के लिए आपको ऐप डाउनलोड करते वक्त ही सावधान रहना चाहिए। चूंकि, हर ऐप को किसी खास काम के लिए डाउनलोड किया जाता है, लिहाजा उसे हर चीज की परमिशन देने की जरूरत नहीं है। जैसे कोई गेम ऐप है तो उसे फोटो गैलरी, कॉल, कैमरा या मैसेज पढ़ने की अनुमति देना आवश्यक नहीं है। आप मोबाइल में पहले से डाउनलोडेड एप को दी गई अनुमति का भी रिव्यू कर सकते हैं। इसके लिए आपको फोन की सेटिंग में जाकर Apps या Apps & Notifications देखें। यहां मोबाइल में मौजूद सभी ऐप की लिस्ट दिख जाएगी। इसके बाद किसी भी ऐप को क्लिक कर, Permissions का रिव्यू या बदलाव कर सकते हैं।

सुनिश्चित करें मोबाइल की सुरक्षा

1. मोबाइल ऐप्स को सुरक्षित करने के साथ ही मोबाइल को भी सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है कि मोबाइल फोन को मजबूत पासवर्ड से लॉक रखें। जन्मदिन या मोबाइल नंबर को पासवर्ड न बनाएं। पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर्स का जरूर इस्तेमाल करें।

2. मोबाइल को मजबूत पासवर्ड रखने के अलावा प्रत्येक महीने अपडेट भी करते रहें। हर बार नया पासवर्ड बनाएं और प्रत्येक बार स्पेशल कैरेक्टर्स का इस्तेमाल जरूर करें।

3. ईमेल आईडी या सोशल मीडिया अकाउंट में ड्यूल सिक्योरिटी का विकल्प चुनें। इससे आपको लॉग इन करते वक्त यूजर आईडी व पासवर्ड के साथ ही एक ओटीपी भी डालना होगा, जो संबंधित मोबाइल या इमेल पर प्राप्त होगा। इससे उस अकाउंट को हैक करना और मुश्किल हो जाएगा।

4. ईमेल या सोशल मीडिया पर आने वाले अनचाहे मेल व मैसेज को न खोलें। इन मेल या लिंक में वायरस हो सकता है, जिसकी मदद से हैकर आपका पूरा सिस्टम या संबंधित अकाउंट हैक कर सकता है। इस तरह के मेल य लिंक में अक्सर लालच देकर फंसाने का प्रयास किया जाता है।

5. किसी अनजान सिस्टम या ऐसे सिस्टम पर अपना अकाउंट लॉगइन करने से बचें जिसे कई लोग यूज करते हैं। साइबर कैफे में भी ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट खोलते वक्त प्राइवेट ब्राउजिंग का सहारा लें। क्रोम ब्राउजर में Incognito Private Browsing मोड का इस्तेमाल करें।

6. आजकल प्रमुख मार्केट, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट सहित तमाम सार्वजनिक जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। इन वाईफाई का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे संबंधित सिस्टम के हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।

7. मोबाइल का ब्लूटूथ तभी ऑन करें, जब उसकी जरूरत हो। हमेशा ब्लूटूथ ऑन होने से मोबाइल हैक हो सकता है या उसमें मौजूद गोपनीय डाटा चोरी हो सकता है।

8. किसी कंप्यूटर या फोन से सीधे ऐप ट्रांसफर न करें। इसे साइड लोडिंग कहते हैं। इससे भी आपके डिवाइस में वायरस के हमले का खतरा बढ़ जाता है। ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।

9. अपना मोबाइल स्थाई तौर पर किसी को देने या बेचने से पहले उसे फैक्ट्री रीसेट कर दें। हार्डबूट करना और बेहतर विकल्प है। हार्डबूट करने के लिए सेटिंग मे जाकर बैकअप एंड रीसेट (Backup & Reset) विकल्प चुनें। यहां फैक्ट्री डाटा रीसेट (Factory Data Reset) पर क्लिक करें। इसके बाद आप वो फोन किसी को दे सकते हैं।

प्रमुख मोबाइल ऐप और उनको दी जाने वाली परमिशन

1. What’sApp: कैमरा, कॉन्टेक्ट, माइक्रोफोन और स्टोरेज की ही अनुमति प्रदान करें। लोकेशन तभी ऑन करें, जब उसकी जरूरत हो। एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।

2. PayTM: क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कैमरे की अनुमति देना अनिवार्य होता है। इसी तरह रुपये ट्रांसफर करने के लिए कॉटेक्ट की अनुमति प्रदान करनी पड़ेगी। इसके अलावा कैलेंडर, लोकेशन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति न दें।

3. Facebook: केवल कैमरा और स्टोरेज की अनुमति दें। कैलेंडर, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।

4. Twitter: केवल कैमरा और स्टोरेज की अनुमति दें। कैलेंडर, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।

5. SnapChat: कैमरा, कॉटेक्ट्स, स्टोरेज और माइक की अनुमति दे सकते हैं। कैलेंडर, लोकेशन, एसएमएस और फोन की अनुमति प्रदान न करें।

6. Instagram: कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज की अनुमति दे सकते हैं। कॉटेक्ट्स, एसएमएस और फोन की अनुमति देना खतरनाक साबित हो सकता है।

7. Tinder: कैमरा, कॉटेक्ट्स व लोकेशन की अनुमति दे सकते हैं। बॉडी सेंसर्स, कैलेंडर, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज व टेलिफोन की अनुमति न दें।

8. TrueCaller: केवल कॉटेक्ट्स और एसएमएस की अनुमति प्रदान करें। कैलेंडर, कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज और फोन संबंधी अनुमति बिल्कुल न दें।

9. Jio App: कॉटेक्ट्स, एसएमएस और लोकेशन की अनुमदि ही दें। कैमरा, माइक्रोफोन, फोन और स्टोरेज की अनुमति का इसमें कोई प्रयोग नहीं है, लिहाजा उन्होंने ऑफ कर दें।

10. Flipkart: केवल स्टोरेज की अनुमति दें। कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस, लोकेशन, फोन की अनुमति न दें। ई-कॉमर्स ऐप को कॉटेक्ट्स की अनुमति बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।

11 Amazon: इसे भी केवल स्टोरेज की अनुमति दें। कॉटेक्ट्स समेत कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस, लोकेशन और फोन की अनुमति न दें।

12. Gana/Saavn: केवल स्टोरेज की अनुमति प्रदान करें। कैमरा, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस, फोन समेत अन्य सभी तरह की अनुमति ऑफ कर दें।

13. Gmail: केवल कॉटेक्ट्स, कैलेंडर और स्टोरेज की ही अनुमति प्रदान करें।

14. Google Map: केवल लोकेशन की अनुमति प्रदान करें। इसके अलावा कैमरा, कॉटेक्ट्स, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति देने की कोई आवश्यकता नहीं है।

15. Ola/Uber: इसे भी केवल लोकेशन की अनुमति प्रदान करें। इसके अलावा कैमरा, कॉटेक्ट्स, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति न दें।

16. BHIM: कैमरा, कॉटेक्ट्स व एसएमएस की ही अनुमति दें। लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज और फोन की अनुमति देने की कोई आवश्यकता नहीं है।

17. Netflix: केवल स्टोरेज की अनुमति प्रदान करें। कैमरा, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस, फोन समेत अन्य सभी तरह की अनुमति ऑफ कर दें। ऐसे अन्य ऐप के लिए भी इसी तरह की सेटिंग रखें।

अन्य किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले ये सोच लें या सुनिश्चित कर लें कि उसे किस इस्तेमाल के लिए डाउनलोड कर रहे हैं। केवल उस इस्तेमाल से संबंधित अनुमति ही संबंधित ऐप को प्रदान करें। हर ऐप को सभी तरह की अनुमति देने की न तो आवश्यकता होती है और न ही जरूरत। ऐप आपसे हर तरह की अनुमति केवल इसलिए मांगते हैं, ताकि वह आपका डाटा चोरी कर उसे बेच सकें या उसका अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकें। इससे आपकी गोपनीय सूचनाएं लीक होने का खतरा बढ़ जाता है और आप गंभीर खतरे में भी पड़ सकते हैं।

Input : Dainik Jagran

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अपने Facebook अकाउंट को रखें सेफ, अपनाएं ये 4 टिप्स

Santosh Chaudhary

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पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से डेटा लीक और हैकिंग की खबरे आई हैं, उसे देखते हुए यूज़र्स के मन में थोड़ा डर बैठ गया है. लेकिन थोड़ी सी सावधानी अपनाकर अपने फेसबुक अकाउंट को सुरक्षित बनाया जा सकता है.

पूरी दुनिया में करोड़ों लोग फेसबुक यूज़ करते हैं और इसी के ज़रिए अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से जुड़े रहते हैं. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से डेटा लीक और हैकिंग की खबरे आई हैं, उसे देखते हुए यूज़र्स के मन में थोड़ा डर बैठ गया है. लेकिन थोड़ी सी सावधानी अपनाकर अपने फेसबुक अकाउंट को सुरक्षित बनाया जा सकता है. हम आपको ऐसे ही कुछ तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने अकाउंट को सेफ बना सकते हैं.

फेसबुक डेटा को मैनेज करें-

फेसबुक पर यह नया प्रिवेस शॉर्टकट बताता है कि कैसे आप अपने डेटा को कंट्रोल कर सकते हैं. यह शॉर्टकट आपको एक मेन्यू देता है जहां टैप कर डेटा को कंट्रोल किया जा सकता है. इस एडवांस कंट्रोल ऑप्शन के ज़रिए यूज़र यह तय कर सकता है कि फेसबुक कैसे और कहां इस डेटा का इस्तेमाल करेगा. यूजर्स अपने लोकेशन डेटा को मैनेज करने के साथ ही फेसबुक पर अपलोड होने वाले कॉन्टैक्ट्स, फेस रेकॉग्निशन सेटिंग, ऐड प्रेफरेंस जैसी चीजों को मैनेज कर सकते हैं.

ऐप्स के डेटा को सीमित करें-

कई बार दूसरे ऐप्स लॉगइन करते वक्त हमारे फेसबुक अकाउंट से डेटा मांगते हैं. इस फीचर से फेसबुक ने दूसरे ऐप्स के द्वारा रिक्वेस्ट किए जाने वाले डेटा को कम करने की कोशिश की है. अभी तक ये ऐप्स केवल यूजर के प्रोफाइल फोटो, नाम और ईमेल अड्रेस को ऐक्सेस कर सकते हैं. इसके अलावा किसी और जानकारी के लिए इन्हें पहले फेसबुक अकाउंट होल्डर की परमिशन लेनी होगी.

न्यूज फीड को पर्सनलाइज करें-

इस अपडेट की मदद से आपको पता चलता है कि फेसबुक पर क्यों एक खास तरह के ही पोस्ट आपको दिखते हैं. फेसबुक इसके लिए आपको शॉर्टकट देता है जिससे आप अपने न्यू़ज़ फीड डेटा को अपनी पसंद की पोस्ट के लिए पर्सनलाइज़ कर सकते हैं.

लॉगइन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन-

पासवर्ड के अलावा फेसबुक में टू-फैक्टर ऑथेन्टिकेशन की भी सुविधा है जिसके तहत अगर कोई और आपकी अकाउंट से लॉगइन करने की कोशिश करेगा तो आपके नंबर पर एक कोड आएगा जिसे एंटर किए बिना लॉगइन नहीं होगा. इसलिए कोई भी बिना आपकी जानकारी के लॉगइन नहीं कर पाएगा.

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