अगले साल बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत आखिर क्यों तय?
Connect with us
leaderboard image

BIHAR

अगले साल बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत आखिर क्यों तय?

Mukesh Thakur

Published

on

कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव को फिलहाल 2025 के चुनाव की तैयारी करनी चाहिए

बिहार विधानसभा का चुनाव अगले साल होना है और जब उसके पहले कई अन्य राज्यों में चुनाव होना है तो उस परिप्रेक्ष्य में बिहार के विधानसभा चुनाव को लेकर भविष्यवाणी जल्दीबाजी होगी लेकिन जो संकेत मिल रहे हैं उससे तो केवल एक बात साफ लग रही है, और वह है नीतीश कुमार का एक बार फिर मुख्यमंत्री चुना जाना. खासकर इस कथन को बल बिहार की राजधानी पटना में पिछले दिनों तीन अलग-अलग घटनाओं से मिला. इनका एक-दूसरे से कोई सम्बंध नहीं था लेकिन सबका राजनीतिक अर्थ एक था.

पहला मामला है पटना स्टेशन का जहां पर लालू यादव के शासन में शुरू किया गया दूध मार्केट तोड़कर समतल कर दिया गया. रात में तेजस्वी यादव भागे-भागे विरोध करने पहुंचे लेकिन फिर कुछ घंटों में अपना धरना खत्म कर दिया. यह मार्केट यादवों के, खासकर लालू यादव और उनकी पार्टी का बिहार की सत्ता पर पकड़ और हनक की पहचान था. इस इलाके से मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर भाजपा के सांसद रामकृपाल यादव का घर है. लेकिन वे तो अपने घर से निकले भी नहीं. जो दर्शाता है कि न केवल लालू-तेजस्वी-रामकृपाल यादव युग का अंत हो चुका है बल्कि इनकी अब इतनी राजनीतिक औक़ात नहीं बची कि यादव समाज की इज्जत से ज़ुड़े एक दूध मार्केट को जमींदोज किया जा रहा था तब वे कुछ कर सकें. हालांकि इस मार्केट को जब भी पटना स्टेशन के सौंदर्यीकरण के नाम पर तोड़ने की कोशिश होती थी तब लालू यादव अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रुकवा लेते थे.

दूसरे मामले में बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल फागू चौहान ने भाजपा के अति पिछड़ी जातियों में से एक वर्ग नोनिया, बेलदार कानु महासंघ के बैनर तले आयोजित एक समारोह में भाग लिया. राजभवन से विशेष रूप से मीडिया वालों को फोन किया गया कि कवरेज करें. इस कार्यक्रम में बिहार भाजपा के सभी नेता मंच पर मौजूद थे. निश्चित रूप से भाजपा ने राज्यपाल को इस मंच पर बुलाकर कोई अच्छी परंपरा की शुरुआत नहीं की लेकिन उसकी परेशानी है कि तमाम प्रयासों के बावजूद समाज के इस वर्ग में वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पैठ का काट नहीं ढूंढ पाई है. और वह जानती है कि इस वर्ग का जब तक नीतीश को विश्वास हासिल है तब तक बिहार की सत्ता में परिवर्तन एक बहस का विषय हो सकता है लेकिन सत्ता के शीर्ष पर इसका असर नहीं दिखेगा. बकौल बिहार भाजपा के नेता जिस प्रकार नीतीश कुमार ने अति पिछड़े के लिए अब तक पूरे बिहार में तीन सीट मुज़फ़्फ़रपुर , झंझारपुर और सुपौल से इस बार कटिहार और जहानाबाद तक से इस समुदाय के अंदर आने वाली जातियों के लोगों को संसद सदस्य बनने का मौका दिया उसके बाद मात्र जाति के सम्मेलन में राज्यपाल को खड़ा कर देने से दाल नहीं गलने वाली.

शायद इस वास्तविकता का अंदाजा भाजपा के अलावा राजद को भी है, इसलिए तेजस्वी यादव जब अपने नए घर में जाते हैं तब वहां पहली बैठक अति पिछड़े समुदाय की करते हैं. उनकी ज़ुबान पर अब समाज के अति पिछड़े समुदाय को पार्टी और टिकट में हिस्सेदारी देना है. लेकिन राजद के नेता भी मानते हैं कि इन अति पिछड़ी जातियों को जोड़ने की मुहिम और बिहार की राजनीति में उनका महत्व समझने में लालू तेजस्वी ने बहुत समय गंवाया है. इसके रिज़ल्ट के लिए अगले साल के विधानसभा चुनाव में उम्मीद करना बेकार है, इसीलिए उन्हें 2025 तक इंतजार करना होगा.

वहीं नीतीश की पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए पोस्टर लगाना शुरू करती है तो भाजपा के नेता सुशील मोदी की सलाह होती है कि एनडीए में नेतृत्व पर कोई संशय नहीं, चुनाव में समय है. उनका मतलब नीतीश कुमार और उनके समर्थकों से ही होगा कि विकास के काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. सुशील मोदी को ये बात भलीभांति मालूम है कि बिहार में अगर वर्तमान एनडीए विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ी तो बहस का मुद्दा यह होगा कि आखिर क्या 2010 की 206 सीटों पर अपनी विजय का रिकॉर्ड और कितनी अधिक सीटों से तोड़ेगी, क्योंकि बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच अब वोट का अंतर बीस प्रतिशत से अधिक का है जिसको पाटने की क्षमता फिलहाल राजनीति में नौसिखिया और व्यवहार में घमंडी तेजस्वी यादव के पास नहीं है. नीतीश को सत्ता में वापस आने से रोकने में तेजस्वी इसलिए भी फेल रहेंगे क्योंकि जब उनके पिता लालू यादव 2010 में रामविलास पासवान के साथ मैदान में थे तब उनकी पार्टी 22 सीटों पर सिमटकर रह गई थी. और जब अब पासवान उनके साथ नहीं तब सामान्य ज्ञान यही बताता है कि एनडीए की सीटें बढ़ेंगी और राजद 22 से कम सीटें जीतेगी. वैसे भी लोकसभा चुनाव में जब आप विधानसभा वार सीटों पर जीत का अंतर देखेंगे तो तेजस्वी यादव केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर उसकी भरपाई नहीं कर सकते हैं.

जमीनी सच्चाई यह भी है कि लोकसभा चुनाव के बाद पूरे देश की तरह बिहार में भी भाजपा की लोकप्रियता और वोटरों में जोश बढ़ा है. इसका एक कारण कश्मीर के किए धारा 370 को खत्म करना है. इस निर्णय के बाद कश्मीरी जनता भले परेशानी झेल रही है लेकिन इस देश में एक बड़े वर्ग में इसको लेकर खुशी है. यह एनडीए के कोर वोटर हैं और नीतीश इस जमीनी सच्चाई से भलीभांति परिचित हैं इसलिए उनकी पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा में टोकन विरोध कर बाद में नए कानून का डंके पर समर्थन कर दिया. यह इस बात का संकेत है कि नीतीश अपनी विचारधारा के लिए अब कुर्सी को दांव पर लगाने से रहे. वैसे भी नीतीश एक ऐक्सिडेंटल समाजवादी हैं जो अपने सिद्धांत को समय-समय पर नए तरीके से परिभाषित करते हैं. इसलिए मुद्दों पर अपने नेताओं के माध्यम से पार्टी की राय जरूर रखेंगे, जैसे एनआरसी के मुद्दे पर हुआ, लेकिन उसको एक सीमा से ज़्यादा तूल नहीं दिया जाएगा.

आने वाले समय में अगर राम मंदिर के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मंदिर बनाने के पक्ष में आता है तो अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहेंगे तो नीतीश मंदिर का ईंट जोड़ने की कतार में भी खड़े होंगे. लोग भूल जाते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और उनकी पार्टी देश के उन गिने चुने दलों में से एक थी जिसने अपना घोषणा पत्र इसलिए नहीं जारी किया कि भाजपा को उससे परेशानी होती. नीतीश ने किसी मीडिया वालों को इंटरव्यू नहीं दिया कि वे उनसे वह सवाल करेंगे जिस पर उनके जवाब से भाजपा को सफ़ाई देनी होती. यह बात अलग है कि उसी नीतीश कुमार को चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा ने खाली हाथ, मतलब केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके मनमुताबिक जगह दिए बिना, पटना लौटने पर मजबूर किया. और यही नई भाजपा है जिसके लिए नीतीश जितने कदम अपनी राजनीति में पीछे रखें लेकिन अब की भाजपा अपने फ़ीडबैक के आधार पर आकलन करती है और वैसे ही आपको भाव देती है.

बिहार के अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सस्पेंस इसी बात को लेकर है कि क्या भाजपा एक बार अपने बलबूते सरकार बनाने की कोशिश करेगी. इसका आधार यही है कि आने वाले कुछ महीनों में बगल के झारखंड में भाजपा अपने बलबूते सरकार बनाने जा रही है.और जब बंगाल में वह वोटरों के बीच ध्रुवीकरण कराके मुख्य विपक्ष की जगह ले सकती है तो बिहार में क्यों नहीं. लेकिन ऐसी मांग करने वालों को लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह की पटना में मीडिया वालों को नसीहत याद रखनी चाहिए कि बिहार में त्रिकोणीय राजनीति एक सच्चाई है और यहां दो से उनका मतलब भाजपा और जनता दल यूनाइटेड से था, एक साथ आ गए तो तीसरे का दुर्गति तय है. दिक्कत है कि नीतीश के सामने चेहरा कौन होगा और दूसरा भाजपा के नेता मानते हैं कि अगर नीतीश फिर जीत के आ जाएं तो पूरे देश की राजनीति में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. लेकिन नीतीश और भाजपा दोनों को सत्ता में एक-दूसरे के साथ जो कम्फ़र्ट है वह किसी और दल और गठबंधन में दोनों को नहीं मिल सकता. लेकिन भाजपा के नेता भी मानते हैं कि नीतीश कुमार के प्रति जनता में किए गए काम के आधार पर एक जो मौन वोट बैंक बना है वो उनके हर वादों को पूरा होने के साथ दिनोंदिन बढ़ा है. इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

नीतीश कुमार का सबसे बड़ा राजनीतिक दुश्मन न राजद है और न भाजपा, बल्कि उनका उनकी पार्टी के ख़ुद के पोस्टर के अनुसार ‘ठीके है‘ की उनकी वर्तमान मानसिकता. माना जाता है कि जो भी इस पोस्टर और नारे के पीछे है वह नीतीश कुमार से भलीभांति परिचित है. और शायद उसने अपने निजी अनुभव या नीतीश कुमार के व्यवहार से तंग आकर सबसे उपयुक्त शब्द ‘ठीके है’ का चयन किया. इसके पीछे नीतीश कुमार का व्यवहार है. अब चाहे विधि व्यवस्था हो, या विकास आलोचना को वे फीडबैक नहीं मानते और घटनाओं को चुनौती के रूप में नहीं लेते. लेकिन उनकी सब कुछ पर यही प्रतिक्रिया होती है ठीके है… एक ही बाइट होती है, घटनाओं को कौन रोक सकता है. यही उनकी प्रतिक्रिया होती है. उनके अपने निर्णय, जैसे शराबबंदी, जिसे माना जाता है पूरे बिहार के पुलिस वालों के लिए हर दिन बोनस स्कीम है, के कारण पुलिस तंत्र और भ्रष्ट हुई है. समाज में एक समानांतर व्यवस्था कायम हुई है और सरकारी ख़ज़ाने को अपनी ज़िद में नीतीश ने हर साल चपत लगाई. नीतीश की यह योजना कितनी सफल है इसका अंदाज़ा आपको बगल के झारखंड और बंगाल के आबकारी से होने वाले राजस्व से लग जाएगी. लेकिन उसके बावजूद उन्होंने पूरे समाज में अपराधियों की एक नई फ़ौज खड़ी कर दी, लेकिन तब भी सब ठीके है…

जहां एक ओर शराबबंदी के कारण अब बिहार में अपराध खासकर हत्या की घटनाओं में वृद्धि आई है वहीं हर घर नल का जल हो, हर वृद्ध के लिए पेंशन हो या दलित या अति पिछड़ी जाति के छात्रों के किए मुफ़्त राशन की व्यवस्था, यह सब ऐसी स्कीमें हैं जिसके कारण फ़िलहाल अगले साल नीतीश के लिए सत्ता में वापसी उनके विरोधी भी मानते हैं कि एक औपचारिकता होगी. और अगर एनडीए एकजुट होकर लड़ा तो देखना यह होगा कि कौन पार्टी कितनी सीटें तालमेल में पाती है और किसका कितना स्ट्राइक रेट होता है. जहां तक विपक्ष का सवाल है तो सबकी जिज्ञासा केवल इसमें होगी कि तेजस्वी और तेजप्रताप अपनी सीट बचा पाने में कामयाब होते हैं या नहीं. वैसे चुनावी समीकरणों को देखें या चुनावी अंकगणित को, नीतीश कुमार फिलहाल अपने विरोधियों पर हर तरह से भारी पड़ रहे हैं.

Input : NDTV

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) :इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति  Muzffarpur Now उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Muzffarpur Now के नहीं हैं, तथा Muzffarpur Now उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

MUZAFFARPUR

मौलवी के खिलाफ जल्द चार्जशीट करेगी पुलिस

Muzaffarpur Now

Published

on

कटरा रे’प केस के मुख्य आ’रोपित सीतामढ़ी के मौलवी मकबूल के खि’लाफ पुलिस जल्द चा’र्जशीट करेगी। इसकी तैयारी में पुलिस जुट गई है। विशेष कोर्ट में केस की आईओ चार्जशीट दखिल करेंगी। बीते शनिवार को पुलिस ने बैरिया स्थित उसके डेरा से गि’रफ्तार किया था। वहीं दूसरा आ’रोपित फरार है। पुलिस उसके परिजनों पर लगातार दबाव बनाए हुए है।

कटरा की किशोरी के साथ मौलवी व बिजली मिस्त्री ने दुष्कर्म किया था। सितंबर में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद से गांव के दबंग पीड़िता व उसके परिजनों को गांव से निकालने की धमकी दे रहे थे। साथ ही प्रताड़ित भी कर रहे थे। घर पर रोड़ेबाजी की थी और उनका दाना-पानी भी बंद करा दिया था। इसकी जानकारी पर महिला आयोग की टीम ने बीते बुधवार को संज्ञान लेते हुए कटरा जाकर जांच की थी।

Input : Hindustan

Continue Reading

MUZAFFARPUR

विधायक के बॉडीगार्ड का मोबाइल छीना

Muzaffarpur Now

Published

on

मीनापुर विधायक मुन्ना यादव की सुरक्षा में तैनात बॉडीगार्ड रणधीर यादव रविवार की सुबह झपट्टीमार गिरोह का शिकार हो गया। उचक्कों ने बॉडीगार्ड के हाथ से उसका मोबाइल झपट लिया।

Image result for mobile snatching"

बॉडीगार्ड ने मीनापुर थाना को इसकी सूचना दी है। थानाध्यक्ष राज कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि झपट्टामार गिरोह की तलाश की जा रही है। घटना रविवार सुबह की है। बॉडीगार्ड रणधीर यादव मॉर्निंग वॉक करते हुए थाना क्षेत्र के मुकसूदपुर के समीप एनएच 77 पर अपने मोबाइल से बात कर रहे थे। तभी बाइक सवार उचक्कों ने उसके हाथ से मोबाइल झपट लिया।

Input : Hindustan

Continue Reading

BIHAR

सुविधा : उत्तर बिहार के 22 रूटों पर चलेंगी 166 सरकारी बसें

Muzaffarpur Now

Published

on

उत्तर बिहार के 22 रूटों पर 166 सरकारी बसें चलेंगी। इसके लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने टेंडर जारी किया है। इन 22 रूटों में से पांच पर पहले से सरकारी बसें चल रही हैं। पांच रूट पर महज 11 सरकारी बसें ही चल रही हैं। राज्य सरकार ने लोगों को सस्ते किराये पर यात्रा की सहूलियत को लेकर 17 नए रूटों पर निगम की बसें चलाने के लिए आदेश दिया है। मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर- बेगूसराय, मुजफ्फरपुर-सीवान, सीतामढ़ी-बेतिया व रोसड़ा-पटना आदि रूटों पर सरकारी बसें चलेंगी। बसें पीपीपी (लोक-निजी साझेदारी) के तहत चलेंगी। बस चलाने वाले इच्छुक ऑपरेटर निगम के कार्यालय में छह दिसंबर तक आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदनों पर विचार के बाद निगम निजी बस ऑपरेटर से करार करेगा। परमिट के बाद बसों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस संबंध में निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन झा ने बताया कि उत्तर बिहार के लोगों को सस्ता व सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए 22 रूटों पर बस चलाने की तैयारी की जा रही है। इन इलाकों से लगातार सरकारी बसों की परिचालन की मांग की जा रही थी।

Input : Hindustan

Continue Reading
Advertisement
MUZAFFARPUR28 mins ago

मौलवी के खिलाफ जल्द चार्जशीट करेगी पुलिस

MUZAFFARPUR1 hour ago

विधायक के बॉडीगार्ड का मोबाइल छीना

BIHAR1 hour ago

सुविधा : उत्तर बिहार के 22 रूटों पर चलेंगी 166 सरकारी बसें

MUZAFFARPUR2 hours ago

पूरे भारत में रविवार को सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा मुजफ्फरपुर, पटना तीसरे नंबर पर

BIHAR2 hours ago

जिसकी मौ’त में 23 लोग जेल में, वह जिंदा लौटा

RELIGION2 hours ago

पर्व : मंगलवार को भैरव अष्टमी पर सिंदूर और तेल से करें भगवान का श्रृंगार और बोलें भैरव मंत्र

BIHAR3 hours ago

वशिष्ठ बाबू के नाम पर होगा कोईलवर का नया पुल: मंत्री

BIHAR3 hours ago

हाईटेक डुप्लेक्स में रहेंगे अब बिहार के MLA और MLC, सीएम आज देंगे सौगात

MUZAFFARPUR3 hours ago

सरैयागंज में रात को तीन घंटे तक ठप रहेगी बिजली

BIHAR3 hours ago

राहत की खबर: 22 नवंबर से पटना के चौक- चौराहों पर 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज

MUZAFFARPUR2 days ago

मुजफ्फरपुर का थानेदार नामी गुं’डा के साथ मनाता है जन्मदिन! केक काटते हुए सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल…खाक होगा क्रा’इम कंट्रोल?

INDIA2 days ago

आ गया ‘मिर्ज़ापुर 2’ का टीजर, पंकज त्रिपाठी ने इंस्टाग्राम पर किया शेयर

BIHAR3 weeks ago

27 अक्टूबर से पटना से पहली बार 57 फ्लाइट, दिल्ली के लिए 25, ट्रेनों की संख्या से भी दाेगुनी

tharki-proffesor
MUZAFFARPUR3 days ago

खुलासा: कोचिंग आने वाली हर छात्रा को आजमाता था मुजफ्फरपुर का ‘पा’पी प्रोफेसर’, भेजा गया जे’ल

BIHAR3 weeks ago

पंकज त्रिपाठी ने माता पिता के साथ मनाई प्री दिवाली, एक ही दिन में वापस शूटिंग पर लौटे

MUZAFFARPUR4 weeks ago

मुजफ्फरपुर के लाल शाहबाज नदीम का क्रिकेट देखेगा पूरा विश्‍व, भारतीय टीम में शामिल होने पर पिता ने कही बड़ी बात

MUZAFFARPUR1 day ago

कुंवारी मां बनी कटरा की पी’ड़िता से दु’ष्क’र्म का आ’रोपी माैलवी गि’रफ्तार

JOBS19 hours ago

भर्ती : 12वीं पास के लिए CISF में नौकरी, 300 जीडी हेड कांस्टेबल पदों के लिए करें आवेदन

BIHAR3 weeks ago

मदीना पर आस्‍था तो छठी मइया पर भी यकीन, 20 साल से व्रत कर रही ये मुस्लिम महिला

victory-of-gamcha-campaign-by-nilotpal
BIHAR1 day ago

होटल ने वेटरों के ड्रेस में गमछा किया शामिल

Trending

0Shares