मोहमाया छोडकर वैरागी बनना क्या होता है, यह कोई योगी आदित्यनाथ और उनके परिवार से पूछे। गोरक्षनाथ पीठ जैसे प्रख्यात मंदिर के महंत और पांच बार सांसद और अब मुख्यमंत्री होने के बाद भी उनका परिवार उसी हाल में है, जैसे कि पहले था। जब योगी महंत भी नहीं थे। योगी आदित्यनाथ सन्यासी बनने के लिए एक बार घर से बाहर निकले तो फिर वापस मुड़कर नहीं देखे।

आज जहां एक बार सांसद-विधायक होते ही लोग अपने परिवार क्या रिश्तेदारों को भी मालामाल कर देते हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ त्याग और इमानदारी की मिसाल पेश करते हैं| वह ऐसे तथाकथित राजनीतिज्ञों को आइना भी दिखाते है।मुश्किलों में दिन कट रहें है बहन केतीन बहनों में से सबसे छोटी बहन शशि ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर ऊपर जंगलों में झोपड़ीनुमा दुकान पर रोजगार कर रही हैं। वह नीलकंठ मंदिर से ऊपर पार्वती मंदिर के पास प्रसाद, फूल माला और बिस्कुट बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रही हैं। वैसे तो योगी आदित्यनाथ की दो बहनें ठीक-ठाक परिवार में हैं, सिर्फ शशि को ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बहन का कहना है कि “आज से 27 साल पहले जब योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड के पंचूर गांव में रहते थे तो पूरा परिवार हर त्यौहार को एक साथ मिलकर मनाता था।“

योगी कहते थे-कमाऊंगा तो गिफ्ट दूंगा

योगी की बहन शशि का कहना है कि बचपन में रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन वह अपने चारों भाइयों को सामने बैठाकर राखी बांधती थीं और उपहार के नाम पर योगी आदित्यनाथ उर्फ़ अजय बिष्ट उनसे यही कहा करते थे कि अभी तो फिलहाल में कुछ नहीं कमा रहा हूं, लेकिन जब बड़ा हो जाऊंगा तो तुम्हें खूब सारे उपहार दूंगा। वहीं, अजय बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ बचपन में राखी के त्यौहार पर अपने पिता से पैसे लेकर अपनी तीनों बहनों को दिया करते थे। शशि बताती हैं कि पैसे देने के बाद योगी आदित्यनाथ पिता के चले जाने के बाद उनसे वही पैसे दोबारा मांगा करते थे।

आज के योगी आदित्यनाथ की 27 साल पहले अजय बिष्ट के तौर पर पहचान थी। यही वह समय था, जब वह घर छोड़कर गोरखपुर पहुंचे थे। बहन का कहना है कि इसके बाद से वह कभी योगी से नहीं मिलीं। तभी से भाई की कलाई पर राखी न बांध पाने का हर बार मलाल रहता है।

Input : Live Bavaal

 

 

 

 

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