बिहार के पांच जिलों में पनामा बिल्ट रोग से बचाने के लिए केले की नयी वेरायटी जी-9 लगाई जाएगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के टिशू कल्चर लैब में इसे तैयार किया गया है। इससे फसल रोगमुक्त होगी। साथ ही 20 प्रतिशत उत्पादन बढ़ने की भी संभावना है।

जानकारी हो कि राज्य में 40 हजार हेक्टेयर में केले की खेती होती है। भागलपुर जिले में 2000 हेक्टेयर में केले की फसल होती है, लेकिन पनामा बिल्ट रोग की वजह से 30 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो जाती है। इससे किसान और कारोबारियों को एक साल में 60 करोड़ का नुकसान होता है। बीएयू की ओर से बायोटैक किसान हब योजना के तहत अररिया, कटिहार, पूर्णिया, औरंगाबाद, खगड़िया के 10-10 एकड़ खेतों में नयी वेरायटी लगायी जाएगी।

In Somalia, Bananas are Back - RTI | Int'l Dev - Medium

जून में इस पौधे को खेत में लगाया जाना है। इससे पहले इन जिलों के किसानों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीएयू के कुलपति डॉ. एके सिंह ने कहा कि किसानों को रोगमुक्त पौधा देना और उसके उत्पादन को बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। इसी कड़ी में बायोटैक किसान हब के तहत पांच जिलों में खेती शुरू होगी।

मिट्टी जनित बीमारी से बचने के कई उपाय

बीएयू के सह निदेशक अनुसंधान मो. फिजा अहमद ने बताया कि दक्षिण अमेरिका के पनामा से यह मिट्टी जनित रोग फैला है। उन्होंने कहा कि बिहार में 30 प्रतिशत तक किसानों को इससे नुकसान हो रहा है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वह टिशू कल्चर लैब में तैयार पौधे ही खरीदें। किसी के खेत से पौधे लाकर लगा रहे हैं तो उसे 50 लीटर पानी में 50 ग्राम कार्बेंडाजेन के घोल में पांच मिनट तक रखें। इससे पौधे में संक्रमण का खतरा कम होगा। इसके अलावा खेतों में दो फसल लगाने के बाद तीसरे साल दूसरी फसल लगाएं। साथ ही जब फल आने लगे तो पौधे में 100-150 ग्राम पोटाश जरूर डालें।

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ऑनलाइन बताया जाएगा, कैसे करें रोग की पहचान 

निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आरके सोहाने ने बताया कि ऑनलाइन प्रशिक्षण की तैयारी पूरी हो गयी है। पांच जिलों के करीब 50 किसानों को जोड़कर ऑनलाइन प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें पनामा बिल्ट के बारे में बताया जाएगा। साथ ही बचने के उपाय भी समझाएं जाएंगें।

रोग के लक्षण

इस रोग के लगने से पत्ता पीला व सिर झुकने लगता है। जड़ में खराबी आने के बाद पौधे सूखने लगते हैं। टिशू कल्चर से जुड़े अवधेश पाल ने कहा कि किसानों को चाहिए कि हर बार टिशू कल्चर से नए पौधे लेकर लगाएं। इससे पनामा का खतरा काफी कम हो जाएगा। साथ ही उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।

रोबेस्टा और चीनिया में पनामा का प्रकोप 

नवगछिया खरीक के केला किसान रूबल कुमार सिंह ने कहा कि रोबेस्टा और चीनिया केला में पनामा का प्रकोप अधिक दिखता है। इसके अलावा सीगाटोका डिजीज, चित्ती लगने की समस्या से भी फसलों को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इलाके से केला बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, कोलकाता, काठमांडू व उत्तराखंड तक जाता है।

आंकड़े की नजर में

बिहार में 40 हजार हेक्टेयर में केले की खेती

भागलपुर में 2000 हेक्टेयर में केले की खेती

पनामा से 30 प्रतिशत की क्षति

इससे हर साल 60 करोड़ से अधिक का नुकसान

इसके बचाव के लिए किसान स्थानीय कीड़ा मारने की दवा का छिड़काव करते है।

Input : Hindustan

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