करीब छह माह के अंतराल के बाद इस वर्ष दूसरी बार सूर्यग्रहण का संयोग बना है। यह वर्ष 2020 का अंतिम सूर्यग्रहण (Solar Eclipse)है। इसके बारे में बाबा गरीबनाथ धाम के पुजारी पंडित विनय पाठक कहते हैं कि पूर्ण सूर्य ग्रहण होने की स्थिति में सूतक लगने का प्रावधान सनातन धर्म में है। इसके अनुसार सभी धार्मिक स्थानों के पट बंद कर दिए जाते हैं। शुभ कार्य स्थगित रहते हैं। लेकिन, इस बार छाया ग्रहण का संयोब बन रहा है। ऐसे में 12 घंटे पहले सूतक लगने वाली बात नहीं होगी। उपछाया होने के कारण न तो इसका कोई प्रभाव मान्य है और न ही इस हालत में सूतक ही लगेगा। ऐसे में मुजफ्फरपुर में सूतक काल में भोजन पकाना और खाना वर्जित होने की बात को मानने की बाध्यता नहीं होगी। हालांकि कोई नया काम आरंभ करने से परहेज करना ही बेहतर होगा। उपछाया होने के बाद भी गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर आने से बचना चाहिए। इस काल में मूर्ति पूजा और गर्भ गृह में जाने से बचना चाहिए। हां, जप सबसे बेहतर माना जाता है। भोजन व पेय पदार्थों में कुश या तुलसीदल रखे जाने की मान्यता है।
आज का सूर्यग्रहण इस बात वजह से भी खास माना जा रहा है कि आज सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2020) भी है। इस वजह से भक्त आज सुबह से जलाशयों में स्नान कर रहे हैं। इसके बाद भगवान शिव को जलार्पण कर रहे हैं। कहा जाता है कि इस दिन स्नान के बाद भगवान का जलाभिषेक करने के बाद सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। एक वर्ष में सोमवती अमावस्या का संयोग दो से तीन बार ही बन पाता है। इस दिन पीपल की पूजा और पूर्वजों को याद करने का भी विधान है। मुजफ्फरपुर के लोग भी इसी अनुसार स्नान और पूजा कर रहे हैं।
इस बाद दो सूर्यग्रहण हुए लेकिन, दोनों ही उपछाया ग्रहण। ऐसे में मुजफ्फरपुर में इसका कोई भी प्रभाव नहीं हुआ। आज पड़ने वाले ग्रहण का भी नहीं। इस अंतिम सूर्यग्रहण को दक्षिण अमेरिका, साउथ अफ्रीका अटलांटिक, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। कहा जा रहा है कि यह ग्रहण 5 घंटे और 20 मिनट तक रहेगा। स्पष्ट रूप से अपना पूरा देश उपछाया ग्रहण में होगा। अगर समय की बात की जाए तो यह भारतीय समय के अनुसार आज शाम 7:03 बजे से शुरू होकर मध्यरात्रि 12 :23 बजे समाप्त होगा। गौरतलब है कि 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को लगा था। उस समय भी कुछ ऐसा ही हुआ था। आज अमावस्या और सोमवार होने के कारण सोमवती अमावस्या भी है। अपने यहां यह ग्रहण भले ही नहीं दिख रहे हों लेकिन इस दौरान की सावधानियों को अपनाना बेहतर माना जाता है। कहा जात है इस दौरान मानस जाप अधिक लाभकारी होता है। इससे आध्यात्मिक शक्तियां हासिल होती हैं। ग्रहण की अवधि पूरी होने के बाद स्नान और तदोपरांत पात्र व्यक्ति को दान करना मंगलकारी होता है।
Input: Dainik Jagran




