गंगा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। बीते 24 घंटे में 24 सेंटीमीटर पानी घटा है, लेकिन अब भी खतरे के निशान 33.68 मी. से 84 सेमी. ऊपर 34.52 मी. पर बह रही है। अब जलस्तर घटने की संभावना है,लेकिन पिछले 20 दिनों में बाढ़ ने जिले में जो तबाही मचाई, उससे सबसे ज्यादा किसानों पर असर पड़ा। जिले के 15 प्रखंडाें की 136 पंचायताें के 559 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। बाढ़ से 30 हजार 805 हेक्टेयर कृषि याेग्य जमीन प्रभावित हुई है। इससे 14 हजार 709 हेक्टेयर में लगी फसल काे नुकसान हुआ है। जिला आपदा प्रबंधन शाखा के आकलन के मुताबिक 116.99 लाख की फसल काे क्षति हुई है। हालांकि कृषि विभाग अभी क्षति का सर्वे ही कर रहा है। अफसरों के अनुसार, अभी इसमें दाे-तीन दिन लगेंगे। इसके बाद क्षति की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। संभावना है कि क्षति प्रारंभिक आकलन से अधिक हाेगी।

किसानाें के लिए बाढ़ प्रलय बनकर आई। अभी सबसे अधिक धान की खेती हुई है। ज्यादातर छाेटे किसानाें ने महाजनाें से सूद पर कर्ज लिया था कि धान की पैदावर के बाद वापस कर देंगे। किसान धान उत्पादन से हुई आमदनी से ही किसान रबी की भी खेती करते हैं। लेकिन हालत यह है कि धान की फसल डूब गई है। अब भी खेताें में पानी भरा है। अगर गंगा का जलस्तर आगे घटता रहा ताे खेताें से पूरी तरह से पानी निकलने में कम से कम 15 दिन लगेंगे। एेसे में धान के पाैधे सड़ जाएंगे।

1. पीरपैंती: उत्पादन की उम्मीदों पर फिर गया पानी
पीरपैंती में इस बार बाढ़ में 99 0 हेक्टयर धान की फसल बर्बाद हुई। किसान लाखों खर्च कर खेती करते हैं। पहले खेत की तैयारी और फिर रोपनी पर खर्च होता है। 2021 के धान की खेती सबसे महंगी हुई है। डीजल के दाम बढ़ने से ट्रैक्टर से जुताई महंगी हाे गई। फिर खाद व मजदूरी अधिक लगी। किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी। बाढ़ आने से 10 दिन पहले ही धान रोपनी कर किसान निश्चिंत थे। इसी बीच बाढ़ ने फसल नष्ट कर दी। नवंबर-दिसंबर में किसान के घरों में शादी है, कैसे बेटी की शादी हाेगी, धान के बेहतर उत्पादन की उम्मीद में थे। इस पर पानी फिर गया।

शाहकुंड: आय डूबी, अब रबी फसल में भी होगा संकट
शाहकुंड के 7 पंचायतों बेलथू, मकंदपुर, पैरडोमिनियां, खुलनी, खैरा, कसवा खेरही, दरियापुर में बाढ़ से 13 हजार एकड़ में लगी फसल डूब गई। आय के स्रोत डूब गए। कुछ पंचायतों में खाने के आनाज भी खेतों से आना मुश्किल हो गया। किसानों के आय के स्रोत बंद हो गए। बेटियों की शादी, रोजमर्रे का खर्चा, बच्चों की पढ़ाई सब चौपट हो गई है। रबी की खेती पर भी ग्रहण लगेगा। मवेशियों को चारा नहीं मिलेगा। कर्ज में दबा किसान उसे औने-पौने में बेचने को मजबूर हो जाएंगे। आय के स्रोत बंद होने से रोजमर्रा के खर्च और रबी की खेती के लिए किसानों को खेत भी बंधक रखने होंगे।

3. सन्हाैला: इस बार बाढ़ से गल गई धान की पूरी फसल
सन्हौला में धान की अच्छी पैदावार होती है। लेकिन बाढ़ ने किसानों को आर्थिक रूप से झकझोर दिया है। पिछले वर्ष भी प्रखंड में धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गयी थी। इसका मुआवजा अब तक सभी काे नहीं मिल सका। इससे किसान कर्ज में डूबे हैं। इस बार किसानों ने फिर कर्ज लेकर बुआई की। अच्छी बारिश से इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी। लेकिन बाढ़ ने इस पर पानी फेर दिया। पानी निकलने के बाद इस बार प्रखंड में 50 फीसदी फसल नहीं बचेगी। बिचड़ा गल चुका है। इस बार किसानों को सही तरीके से मुआवजा नहीं मिला तो वे कर्ज में डूब जाएंगे।

Input: Dainik Bhaskar

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