कोरोना (Corona) काल में एक कलियुगी पुत्र द्वारा मृत पिता का शव लेने से इनकार करने एवं अंतिम संस्कार को लेकर कोई व्यवस्था नहीं होने की लाचारी दिखाकर शव अस्पताल में छोड़कर चले जाने का मामला सामने आया है. जिसके बाद कबीर संस्था के लोग मुस्लिम युवक की अगुवाई में हिन्दू रीति रिवाज से उस मृत शख्स का अंतिम संस्कार किया. जिसकी सराहना चारों तरफ हो रही है.

वहीं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुत्र के साथ समाज ने इस विपरीत परिस्थिति में अपना सामाजिक धर्म नहीं निभाया? साथ हीं, जिस पुत्र के जन्म पर माता-पिता खुशी से झूम उठते है और उनको लगता है कि उनका लाडला एक दिन उन्हें मुखाग्नि देकर अपना पुत्र धर्म निभाएगा. वहीं, पुत्र ने बदली परिस्थिति में न तो शव लिया है, और न ही अपने पिता के अंतिम संस्कार को लेकर कोई उपाय किया.

इधर, कबीर संस्थान के उन पुत्रो ने जो किसी और के पुत्र होकर भी ,किसी पराए के लिये इस विषम परिस्थिति में भी पुत्र धर्म निभा रहे है. वहीं, मृत शख्स के तीनो पुत्र ने कोरोना से मौत मामले पर मिलने वाला 4 लाख की सरकारी सहायता राशि लेने से इनकार कर दिया है.
दरअसल, यह पूरा मामला कमतौल थाना क्षेत्र व केवटी प्रखण्ड के पिंडारुच का है. जहाँ के सेवानिवृत्त एक रेलकर्मी, उनकी पत्नी एवं दो पुत्र कोरोना पॉजिटिव होने के बाद डीएमसीएच में भर्ती किए गए थें और इसी बीच सेवानिवृत्त रेलकर्मी की मौत हो गयी. ऐसे में तीसरे पुत्र ने व्यवस्था की लाचारी दिखा पिता का शव लेने से इनकार कर दिया. लेकिन मृत का अंतिम संस्कार के लिये कोई आगे नहीं आय. इसी कम्र में इसकी जानकारी कबीर संस्था को दी गयी. जिसके सदस्यों ने मुस्लिम युवक की अगुवाई में हिन्दू रीति रिवाज के साथ शव का अंतिम संस्कार किया.
Input: Zee Media








