कहते हैं पुत्र रत्न की प्राप्ति बगैर पितृऋण से मुक्ति नहीं मिलती है। पुत्र कुलतारण व वंशवृद्धि का कारक माना जाता है, लेकिन एक 80 वर्षीय पिता को अंतिम दिनों में अपने ही पुत्र का साथ नहीं मिल सका। यह सब कोरोना संक्रमण से हुई मौत की वजह से हुई है। पिता के अंतिम दर्शन व विदाई में पुत्र शामिल नहीं हो सका।

स्वास्थ्य विभाग के एक डॉक्टर ने बताया कि करीब तीन रोज पहले एक न्यायाधीश ने अपने बीमार पिता को डायट स्थित डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर पर भर्ती कराया था। जांच के दौरान उनके पिता कोविड-19 की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। अस्पताल प्रबंधन ने उनकी देखरेख की। आखिरकार इलाजरत न्यायाधीश के वृद्ध पिता की शुक्रवार की देर रात मौत हो गयी।

कोरोना संक्रमण के चलते न्यायाधीश ने शव ले जाने की बजाए एक पत्र जारी कर दूसरे व्यक्ति को शव लेने को लेकर अधिकृत कर दिया। इस संजीदे मामले को देखते हुए डीएम अमित पांडेय के हस्तक्षेप के बाद प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एमआर रंजन सेंटर पहुंचकर शव को अधिकृत व्यक्ति को सौंप दिया। जिसने न्यायाधीश के पिता के शव का आपदा साथी ग्रुप के सहयोग से अंतिम संस्कार किया।

Input: Live Hindustan

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