पूर्णिया. वीरता पुरस्कार प्राप्त एक रिटायर्ड फौजी (Retired Army) को सरकार द्वारा दी गई जमीन (Land) पर जिला प्रशासन दशकों से कब्जा नहीं दिला सका है. 1962 और 1971 की लड़ाई लड़ चुके पूर्व सैनिक शत्रुघन गिरि समस्तीपुर जिले के सोंगर गांव के रहने वाले हैं. दोनों युद्धों में शौर्य के चलते उन्हें दो-दो मिलिट्री मेडल से सम्मानित किया गया. तत्कालीन केंद्र सरकार की तरफ से साल 1984 में पूर्णिया (Purnia) में जमीन दी गई. जिस पर भूमाफियाओं और असामाजिक तत्वों ने कब्जा जमा लिया है. जांबाज पूर्व सैनिक इस जमीन पर कब्जा पाने के लिए सालों से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं.

उम्र के अंतिम पड़ाव में पूर्व जांबाज सैनिक शत्रुघन गिरि को जमीन की जंग लड़नी पड़ रही है.

शुक्रवार को एक बार फिर जमीन के सिलसिले में पूर्व सैनिक गिरि पूर्णिया के डीएम और एसपी से मिले. दोनों अधिकारियों ने एक बार फिर मामले की जांच कराकर जमीन पर कब्जा दिलाने का भरोसा दिलाया. पूर्व सैनिक शत्रुघन गिरि युद्ध के दिनों को याद कर भावुक हो जाते हैं. साथ ही अपने साथ हो रही इस ज्यादती पर कुछ न कर पाने का दुख भी जाहिर करते हैं. उन्हें समस्तीपुर से पूर्णिया बार-बार आकर जमीन की लड़ाई लड़नी पड़ रही है. उम्र के अंतिम पड़ाव में जब चलना-फिरना मुश्किल हो रहा है, तब प्रशासनिक लापरवाही और दबंगों की दबंगई उन्हें झेलनी पड़ रही है.

पीड़ित के वकील दिलीप कुमार दीपक बताते हैं कि उनके मुवक्किल को जमीन पर कब्जा भले ही सरकार अब तक नहीं दिला पायी हो, पर पूर्व सैनिक जमीन का रसीद हर साल कटवाते आ रहे हैं. यानी सरकार को राजस्व का भुगतान करते आ रहे हैं.

दिलीप कुमार दीपक के मुताबिक पूर्णिया जिले में कई ऐसे मामले हैं, जिसमें सैनिकों को सरकार द्वारा आवंटित जमीन पर असामाजिक तत्वों ने कब्जा जमा लिया है. कुछ सैनिक और उनके परिजनों ने तो आजिज होकर भूमाफियाओं को ही जमीन बेचना मुनासिब समझा. कुछ लोग कोर्ट की शरण लेकर आधी-अधूरी जमीन हासिल की. भूमाफिया ऐसे पूर्व सैनिकों पर दबाव बनाकर उनकी जमीन औने-पौने दामों में खरीदने की फिराक में रहते हैं. इसलिए जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने का ये खेल जारी है.

Source : News18

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