इस साल पूस में फाल्गुन जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है। मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव से सभी हतप्रभ हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार और झारखंड में बने प्रतिचक्रवात की वजह से ऐसा हो रहा है।
हर साल जनवरी में ठिठुरन रहती थी, उत्तर पश्चिमी दिशा से बर्फीली हवा के प्रवाह की वजह से पारा सामान्य से तीन से चार डिग्री नीचे चला जाता था, लेकिन इस साल बिहार में स्थिति उलट है। सूबे के अधिकतर शहरों का तापमान सामान्य से चार से छह डिग्री तक ऊपर है।
दिन में धूप की तल्खी से गर्मी का अहसास हो रहा है। न तो सुबह शाम घने कोहरे वाली स्थिति है और न ही ठिठुरन है। शाम ढलने पर मामूली ठंड सूबे के लगभग सभी जगहों पर रह रही है। न्यूनतम पारे की भी यही स्थिति है। अधिकतर शहरों का न्यूनतम तापमान चार से छह डिग्री अधिक है। इससे रातें भी सर्द नहीं हो रहीं। सूबे में अब तक मात्र दिसंबर में एक बार कोल्ड वेव या कोल्ड डे की स्थिति बनी है। बाकी दिन पारा सामान्य से ऊपर ही बना रहा है।
2016 में थी ऐसी स्थिति
पिछले दो वर्षों में जनवरी महीने में 15 जनवरी तक सूबे में कड़ाके की ठंड का कहर देखा गया था। 20 जनवरी के आसपास धूप में तल्खी देखी गई थी और पारा ऊपर चढ़ा था। इससे पहले वर्ष 2016 में अधिकतम तापमान में इस साल की तरह ही तेजी देखी गई थी। तब पटना का अधिकतम तापमान सात जनवरी को ही 27.5 पर पहुंच गया था।
लेकिन उस समय यह स्थिति दो से तीन दिनों के लिए ही बनी थी। इसके बाद पारा नीचे आने लगा था। हालांकि मौसमविदों का कहना कि अभी सूबे में शीतलहर का एक चक्र आना बाकी है। अगले तीन चार दिनों के मौसमी सिस्टम पर यह निर्भर करेगा। मौसमविदों के मुताबिक मई-जून में पिछले साल की अपेक्षा इस बार ज्यादा गर्मी पड़ेगी। पिछले साल लगातार बारिश की स्थिति बने रहने से बिहार में तापमान सामान्य के नीचे ही रहा था।
तापमान बढ़ने के कारक
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के मुताबिक, सूबे के आसपास पिछले एक हफ्ते से प्रतिचक्रवात की स्थिति बनी रह रही है। इस वजह से सूबे में आंशिक बादल छाए रह रहे। इससे न्यूनतम तापमान ऊपर चढ़ा रह रहा है। साथ ही पिछले दिनों बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी वाली हवा का प्रवाह अधिक मात्रा में होता रहा।पारे में बढ़ोतरी की वजह वातावरण में नमी की मात्रा का बढ़ना भी है। सूबे में पिछले 24 घंटों में उत्तर पश्चिमी दिशा से ठंडी हवाओं का प्रवाह आंशिक रूप से बढ़ा है, लेकिन यह अभी इतना प्रभावी नहीं है कि पारे में उल्लेखनीय गिरावट ला सके।
Input: Live Hinsustan





