पटना. पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता रहे स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह (RJD Leader Raghuvansh Prasad Singh) की आज 75 वीं जयंती है. बिहार की सियासत में उनके सरल व्यवहार की वजह से लोग प्यार से उनको ब्रह्म बाबा भी कहते हैं, लेकिन अपनी जिंदगी के आखिरी पल में रघुवंश सिंह को लेकर कई तरह की बातें सामने आइ थीं. बावजूद इसके उन सवालों का जवाब देने रघुवंश प्रसाद सिंह कभी सामने नहीं आए. इस दौरान मरने के तीन दिन पहले उनके कुछ पत्र ज़रूर चर्चा में रहे थे जो उन्होंने लालू यादव (Lalu Prasad) और नीतीश कुमार दोनों को लिखे थे. रघुवंश प्रसाद सिंह की मौत कोरोना की वजह से दिल्ली में हो गई थी.

रघुवंश सिंह के लिखे पत्र पर उनके मरने के बाद खूब सियासत हुई. JDU और भाजपा ने राजद पर निशाना साधा था तो राजद ने भी जवाब देने की पूरी कोशिश की थी और तब राजद ने पत्र को लेकर सवाल उठाए थे, वहीं लालू यादव जिनके रघुवंश प्रसाद सिंह बेहद ही करीबी माने जाते थे भी अपने साथी के निधन पर बेहद भावुक हो गए थे. रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपने निधन के पहले तीन पत्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखा था, जिसमें उन्होंने कुछ मांग भी की थी.

इन मांगों में वैशाली में 15 अगस्त और 26 जनवरी को राज्य स्तरीय सरकारी आयोजन कराने

भगवान बुद्ध के भिक्षा पात्र को अफगानिस्तान से वैशाली मंगवाने मनरेगा से किसानों को जोड़ने जैसी बातें थीं. इसके अलावे उन्होंने बिहार के सिंचाई मंत्री को पत्र लिख कर साहित्यकार राम वृक्ष बेनीपुरी के घर की सुरक्षा के लिए कटैंझा धार को दोनो तटबंधों के बीच लाने की मांग की थी. राजद के नेता शक्ति यादव ने अब रघुवंश प्रसाद सिंह के लिखे पत्र के आधार पर सत्ताधारी दल से पूछा है कि तब आदरणीय रघुवंश प्रसाद सिंह जी के शुभ चिंतक बनने का जो ढोंग किया था और बड़ी बड़ी बातें कही थी आज उनकी मांगों को कोई क्यों नहीं पूरा करता है.

राजद के आरोप पर JDU नेता और MLC नीरज कुमार कहते हैं कि रघुवंश बाबू का सम्मान खुद का सम्मान है. जहां तक बात रघुवंश बाबू के लिखे पत्र में मांग की है तो कुछ मामले अंतरराष्ट्रीय और संवैधानिक हैं, वो अपनी जगह हैं लेकिन विकास से जुड़े जो सवाल है उसे राज्य सरकार पूरा करने का प्रयास कर रही है और काम चल भी रहा है. नीरज ने कहा कि राजद के लोगों को रघुवंश बाबू के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है. जिन लोगों ने रघुवंश बाबू को जीते जी भूला दिया अब उनके बारे में चर्चा कर रहे हैं. राजद के लोगों को रघुवंश बाबू के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

Source : News18

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