पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई परिहार नियमों के आधार पर संभव नहीं है। गृह विभाग के प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में आए एक ध्यानाकर्षण के दौरान इस मसले पर हुई चर्चा के क्रम में यह बात कही। प्रभारी मंत्री ने कहा कि लोकसेवकों की हत्या के परिहार नहीं दिए जाने का वैधानिक प्रविधान है। आनंद मोहन को लोकसेवक की हत्या के मामले में सजा हुई है।

राजद के ललित यादव, आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद व भाकपा (माले) के महबूब आलम सहित बीस विधायकों ने इस आशय का ध्यानाकर्षण लाया था। यह कहा गया कि राज्य भर की विभिन्न जेलों में बड़ी संख्या में उम्रकैद की सजा प्राप्त कैदी 14 वर्ष की अपनी निर्धारित सजा पूरी करने के बाद भी राज्य परिहार पर्षद द्वारा समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण बेवजह जेल में हैं। स्वाभाविक न्याय से वंचित रहने के कारण बंदियों के परिजनों और संबंधियों में निराशा व आक्रोश है।

अबतक 374 को रिहा किया जा चुका

प्रभारी मंत्री बिजेंद्र यादव ने कहा कि परिहार पर्षद की आखिरी बैठक पिछले महीने की एक तारीख को हुई थी। अबतक 374 लोगों को रिहा किया जा चुका है। पूर्व सांसद आनंद मोहन का मामला इस वजह से पर्षद की बैठक में नहीं रखा गया कि वह परिहार की परिधि में नहीं हैं।

सजा पूरे हुए हो गए छह माह

आनंद मोहन के पुत्र व विधायक चेतन आनंद ने कहा कि आनंद मोहन की सजा के पूरा हुए छह माह से अधिक हो गए। सरकार उन्हें क्यों नहीं निकालना चाहती है? भाकपा (माले) विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार आजीवन सजा प्राप्त सभी बंदियों को परिहार का अधिकार हैै। बंदियों को परिहार से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार पूर्वाग्रह से ग्रस्त है।

राजनीति से प्रेरित होकर नहीं कर रहे रिहाः तेजस्वी

इस मसले पर चेतन आनंद नारेबाजी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आकर बैठ गए। विपक्ष के अन्य लोग भी धरना पर बैठ गए। विधानसभा की पहली पाली खत्म होने के बाद इस मसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में कहा कि राजनीति से प्रेरित होकर सरकार आनंद मोहन को रिहा नहीं करना चाहती है। राजेंद्र यादव का मामला भी इसी तरह का है। मंत्री लेसी सिंह पर एफआइआर है, पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

Source : Dainik Jagran

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