गायघाट, मुजफ्फरपुर : गांव की सादगी ग्रामीणों में बसती है। नून- सत्तू के जुगत में सादगी से पूरी जीवनयापन कर लेते है। अगर इनके छोटी सी समस्या भी आती है, तो गाँव के लोगों की समस्या ऑफिसो एवं अफसरों के चक्कर काटते – काटते ही समाप्त हो जाती है। अन्यथा समस्याओं से सामंजस्य बिठाकर जीवनयापन को मजबूर रहते है। ऐसी ही परिस्थिति है, मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड के जाँता डीह गांव की।

गांव के लोगों के अनुसार, सन 1991 – 92 के दशक में गांव में एक अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ था। लेकिन फंड की कमी के चलते अस्पताल निर्माण कार्य ठप हो गया था। और फिर 30 साल से गांव में अस्पताल नहीं है। किसी को सुधि नहीं है, मुखिया, विधायक, मंत्री – संतरी सब मूक – दर्शक की भांति इस विषय पर चुप्पी साध रखे है। इमरेंजी की स्थिति में भी गाँव के लोगों को गायघाट या मुजफ्फरपुर आना होता है। स्थानीय स्तर पर ईलाज करवाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।

दुर्दशा पर ठेकेदार साहब ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा,कि टेंडर राशि में जितना निर्माण कार्य हो सकता था, उन्होनें अपने स्तर से करवाया। और फंड की कमी की शिकायत इंजिनियर साहब और अधिकारियों से की, लेकिन किसी स्तर से सुनवाई नहीं हुई।

गाँव की बात क्या! सहायक सेविका, आँगनबाड़ी और आशा दी सभी लोग कार्यरत है, किन्तु दुर्भाग्य से गांव में कोई अस्पताल नही है। यह बोल बड़े बोल जैसी है, क्योंकि गांव के 5 से 7 किलोमीटर के अंदर कोई अस्पताल नहीं है।
गांव का यह अस्पताल कभी माल – मवेशियों , तो भूसाघर बना रहता है। गांव के लोग थकहार कर अस्पताल बनने की उम्मीद भी छोड़ चुके है।

Team : Satyam






