मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्चुअल रैली के दौरान अपने 15 साल के कार्यकाल में किए गए कामों की जमकर चर्चा की. अपने भाषण के दौरान एक पुराने वाक्ये का भी जिक्र किया. नीतीश ने बताया कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है, जब 2007 में बाढ़ आई तो करीब 22-23 जिले इससे प्रभावित हुए. उनकी सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर काम किया. प्रभावितों को एक-एक क्विंटल अनाज बांटा गया. उन्होंने बताया कि अनाज बांटने के कार्यक्रम के दौरान जब वे दरभंगा गए तो वहां सुना कि लोग उन्हें ‘क्विंटलिया बाबा’ बोल रहे थे. ये इसलिए था, क्योंकि उन्होंने काम किया, पहले कुछ नहीं होता था.

इसके पहले उन्होंने कहा कि इस बार जून के बाद से ही हमारे 16 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए. राज्य के 83 लाख से अधिक की जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित हुई. बाढ़ से निबटने के लिए हमलोग सब तरह का काम कर रहे हैं. एयर ड्रॉपिंग के माध्यम से हमने कई बाढ़ प्रभवित क्षेत्रों में राहत पैकेट तत्काल पहुंचाया, जिस समय आने-जाने का कोई रास्ता नहीं था. उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित 5 लाख से ज्यादा लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. लोगों के लिए राहत केंद्र चलाये जा रहे हैं. सामुदायिक रसोई केंद्र की व्यवस्था की गई.

उन्होंने बताया कि सामुदायिक रसोई केंद्र में एक दिन में पूरे बिहार में 10 लाख से अधिक लोगों ने भोजन किया. हमने तय किया था कि राहत केंद्र और सामुदायिक रसोई केंद्र में जो लोग आएंगे उनका कोरोना टेस्ट किया जाएगा और किया भी गया. जांच में कई लोग पॉजिटिव मिले, उनको इलाज के लिए अन्य जगह भेजा गया. कई लोगों को बचाया गया, वरना लोग बाढ़ से भी प्रभावित थे और बड़ी संख्या में लोग कोरोना से प्रभावित हो जाते.

नीतीश कुमार ने बताया कि अब तो बाढ़ का प्रभाव कम हो गया है. अब तो रसोई केंद्र की संख्या भी कम हो गई है. अब सिर्फ 22 हजार लोग रसोई केंद्र में भोजन कर रहे हैं. जो पहले था अब धीरे-धीरे स्थिति सुधरती जा रही है. नीतीश कुमार ने कहा कि आपदा राहत में पहले क्या करते थे. पहले कुछ होता था क्या. किसी को मिलता था कुछ.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब हमलोगों को काम करने का मौका मिला तो 2006 से हमने इस पर काम करना शुरू किया. एक-एक चीज के लिए एसओपी बनाया, कब किस परिस्थिति में क्या काम करना है. 2007 में 22-23 जिला बाढ़ से प्रभावित हुआ था. 2.5 करोड़ की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी, हमने उनके लिए काम किया. किस तरह से हमने लोगों के लिए एक-एक क्विंटल आनाज बांटना शुरू किया. बताइए क्या पहले कुछ मिलता था. अगर पहले लोगों को राहत मिलती तो क्यों लोग क्विंटलिया बाबा बोलते. नई पीढ़ी के लोगों को इस बात को याद रखना चाहिए, समय तो बीतते जाएगा. हर पल, हर क्षण ये बीत रहा है, लेकिन जो काम पहले नहीं हुआ था, हमने वो किया. प्रत्येक पीड़ित परिवार को हमने 3 हजार रुपये राशन के लिए और 3 हजार रुपये कपड़ा और बर्तन के लिए यानि 6 हजार ग्रेचुटस रिलीफ देना शुरू किया.

नीतीश ने बताया कि कल 6 सिंतबर तक इस बार के 16 लाख 62 हजार बाढ़ पीड़ित परिवारों को 6 हजार रुपये करके कुल 997 करोड़ रूपया उनके खातों में पहुंचा दी गई. शेष प्रभावित परिवारों को भी जल्द यह राशि उनके खातों में दे दी जाएगी. फसल क्षति का भी आकलन करा लिया गया है. इसका भी लाभ जल्द लोगों को पहुंचा दिया जाएगा. किसानों कृषि इनपुट अनुदान भी देते हैं. फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने में ओला वृष्टि और वर्षापात से जो नुकसान हुआ, कुल 18 लाख 39 हजार 666 किसानों को 568 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. फसल सहायता योजना के अन्तर्गत भी लोगों को मदद की जाती है.

Source : Live Cities

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