डीजल की कीमतों में वृद्धि से पहले से ही बेहाल किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। बिहार में अब राज्य सरकार ने उनको डीजल अनुदान देना भी बंद कर दिया है। खरीफ में किसानों को डीजल अनुदान नहीं मिला। रबी में तो ऐसी कोई योजना ही नहीं है।

डीजल की कीमत बढ़ने के साथ राज्य सरकार ने किसानों को मिलने वाली अनुदान की राशि भी बढ़ा दी थी। सरकार किसानों को तीन सिंचाई के लिए प्रति लीटर 60 रुपये की दर से अनुदान देती थी। लेकिन, लगभग दस वर्षों से हर साल चल रही यह योजना इस वर्ष बंद हो गई। हालांकि लाभुकों की संख्या देखने से लगता है कि सरकार ने गत वर्ष ही इस योजना को बंद करने का मन बना लिया था। गत वर्ष अनुदान के लिए 11.64 लाख किसानों ने आवेदन किया था। लेकिन सरकार ने मात्र 6.37 लाख को ही इसका लाभ दिया। इसके पहले वर्ष 2018-19 में 42.32 लाख किसानों ने आवेदन किया था और 30.02 लाख किसानों को इसका लाभ मिला था।

सरकार का मानना है कि पिछले वर्ष खरीफ में हर नक्षत्र में वर्षा हुई थी। लिहाजा इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन रबी में योजना नहीं चलाने का तर्क न तो सरकार दे पा रही है और न ही कृषि अधिकारी। अलबत्ता कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने बिजली की प्रचुर उपलब्धता को इसका कारण बताया। खरीफ में भी ऐसा नहीं है कि किसानों को सिंचाई के लिए डीजल की जरूरत नहीं पड़ी। यह सही है कि इस वर्ष खरीफ मौसम में सितम्बर तक 14 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। लेकिन, यह भी सच है कि अगस्त में राज्य में 29 प्रतिशत वर्षा की कमी थी।

कटिहार और बक्सर को छोड़कर हर जिले में उस समय वर्षा की भारी कमी थी। धान की खेती के लिए अगस्त का महीना बहुत ही मत्वपूर्ण होता है। उसी महीने में सिंचाई कर किसान खाद भी डालते हैं।

सरकार अनुदान तो सिर्फ सिंचाई के लिए डीजल पर देती थी। लेकिन किसानों की डीजल पर निर्भरता कई और काम के लिए भी है। कटनी और दौनी के साथ बाजार तक पहुंचाने में ट्रैक्टर आदि में भी डीजल का ही उपयोग होता है। हार्वेस्टर भी डीजल पर ही चलता है।

Source : Hindustan

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