त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के हाल में दिए गए नेपाल और श्रीलंका में बीजेपी की सरकार बनाने वाले बयान पर पड़ोसी देश नेपाल ने आपत्ति दर्ज करवाई है। अपने बयानों के चलते अक्सर विवादों में रहने वाले त्रिपुरा सीएम देब ने 13 फरवरी को अगरतला में कहा था कि उनकी पार्टी की योजना सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में भी सरकार बनाने की है।

बिप्लब देब ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की नेपाल और श्रीलंका में भी सरकार बनाने की योजना है। बिप्लब देब के कॉमेंट को लेकर किए गए नेपाली शख्स के ट्वीट का जवाब देते हुए नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा, ”नोट किया गया। औपचारिक आपत्ति पहले ही दर्ज करवा दी गई है।” हालांकि, उन्होंने इसके अलावा और कोई जानकारी साझा नहीं की।

घटनाक्रम से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर सहयोगी अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स से बताया कि नई दिल्ली में नेपाल के राजदूत निलांबर आचार्य ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (उत्तर) अरिंदम बागची के साथ फोन पर बात की थी। बागची नेपाल और भूटान के साथ देश के संबंधों पर नजर रखते हैं। इस मामले पर भारतीय अधिकारियों की कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

विदेश मंत्रालय ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कोई भी कॉमेंट अब तक नहीं किया है। ऊपर जिक्र किए गए शख्स ने बताया कि दोनों ही पक्ष यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि बिप्लब देब के बयान से ज्यादा विवाद न हो। इसके अलावा, देब का बयान श्रीलंका में भी काफी वायरल हुआ है, लेकिन अभी तक श्रीलंका के किसी भी मंत्री का कोई बयान सामने नहीं आया है।

बिप्लब देब अगरतला में आयोजित एक कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह से काफी पहले हुई बातचीत के बारे में जानकारी साझा कर रहे थे। दोनों के बीच यह बातचीत साल 2018 में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के समय हुई थी। इस चुनाव में बीजेपी ने त्रिपुरा में लेफ्ट को हराकर सरकार बनाई थी। उन्होंने कहा था कि हम स्टेट गेस्टहाउस में बात कर रहे थे, जब अजय जामवाल (बीजेपी के नॉर्थईस्ट जोनल सेक्रटरी) ने कहा कि बीजेपी ने कई राज्यों में सरकार बना ली है।

इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि अब श्रीलंका और नेपाल बचे हैं। हमें नेपाल और श्रीलंका में पार्टी का विस्तार करना है और वहां सरकार बनाने के लिए जीतना है। बिप्लब देब ने आगे कहा कि उस समय बीजेपी के अध्यक्ष रहे अमित शाह ने एक मीटिंग के दौरान भारत के सभी राज्यों में जीतने के बाद विदेशों में जीत दर्ज करने की योजना के बारे में बताया था।

उल्लेखनीय है कि भारत और नेपाल के रिश्ते कई महीनों से ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले साल नेपाल की संसद में विवादित मैप पारित किया था, जिसमें उसने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के इलाकों को अपना बताया था। इसके बाद, दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया था। हालांकि, भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि दोनों देशों के बीच रोटी और बेटी का रिश्ता है। वहीं, तनाव को खत्म करने की दिशा की ओर कदम बढ़ाते हुए नेपाल के विदेश मंत्री ने हाल ही में भारत का दौरा किया था और कोरोना वैक्सीन, सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बात की थी।

Input: Live Hindustan

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