बीजेपी ने बुधवार देर शाम बक्‍सर सहित दो और सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. इसके साथ ही बीजेपी ने कुल 29 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है. हाल ही में बिहार के पूर्व डीजीपी पद से अपनी निर्धारित सेवानिवृति से पहले ही वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें बक्सर से चुनाव लड़ाया जा सकता है. मगर जेडीयू ने बुधवार को अपने 115 उम्मीदवारों की सूची जारी कर इन कयासों पर विराम लगा दिया है. सूची में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का नाम कहीं नहीं हैं. इस बात से खफा गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनाव लड़ने से तौबा कर लिया है.

गुप्तेश्वर पांडेय ने बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद फेसबुक के माध्यम से अपने शुभचिंतकों के नाम एक संदेश लिखा है. इस संदेश में उन्होंने कहा है कि फ़ोन से परेशान हूं. मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं. मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें. मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन नहीं करें. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है. अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहां के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें.

आपको बता दें कि पांडेय को 11 साल पहले भी धोखा मिल चुका है. लेकिन इस विधानसभा चुनाव से उनको उम्मीदें भी थीं, लेकिन उनको निराशा हाथ लगी और बीजेपी की सूची में कहीं उनका नाम नहीं था. दरअसल इसके लिए सीएम नीतीश कुमार ने बहुत प्रयास किया लेकिन बीजेपी ने इस सीट को छोड़ने से साफ़ इंकार कर दिया.

इसके पहले 2009 में भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस का प्रोसेस पूरा कर गुप्तेश्वर पांडेय बीजेपी के टिकट पर बक्सर से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन एन वक्त पर बीजेपी ने उनको टिकट नहीं दिया था. अब उनको विधानपरिषद से कुछ उम्मीद बची है. बहरहाल देखने वाली बात यह होती है कि विधानपरिषद में गुप्तेश्वर पांडेय कुछ कर पाते हैं या नहीं.

Input: Live Cities

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