भागलपुर में पाक्सो मामले को लेकर अदालत में एक बड़ा फैसला लिया गया है. न्यायाधीश आनंद कुमार सिंह की अदालत ने जुर्म करने के समय नाबालिग रहे आरोपित के मां-बाप को दोषी करार दिया है. जज ने आरोपित के पिता सुभाष मंडल और मां संयुक्ता देवी को सजा सुनाने की तिथि नौ दिसंबर तय की है.

बाथ थाना क्षेत्र में छात्रा के साथ 2016 में हुए दुष्कर्म की मामले में आरोपित के मां-बाप को भी नामजद बनाया गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इस मामले में आज सुनवाई की और दोनों को मुजरिम करार दिया है.सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक शंकर जयकिशन मंडल बहस के लिए मौजूद रहे.दुष्कर्म के इस मामले में आरोपित की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में पहले ही स्थानांतरित हो चुकी थी.

दुष्कर्म के आरोपित के नामजद मां-बाप का ट्रायल पाक्सो की विशेष न्यायालय में चला और अंतत: दोनों को अदालत ने दोषी माना. दरअसल, यह मामला बाथ थाना क्षेत्र का है. आरोपित ने छात्रा को धोखे से अपने घर बुलाया और उसे अपने कब्जे में रखा. उसे लेकर अपने साथ दिल्ली भी चला गया. इस दौरान लड़की के साथ दुष्कर्म भी किया गया. दुष्कर्म के इस घटना को लेकर अदालत ने ये माना है कि बेटे की इस घिनौनी करतूत में मां-बाप का भी पूरा सहयोग था.

अदालत ने माना कि जब आरोपित लड़की को धोखे में रखकर अपने घर लाया तो इसकी जानकारी उसके मां-बाप को थी. लेकिन उन्होंने अपने बेटे को इसे लेकर मना नहीं किया बल्कि पीड़िता को ही धमकाया और फटकार लगाई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लड़की किसी तरह आरोपित के चंगुल से बाहर भागी और अपने पिता को फोन किया. घर वाले लड़की के पास पहुंचे और उसे वापस बाथ स्थित अपने घर लेकर आए थे.

सितंबर 2016 को इस घटना को लेकर केस दर्ज कराया गया था. दर्ज कराए गए मामले में जिक्र किया गया था कि आरोपति ने लड़की को मोटरसाइकिल पर बैठाया और धोखे से घर लेकर चला गया. घर लाकर लड़की के साथ दुष्कर्म करने की बात शिकायत में कही गयी थी. आरोपित छोटू कुमार और उसके पिता सुभाष मंडल और मां संयुक्ता देवी को इस मामले में नामजद किया गया था.
Source : Prabhat Khabar
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