पटना उच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को राज्य के प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक के विद्यालयों में छठे चरण के नियोजन में आवेदन नहीं करने वाले दिव्यांगों को मौका देने के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने तत्काल आगे की तैयारी आरंभ कर दी है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में दो से तीन महीने लगेंगे। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने तीन दिनों के भीतर आवेदन के लिए विज्ञापन जारी करने के संकेत दिये। आवेदन जमा करने के लिए दिव्यांगों को 15 दिन का समय दिया जाएगा। आवेदन से लेकर नियुक्ति पत्र बांटे जाने तक में कुल 60 से 70 दिन लगेंगे। नये आवेदनों के शामिल होने से मेधा सूची भी नए सिरे से बनेगी। फिर उसपर आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद अंतिम मेधा सूची बनेगी। उसके बाद काउंसिलिंग, फिर नियुक्ति पत्र बंटेगा। उम्मीद है, 15 अगस्त से पहले सवा लाख शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बंट जाए।

उच्च न्यायालय के फैसले का शिक्षा मंत्री ने स्वागत किया।

‘हिन्दुस्तान अखबार’ से बातचीत में कहा कि सरकार ने पिछले बजट सत्र में घोषणा की थी कि शिक्षक नियुक्ति मामले में सरकार विशेष प्रयास कर न्यायालय से नियुक्ति की इजाजत मांगेगी। कोरोनाकाल और कोर्टबंदी में भी वर्चुअल माध्यम से महाधिवक्ता द्वारा लगातार मुख्य न्यायाधीश को कोर्ट में विशेष उल्लेख किया जाता रहा और आज इस मामले में हमें राहत मिली। राज्य में शिक्षक के लाखों पद रिक्त थे। शिक्षक योग्यता परीक्षा पास अभ्यर्थी सड़क पर घूम रहे थे। सरकार इसे बहुत ही कष्टदायक स्थिति मानती है। इसलिए हम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हैं।

बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘वैसे तो सरकार एक सप्ताह में नियुक्ति पूरी कर लेने की तैयारी में थी, लेकिन कोर्ट के आदेश से अब हम जल्द दिव्यांगों को अवसर देने के लिए विज्ञापन निकालेंगे। दिव्यांगों को आवेदन के लिए 15 दिन का समय देना है। आवेदन के बाद नया मेरिट लिस्ट बनेगा। नियोजन की पूरी कार्रवाई पूरी होने में दो से तीन महीने लग जायेंगे।’

बदल जाएगी कई बार के प्रयास से तैयार मेधा सूची

छठे चरण के तहत राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में करीब 94 हजार और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक स्कूलों में 30020 पदों पर बहाली की प्रक्रिया लम्बे समय से चल रही है। दोनों नियुक्तियों की अधिसूचनाएं 1 व 5 जुलाई 2019 को जारी हुई है। इस दौरान आधा दर्जन बार नियुक्ति के शिड्यूल जारी हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका। दिव्यांगों की अपील पर हाईकोर्ट के आदेश पर अगस्त 2020 में नियोजन प्रक्रिया स्थगित की गई। इससे पूर्व बहाली के लिए सभी नियोजन इकाइयों द्वारा मेधा सूची बनायी जा चुकी थी। अब दिव्यांगों के नए आवेदन आने के बाद मेधा सूची पूरी तरह बदलनी पड़ेगी। शिक्षा विभाग प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर पर सभी जिलों में दिव्यांगों के लिए आवंटित पद, उनके विरुद्ध कार्यरत दिव्यांग और उनके हिस्से के रिक्त पदों का ब्योरा जुटा चुका है।

यह बिहार के दिव्यांगों की जीत : संघ

नेशनल ब्लांइड एसोसिएशन ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले को बिहार के दिव्यांगों और खासतौर से नेत्रहीनों की जीत बताया है। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ की बिहार शाखा के महासचिव डॉ. विनय कुमार ने हाईकोर्ट व राज्य सरकार का आभार जताया है। कहा कि संघ द्वारा दायर दो याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश ने ऐतिहासिक फैसला दिया। एक याचिका शिक्षक नियोजन से संबंधित थी। जिस पर कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि दिव्यांगों का फॉर्म फिर से भरवाया जाए। आरक्षण का पालन सही तरीके से करते हुए सामान्य अभ्यर्थियों के साथ उनकी नियुक्ति की जाए। दूसरी याचिका बैकलॉग से संबंधित थी जिसमें कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि 1995 से 2017 तक जितनी नियुक्तियां हुईं उनकी गणना कर दिव्यांगों के लिए कितनी सीट बनती है, इसकी सूची राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ को 4 माह में उपलब्ध करायी जाय।

मुख्य बिंदु

3.52 लाख हैं राज्य में नियोजित शिक्षक
1.24 लाख की नियुक्ति होनी है छठे चरण में
4.76 लाख नियोजित शिक्षक हो जाएंगे बहाली पूर्ण होने पर

Input: live hindustan

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