एक तो उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल और पढ़ाई कर भी ली तो रोजगार मिलना लगभग असंभव। बिहार के बेरोजगारों में ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर से पोस्ट ग्रेजुएट वाले ही 78% हैं। चिंता इतनी ही नहीं, कोरोना और लॉकडाउन के चलते बेरोजगारों की फौज और बढ़ रही है। गांवों से ज्यादा शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी ज्यादा तेजी से बढ़ी है। पिछले मई महीने में ही राज्य में बेरोजगारों की तादाद करीब 1.35 लाख बढ़ी।

आर्थिक विशेषज्ञ इसके कारणों पर रिसर्च के साथ स्वरोजगार पर तुरंत ताकत झोंकने की सलाह दे रहे हैं। वरना, प्रति व्यक्ति आय के राष्ट्रीय औसत 94,954 रुपए के मुकाबले अभी बिहार में रहने वालों की आय का आंकड़ा 31,287 रुपए है। इसका और नीचे गिरना तय है।

बढ़ती मौतों से खौफ और मई के 25 दिन लॉक रहे कारण
सीएमआई की ओर से जारी आंकड़े बता रहे कि मई महीने में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 11.9 फीसदी थी, तो बिहार में यह दर 13.80 फीसदी तक पहुंच गई। बिहार में कोरोना से मौतों की गति के कारण दिखे खौफ और फिर महीने के 25 दिनों तक रहे लॉकडाउन ने इसे जोर का झटका दिया।

मई में बेरोजगार हुए ज्यादातर लोग इनफॉर्मल सेक्टर से जुड़े
अप्रैल की तुलना में मई में बेरोजगारी दर 2.26 फीसदी बढ़ी है। इस गणना से राज्य में इस अवधि में करीब 1.35 लाख की नौकरी चली गई और इनमें से ज्यादातर इनफाॅर्मल सेक्टर में काम कर रहे थे। बिहार में सर्वाधिक बेरोजगारी स्नातक और अधिक योग्यता वाले है।
बीमारी पर खर्च से चढ़ा लोन भी लाएगा संकट, पलायन बढ़ेगा
आद्री के अर्थशास्त्री अमित सिन्हा बक्सी कहते हैं कि बिहार पहले से ही देश में सबसे कम प्रति व्यक्ति वाला राज्य है। बेरोजगारी बढ़ने से प्रतिव्यक्ति आय में और कमी आएगी। राज्यों में विषमता बढ़ेगी और इसके साथ पलायन भी बढ़ेगा। कोरोना को लेकर मई प्रभावित रहा है।
Input: Dainik bhaskar






