बिहार में नीतीश सरकार ने शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन इसके बावजूद यहां जहरीली शराब से मौत के मामले सामने आ चुके हैं. इसके अलावा भी शराब की अवैध बिक्री से जुड़ी कई खबरें सामने आती रहती हैं. राज्य में शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा विपक्षी नेताओं के निशाने पर रहते हैं. गुरुवार को भी राष्ट्रीय जनता दल के नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने बिहार सरकार पर हमला बोला है. इसके अलावा उन्होंने प्रशासन अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. बता दें कि हाल ही में सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर समीक्षा बैठक भी की है.

राजधानी पटना में मीडिया से बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा, ‘बिहार में संपूर्ण शराबबंदी कहां है? राज्य के बॉर्डर पर प्रशासन शराब में लिप्त है. प्रशासन के लोग, सिपाही, हवलदार सभी जगह होम डिलीवरी कर रहे हैं. जिस तरह पिज्जा की होम डिलीवरी होती है उसी तरह से IPS, IAS घरों में शराब की होम डिलीवरी कर रहे हैं.’

बिहार में शराबबंदी
गौरतलब है कि अप्रैल 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया गया था. इस पर प्रतिबंध लगाने के बाद से, विभिन्न शराब त्रासदियों में लगभग 150 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. प्रदेश में शराबबंदी कानून वापस लेने को लेकर लगातार उठती मांग के बाद ही सीएम नीतीश कुमार ने समीक्षा बैठक की.

CIABC ने बिहार सरकार से किया आग्रह
भारतीय मादक पेय कंपनियों के परिसंघ (सीआईएबीसी) ने बिहार सरकार से राज्य में शराबबंदी समाप्त करने का आग्रह किया है. सीआईएबीसी ने कहा है कि बिहार शराबबंदी नीति की भारी कीमत चुका रहा है. राज्य में अवैध और नकली शराब बिक रही है, इस अवैध धंधे में शामिल अपराध गिरोह का उभार हुआ है और सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है.

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