बिहार के विभिन्न शहरी निकायों में रेहड़ी-फेरीवालों को वेंडिंग प्रमाणपत्र वितरण का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसमें राजधानी पटना भी शामिल है। खास बात यह है कि इस प्रमाणपत्र पर सिर्फ वेंडर ही नहीं, उसके पूरे परिवार का फोटो लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर इसी प्रमाणपत्र के जरिए परिवार का कोई दूसरा सदस्य भी वेंडिंग का काम कर सकेगा। केंद्र सरकार की स्वनिधि योजना का लाभ पाने के लिए वेंडिंग प्रमाणपत्र होना जरूरी है।

कोरोना काल में असंगठित क्षेत्र में आने वाले वेंडरों यानि रेहड़ी-फेरीवालों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने स्वनिधि योजना शुरू की थी। इसके तहत वेंडरों को 10 हजार रुपए का लोन बिना किसी बैंक गारंटी के मिल सकता है। योजना का लाभ पाने के लिए वेंडरों का संबंधित निकाय में पंजीकृत होना जरूरी है। उसके पास वेंडिंग का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यदि वो ना हो तो निकाय द्वारा जारी अनुशंसा पत्र के आधार पर भी लोन मिल सकता है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और राज्य शहरी आजीविका मिशन की मदद से वेंडरों का पूर्व में सर्वे कराया तो था लेकिन किसी भी वेंडर को प्रमाणपत्र नहीं दिए गए थे।

अब पटना, दरभंगा सहित अन्य निकायों में प्रमाणपत्र दिए जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। वेंडर का काम करने वाले परिवार के सदस्य के बीमार होने या कोई अन्य दिक्कत होने पर कोई दूसरा सदस्य भी इस काम को देख सकेगा। प्रमाणपत्र पर इसीलिए पूरे परिवार का फोटो लगाया गया है। प्रमाणपत्र वितरण का काम शुरू होते ही लोन के लिए आवेदनों की संख्या में भी इजाफा होने लगा है।

Source : Hindustan

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