मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत पानी की बर्बादी (fine for misuse of water) रोकने का सख्त प्रविधान को मंजूरी दी गई। पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के दीर्घकालीन अनुरक्षण (रख-रखाव) नीति पर कैबिनेट की मुहर लग गई। अब पानी की बर्बादी करते पकड़े जाने पर पहली बार में 150 रुपये, दूसरी बार में चार सौ रुपये और तीसरी बार में पांच हजार रुपये जुर्माना भरना होगा। यही नहीं, प्रति माह 30 रुपये आपूर्ति शुल्क जमा नहीं करने पर पेयजल का कनेक्शन भी काट दिया जाएगा। नए कनेक्शन के लिए तीन सौ रुपये दंड भी चुकाना होगा। हालांकि इससे पहले 15 दिनों का नोटिस दिया जाएगा।

सरकार ने बनाई मुख्यमंत्री ग्रामीण नल जल योजना दीर्घकालीन अनुरक्षण नीति सिंचाई करने और पशुओं को धोने पर देना होगा 150 से लेकर पांच हजार रुपये तक दंड

अहम यह है कि मोटर पंप लगाकर नल जल योजना का पानी उपयोग करने पर भी पांच हजार रुपये दंड का प्रविधान किया गया है। इसके साथ पंप भी ग्राम पंचायत स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जब्त कर लेगी। इसके बाद नहीं मानने पर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। सरकार ने नल जल योजना के रख-रखाव को लेकर वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है।

30 रुपये देना है प्रति माह शुल्क

नल-जल योजना का लाभ लेने वाले परिवार को प्रतिमाह 30 रुपये शुल्क अनिवार्य रूप से भरना होगा। तय प्रविधान के तहत शुल्क वसूली की राशि वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की खाते में जमा होगी। इसके साथ ही पेयजल आपूर्ति में किसी तरह की गड़बड़ी आने पर दुरुस्त करने को लेकर भी मुकम्मल प्रविधान किया गया है।

नपेंगे मुखिया व वार्ड सदस्य

सरकार ने नल जल योजना की अनदेखी पर ग्राम पंचायत और वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति, तकनीकी सहायक और मुखिया एवं वार्ड सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को दिया है।

Input: dainik jagran

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