आवेदन करने के बाद राशन कार्ड के लिए तीन महीना इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। एक सप्ताह में अधिकारियों को यह जारी करना होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने लोक सेवा अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) में तत्काल संशोधन कर दिया है। संशोधन मंत्रीपरिषद से स्वीकृति की प्रत्याशा में किया गया है। यह व्यवस्था उन पात्र लाभुकों के लिए की गई है, जिन्हें हाल ही सरकार के निर्देश पर जीविका ने चिह्नित किया है।

जीविका द्वारा चिह्नित पात्र लोगों को नया राशन कार्ड भी मिलेगा। पहले इनका सर्वे केवल कोरोना के समय एक हजार रुपये सहायता राशि देने के लिए कराया गया था। मगर अब सरकार ने उन्हें राशन कार्ड देने का भी फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने आरटीपीएस अधिनियम में पूर्व में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के साथ समय सीमा में भी संशोधन किया है। नई व्यवस्था में बीडीओ को दो दिन में आवेदन की जांच पूरी करनी होगी और सात दिनों में राशन कार्ड जारी कर देना होगा। पहले यह समय तीन महीना तक तय था। एक-एक आवेदन की जगह थोक में भी लिया जाएगा।

आरटीपीएस कर्मी को एक दिन में निबंधन करना होगा : जीविका के अधिकारी एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन जमा कर सकेंगे। साथ ही आरटीपीएस काउंटर के कर्मी को एक दिन में ही उसे निबंधित करना होगा। हस्ताक्षर और शपथपत्र की जगह आवेदक का स्व-घोषित पमाणपत्र ही लिया जाएगा। आवासीय प्रमाणपत्र के रूप में जीविका सामुदायिक संगठन का प्रमाणपत्र भी मान्य होगा। एक खास बात जरूर है कि बड़ी संख्या में आवेदन करने पर आवेदकों का डाटा बेस जीविका को विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

ईपीडीएस पोर्टल पर भी होगा अपलोड : राज्य सरकार ने कोरोना के दौरान ऐसे पात्र लोगों का सर्वे कराया है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। राज्य सरकार ने इन्हें राशन कार्ड देकर ईपीडीएस पोर्टल पर उनका निबंधित करने का भी फैसला किया है। इससे इन लाभुकों को भी अनाज मिलने की उम्मीद जग गई है। इसी सर्वे के आधार पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने 30 लाख नये परिवारों के लिए राशन की मांग केन्द्र से की थी, लेकिन केंद्र ने इससे इनकार कर दिया। अब सरकार ने इसे सहयोग पोर्टल के साथ ईपीडीएस पोर्टल पर भी अपलोड करने का फैसला किया है।

Input : Hindustan

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