बिहार के गया जिले में धर्म परिवर्तन पर बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कहा कि, देश के लिए कोई संवैधानिक खतरा नहीं है. दरअसल, गया शहर के नगर प्रखण्ड के नैली पंचायत के बेलवाटांड़ गांव में करीब 125 महादलित परिवारों ने हिन्दू धर्म को छोड़ कर ईसाई धर्म में परिवर्तन कर लिया है. वहीं महादलित बस्तियों में लोग-अपने अपने घरों के बाहर क्रिसमस क्रॉस का निशान भी लगा रखा है.

धर्म परिवर्तन किए लोग यीशु की प्रार्थना में शामिल होते दिख रहे हैं. धर्म परिवर्तन कर चुके मनोज मांझी बताते हैं कि महादलितों को गांव के मंदिर में पूजा पाठ करने पर रोक है वहीं अब इस धर्म के अपनाने से सभी लोग खुश हैं.

अगर दूसरे धर्म में इज्जत मिल रही है तो क्या दिक्कत है?- पूर्व सीएम

वहीं अब गया के बेलवाटांड़ गांव में महादलितों के द्वारा धर्म परिवर्तन कर अपने घरों के बाहर क्रिसमस क्रॉस का चिन्ह लगाने पर बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कहा कि धर्म परिवर्तन से क्या हिंदुस्तान के संवैधानिक पर कोई खतरा थोड़ी है? उन्होंने कहा, धर्मनिरपेक्ष राज्य व देश है जहां अपने मन के अनुसार धर्म का पालन करना, प्रचार करना यह सब स्वतंत्रता है. महादलित अगर धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन रहे हैं तो कोई समस्या नहीं है. इसका मतलब येही होता है कि जिस घर में हम हैं और वहां अगर इज्जत मर्यादा नहीं है और अगर दूसरे में सब मिल रहा है तो क्या दिक्कत है?

जीतन राम मांझी ने आगे कहा, हिन्दू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म क्यों अपना रहे है इसे हमें सोचनी चाहिए कही न कही गलती हुई है तभी ऐसा हो रहा है. समाज में विकास नहीं है. छुआछूत व अछूत की बात हो रही है. धर्म विशेष की बात हो सकती है जब-जब धर्म लचीला हुआ है तब-तब धर्म का प्रसार हुआ है. 74 साल आजादी को तो हो गए हैं लेकिन अभी भी लोग जात-पात, छुआ-छूत, ऊंच-नीच में शामिल हैं.

धर्मो में सुधार लाने की जरूरत है- पूर्व सीएम

जीतन राम मांझी ने कहा कि, जब बिहार के सीएम किसी मंदिर में जाते हैं तो पूरा मंदिर धोया जाता है तो आखिर क्या है यह? इसलिए जो धर्म के पुजारी है वे अपने को सुधार लाने का प्रयास करें तभी धर्मांतरण रुकेगा. महादलितों का विकास नहीं हो रहा है उन्हें समाज मे प्रतिष्ठा नहीं मिल रही है. तभी तो वैसा कर रहे हैं. वहीं उन्होंने ये भी कहा कि झांरखण्ड राज्य में जितने आदिवासी लोग हैं वे धर्म परिवर्तन किए तो आज आईएएस और आईपीएस बने हैं. अपने धर्मो में सुधार लाने की जरूरत है.

अपनी बात को पूरा करते हुए उन्होंने आगे कहा कि, लोग अपने विकास के लिए महादलित लोग अपने धर्मों का परिवर्तन कर रहे हैं. कॉमन स्कूलिंग सिस्टम की बात भीम राव अम्बेडकर ने कहा था लेकिन आज बड़े घरों के लोग बड़ें स्कूलों में पढ़ाते हैं और गरीब बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं. कोई व्यवस्था हीं नहीं है तो सबसे पहले व्यवस्था को ठीक कीजिये. संविधान में समानता का अधिकार दिया गया है उसी आधार पर चलिए सबको शिक्षा एक सामान मिलनी चाहिए. फिर देखिए सभी लोग ठीक रहेंगे

Input: abp news

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