पिचकारी, रंग-गुलाल के बाजार में थोड़ी सुस्ती दिखाई दे रही है, लेकिन मेवा बाजार पर कोरोना महामारी का कोई असर नहीं है। थोक मंडी से लेकर खुदरा बाजार तक में खरीदारी बढ़ रही है। कुछ को छोड़ दें तो अधिकांश मेवों की कीमत में वृद्धि भी नहीं हुई है। गरी गोला, किशमिश, छुहारा की सबसे ज्यादा मांग है। काजू और बादाम की बिक्री भी संतोषजनक है। उम्मीद है कि होली पर थोक मंडी में 50 करोड़ रुपये का कारोबार होगा।

मेवों की कई किस्में भी बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि केरल का काजू, इराक का चुपचाप छुहारा, कंधार की किशमिश की गुणवत्ता और स्वाद अव्वल माना जाता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि थोक व खुदरा बाजार में होली पर करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। पटना जिले के खुदरा विक्रेताओं के साथ ही अन्य जिलों के भी विक्रेता अच्छा उठाव कर रहे हैं। खुदरा बाजार में भी गहमागहमी बढ़ी हुई है। कंकड़बाग के खुदरा विक्रेता अनुज कुमार ने कहा कि हर ग्राहक मेवा खरीद रहा है।

बिहार खुदरा विक्रेता महासंघ के महासचिव रमेश तलरेजा ने कहा कि अधिकांश मेवों की कीमत स्थिर है। हालांकि मखाना, मूंगफली और बोतलबंद ठंडई की कीमत कुछ बढ़ गई है। मखाना की कीमत एक साल में 200 रुपये प्रति किलो बढ़ी है। मूंगफली भी 30 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है, जबकि ठंडई की बोतल भी 280 रुपये की जगह अब 300 रुपये में मिल रही है। खुला के साथ ही ड्राईफ्रूट के पैकेट की भी मांग बनी हुई है। इसकी कीमत वजन पर निर्भर है।

Input: Dainik Jagran

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