शायद यह अनूठी परंपरा है। जिस छठ व्रत को बहुतायत महिला व्रती करती हैं, उसे यहां पुरुष करते हैं। कारण भी भावुक कर देने वाला है, घर-गांव की बेटियों की जिंदगी और खुशहाली के लिए पुरुष यह व्रत करते हैं। बात बिहार के कटोरिया प्रखंड के भोरसार स्थित पिपराडीह गांव की हो रही है। हाल के वर्षों में दूसरे गांवों से ब्याहकर आईं बहुओं ने भी यहां छठ करना शुरू किया है, लेकिन व्रत करने वाले पुरुषों की संख्या अधिक है।

यहां महिलाएं नहीं सिर्फ पुरुष करते हैं छठ की पूजा

लंबे समय से चली आ रही परंपरा

इस गांव में यह परंपरा लंबे समय से से चली आ रही है। किसी को यह ठीक से पता नहीं है कि कितने समय से आस्था से जुड़ा यह परंपरा चल रही है। पड़ोस की गांव की वृद्धा निर्मल सिन्हा ने बताया कि उन्हें उनकी सास ने इस बारे में बताया था। किसी समय पिपराडीह गांव में किसी के घर लड़की पैदा होने पर उसकी मृत्यु हो जाती थी। इस कारण यहां लड़कियों की संख्या कम होने लगी। लोग परेशान थे। काफी वैद्य-हकीम का सहारा लिया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तब गांव में एक प्रसिद्ध तांत्रिक के पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनसे समाधान पूछा। उन्होंने पुरुषों को छठ करने की सलाह दी। तब से यह परंपरा अनवरत जारी है। ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद से गांव में लड़कियों के ऊपर आया संकट भी समाप्त हो गया।

गांव के सौ से अधिक पुरुष करते व्रत

अभी एक हजार की आबादी वाले पिपराडीह गांव में 100 से अधिक पुरुष छठ का व्रत करते हैं। सुबोध यादव, रमेश यादव, विक्रम, सुरेश आदि ने बताया कि वे लोग पिछले 20 वर्षों से छठ कर रहे हैं। इसमें महिलाओं का भी सहयोग रहता है। कृष्णा यादव ने बताया कि वे लगभग 1985 से व्रत कर रहे हैं। बताया कि जब तक गांव आबाद रहेगा, पुरुष यहां छठ करते रहेंगे। पंचायत के निवर्तमान मुखिया पप्पू यादव ने बताया कि यहां पुरुष वर्ग द्वारा छठ पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। लोगों का मानना है कि छठ मैया का व्रत करने से कल्याण होता है।

…तो नहीं आएगा बेटियों पर संकट

बबलू मंडल व गोकुला दास का कहना है कि आज से कुछ वर्षों पूर्व तक यहां सिर्फ पुरुष ही छठ करते थे। गांव के पुरुष सदस्य मानते हैं कि यदि वे छठ करेंगे तो उनकी बेटियों के ऊपर कोई संकट नहीं आएगा। इन्होंने बताया कि आम तौर पर छठ मैया से लोग बेटा मांगते हैं, लेकिन यहां के लोग बेटियों के लिए यह काम करते हैं। इस कारण उनके नाते-रिश्तेदारों को भी आश्चर्य होता है। बताया कि प्रसाद आदि बनाने में महिलाएं सहयोग करती हैं।

पूर्वजों की परंपरा निभाने में आध्यात्मिक अनुभूति

व्रत करने वाले पुरुषों ने बताया कि पूर्वजों की इस परंपरा का निर्वाह करने में एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है, जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। शुरू में तो महिलाओं के बदले पुरुष ही छठ करते थे। अब गांव की कुछ महिलाओं ने भी यह व्रत शुरू किया है, लेकिन इससे व्रत करने वाले पुरुषों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।

(मुजफ्फरपुर नाउ के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

Muzaffarpur Now – Bihar’s foremost media network, owned by Muzaffarpur Now Brandcom (OPC) PVT LTD

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *