राज्य के पटना सहित विभिन्न जिलों में कोरोना बीमारी से संबंधित आवश्यक दवाओं की कमी हो गई है। इससे संक्रमित मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है। कोरोना महामारी से बचाव की प्रमुख दवाओं में एजिथ्रो माइसिन, जिंक टेबलेट, विटामिन सी, जिनकोविट सीरप इत्यादि के साथ ही पैरासिटामोल की भी कमी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर और दवा की दुकानों में आपूर्ति नहीं होने या कम होने की शिकायत बताई जा रही है।

औषधि प्रशासन दवा की कमी से बेखबर

राज्य में स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित होने वाला औषधि प्रशासन (ड्रग कंट्रोलर का कार्यालय) जिलों में आवश्यक दवाओं की कमी को लेकर बेखबर है। राज्य का औषधि प्रशासन लंबे समय से प्रभारी ड्रग कंट्रोलर के सहारे चल रहा है। मौजूद प्रभारी ड्रग कंट्रोलर पिछले 15 दिनों से मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने दिया आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी रोकने का निर्देश

सहायक ड्रग कंट्रोलर स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में राज्य में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की गई थी। जिसके बाद दवाओं की कालाबाजारी रोकने का निर्देश सभी जिलों के जिलाधिकारी को दिया गया है।

उन्होंने बताया कि सभी जिलों के स्टॉकिस्टों ने आवश्यक दवाओं के उपलब्ध होने की जानकारी दी है और बताया कि किसी खास ब्रांड की दवाओं की जरूर कमी है। जैसे एजिथ्रो माइसिन एलम्बिक कंपनी की है जो एजिथ्रल के नाम से आती है, उसकी मांग ज्यादा है, इसलिए कई बार कमी हो जाती है।

जबकि अन्य ब्रांड के एजिथ्रो माइसिन उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार, विटामिन सी की खास ब्रांड की दवा लीविल नाम से आती है, जिसे लोगों द्वारा एक डिब्बा जिसमे एक सौ टेबलेट होता है, उसकी खरीद कर घर में रखने के कारण कमी हो गयी थी। लेकिन, स्टॉकिस्टों द्वारा अब इन्हें कंपनी से मंगाकर डिस्ट्रीब्यूटर को दिया जा रहा है।

जिलों में दवाओं की कालाबाजारी रोकने को टीम गठित

सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर सभी जिलों में आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष टीम का गठन किया गया है। इस टीम को अबतक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन भी रख रहा है नजर

ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन, बिहार के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह ने बताया कि एसोसिएशन के स्तर से भी राज्य में दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि खास ब्रांड की दवाओं की जगह डॉक्टरों को या लोगों को समान मॉलिक्यूल वाली दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे अफरातफरी की स्थिति नही बनेगी। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाएं आधा दर्जन से अधिक अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनायी जाती है, जो कि राज्य में उपलब्ध है।

Input: Live Hindustan

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