मुजफ्फरपुर । फर्जी कागजात पर अवैध तरीके से वाहनों का ट्रांसफर अब आसान नहीं होगा। फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए ट्रांसफर की प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाया गया है। अब गाड़ी क्रेता और विक्रेता को जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) के समक्ष पेश होना होगा। दोनों को वाहनों के कागजात के साथ आधार कार्ड की स्व अभिप्रमाणित छाया प्रति लगानी होगी। मूल आधार कार्ड भी साथ रखना होगा। बेचे जाने वाली गाड़ी की तस्वीर भी फार्म के साथ संलग्न करनी होगी। गाड़ी बेचने-खरीदने वाले से कई बिंदुओं पर पूछताछ होगी। संतुष्ट होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। जिला परिवहन कार्यालय में इसकी कवायद शुरू हो गई है। ट्रांसफर की फाइल को देखने वाले कर्मी को भी कई सख्त आदेश दिए गए हैं। डीटीओ रजनीश लाल की इस पहल से फर्जीवाड़ा करने वाले परिवहन माफियाओं की सक्रियता पर अंकुश लगेगा।

पूर्व के डीटीओ काल में गड़बड़ी से हुई फजीहत

पूर्व के डीटीओ काल में वाहनों के ट्रांसफर में हुई गड़बड़ी की वजह से पिछले दिनों यहां फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस यहां के तीन कर्मियों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। हालांकि बाद में तीनों को छोड़ दिया गया था। इस घटना के बाद जिला परिवहन कार्यालय की काफी किरकिरी हुई थी। इसके बाद डीटीओ रजनीश लाल ने सिस्टम में बदलाव के लिए कई कदम उठाए। यहां सक्रिय दो दर्जन से अधिक अवैध वेंडरों पर अंकुश लगाया। पहले जहां परिसर में अफरातफरी का माहौल रहता था वहीं अब भीड़ काफी कम हो गई। मुख्य गेट पर भी पूछताछ के बाद ही प्रवेश की व्यवस्था हुई है।

Source : Dainik Jagran

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