इलाज व व्यवस्था में खामी का वाहक सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थान ही नहीं है । सदर अस्पताल भी उसके साथ कदमताल कर रहा है। सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में चिकित्सा के लिए पहुंचा एक मासूम के साथ भी ऐसा ही हुआ। अस्पताल में स्ट्रेचर की सुविधा उपलब्ध रहने के बावजूद बीमार मासूम को उसके परिजन गोद में ही लेकर इमरजेंसी से एसएनसीयू तक की दूरी तय की ।

उसके साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर लिए नवजात के पिता साथ-साथ चलते रहे थे । ऑक्सीजन लगा इमरजेंसी से एसएनसीयू तक की दूरी मासूम को अपने चाची के ही गोद में तय करा दी । जबकि अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध है । पीडि़त परिजन ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने उसे स्ट्रेचर की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। जबकि अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि किसी ने स्ट्रेचर की मांग ही नहीं की ।

नवजात की स्थिति गंभीर होने पर किया था रेफर

मोरवा के प्राइवेट अस्पताल में लगुनियां निवासी फूल कुमार की पत्नी गुडिय़ा देवी का प्रसव हुआ। यहां पर उसने नवजात पुत्र को जन्म दिया । जिसकी स्थिति खराब रहने पर उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया । प्राइवेट वाहन से परिजन नवजात को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। जहां पर आपातकालीन वार्ड में इलाज कराने गए । यहां पर पूर्जा कटाने के बाद एसएनसीयू में जाने को कह दिया। लेकिन मासूम को स्ट्रेचर की सुविधा तक देने की जहमत नहीं उठाई । उसके बाद परिजन नवजात को इलाज कराने एसएनसीयू में ले गए। जहां पर उसका चिकित्सा किया गया। साथ ही इलाज चल रहा है । समस्तीपुर सदर अस्पताल, उपाधीक्षक डॉ. अमरेंद्र नारायण शाही का कहना है कि छाती में इंफेक्शन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत को लेकर नवजात को उसके परिजन इलाज कराने सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे । एसएनसीयू में भर्ती कर उसका इलाज किया जा रहा है।

Input: Dainik Jagran

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