बिहार में प्रारंभिक शिक्षा की पढ़ाई स्थानीय भाषा में होगी। इनमें मैथिली, भोजपुरी व मगही सहित अन्य स्थानीय भाषाएं शामिल होंगी। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को बिहार विधानसभा में भोजनावकाश के बाद विभाग के बजट मांग पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से उत्तर देते हुए ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चार मार्च को कालजयी रचनाकार फणीश्वरनाथ रेणु की शताब्दी जयंती है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि महात्मा गांधी को याद करने और कालजयी रचनाकार फणीश्वरनाथ रेणु जी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने और आने वाले समय में विद्यालयों में प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम जो क्षेत्रीय भाषाएं हैं, चाहे भोजपुरी है, मैथिली है, मगही है, जो स्थानीय भाषा है, उसके माध्यम से कराएंगे। उनको इसी तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते हैं।

चौधरी ने कहा कि बच्चों में जो समझ विकसित करने का समय होता है, उन्हें जो मातृभाषा में समझाया जाएगा, वो दूसरी भाषा में नहीं समझ सकते हैं। इसलिए, उनको सहज रूप से सभी चीज का ज्ञान उनके अंदर स्थापित करने के लिए सरकार ने गांधी जी के आदर्शों को और रेणु जी की जो दिशा थी लिखने-पढ़ने की उसे सम्मानित करने के लिए हमने प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम जो स्थानीय भाषा है, भोजपुरी, मैथिली, मगही, उसी भाषा को अपनाएंगे।

माले के महबूब आलम के ऊर्दू को भी इसमें शामिल करने की मांग पर मंत्री ने कहा कि लगता है महबूब आलम को पता नहीं, किस मानसिकता से उर्दू को पीछे बैठा रहे हैं, पता नहीं है कि उर्दू द्वितीय राजभाषा है। लगता है, उर्दू से उन्हें कम प्रेम है, वे इसे द्वितीय राजभाषा को नीचे उतार कर क्षेत्रीय भाषा में शामिल करना चाहते हैं।

मंत्री के संबोधन के दौरान ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव कुछ बोलना चाह रहे थे, लेकिन आसन ने समयाभाव के कारण उन्हें अनुमति नहीं दी और शिक्षा विभाग की वर्ष 2021-22 के लिए बजट मांग को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बजट मांग पर कटौती प्रस्ताव देने वाले कांग्रेस के विजय शंकर दुबे ने कहा कि पिछले 15 वर्षो में शिक्षा में कोई गुणात्मक सुधार नहीं हुआ है।

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स्थितियां सामान्य हो रहीं, खुल रहे शिक्षण संस्थान

मंत्री चौधरी ने कहा कि कोरोना के समय करीब एक साल तक मजबूरन सभी शिक्षण संस्थाओं को बंद करना पड़ा था, अब धीरे धीरे स्थितियां सामान्य हो रही है। चरणवार चार जनवरी से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय और यूनिवर्सिटी खुले। आठ फरवरी से मध्य विद्यालय को प्रारंभ किया है। अभी एक मार्च से प्रारंभिक विद्यालय भी खुल गए हैं। सरकार ने हिदायत दे रखी है कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।

प्राथमिकता में शिक्षा, बजट का 22 फीसदी खर्च

मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा शामिल है, इसलिए बजट का लगभग 22 फीसदी शिक्षा विभाग पर खर्च करने जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में जीडीपी का छह फीसदी खर्च रखा गया है, हम बिहार में इस लक्ष्य को आज ही प्राप्त कर चुके हैं। कहा कि शिक्षा विभाग की बजट मांग पर 19 सदस्यों ने सुझाव दिए हैं, उनके सुझाव को सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने पहली बार सदन में बोलने वाले तीन सदस्यों को विशेष बधाई व शुभकामनाएं दीं और सभी सुझाव देने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।

Input: Live Hindustan

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