स्मार्ट सिटी में साेमवार और मंगलवार की बारिश के बाद हर इलाके में दाे से तीन फीट तक पानी भर गया। राहगीर, दाेपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहन चालक जलभराव में गाड़ियों फंसने से परेशान रहे। शहरवासी त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। हालात यह है कि कई इलाकों में लाेगाें ने घर से निकलना छाेड़ दिया है। सबसे डराने वाली खबर यह है कि शहर के दाे तिहाई इलाके से अधिक का पानी निकास बंद हाे चुका है। वजह है चंदाैली और फरदाे चाैर में शहर के लेवल के बराबर या इससे भी अधिक जलभराव हाेना। शहर के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी इलाके का अधिकतर पानी आधे-अधूरे बने नाले-ड्रेन के रास्ते इन्हीं दाेनाें चाैर में निकलता है।

अब स्थिति ऐसी हाे चुकी है कि पाॅश काॅलाेनियाें के भी लाेग घराें से निकलने से पहले 10 बार साेचते हैं। इन हालातों के बीच प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार ने डीएम प्रणव कुमार और नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय के साथ बैठक की। इसके बाद निगम का अमला सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर और चक्कर मैदान इलाके का जायजा लिया।

इस बीच प्रभारी महापौर मानमर्दन शुक्ला ने बुधवार को निगम में अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है। उल्लेखनीय है कि मिठनपुरा की तमाम गलियों में पहले से जलजमाव है। अब बीते 24 घंटे में भारी बारिश के बाद नारकीय स्थिति बन गई है। एक फीट ऊंचाई बढ़ाने के बावजूद पानी टंकी-मिठनपुरा रोड और जवाहरलाल रोड पर पानी भर गया।

जिले के साथ पूरे उत्तर बिहार के कारोबार का मुख्य केंद्र कल्याणी से मोतीझील तक और उधर सूतापट्टी में जलजभराव के कारण बिजनेस ठप हाे गया। दुकानाें में पानी भरने से व्यवसायियों काे भारी नुकसान हाे रहा है। मोतीझील फ्लाईओवर के नीचे धर्मशाला चाैक और कुछ दूर आगे स्टेशन राेड तक बाढ़ जैसा नजारा बन रहा है। तिलक मैदान राेड में भी अब नारकीय हालात हैं।
जलजमाव व जर्जर सड़क मुद्दा, लेकिन सच यही कि समाधान के बदले बढ़ती जा रही समस्या
बेला औद्योगिक क्षेत्र जलमग्न है। फेज वन में 60 से अधिक उद्योगों में उत्पादन लगभग ठप है। न कच्चा माल अनलोड हो पा रहा और न ही फैक्ट्री से सामान बाहर जा पा रहे। स्टाफ फैक्ट्री आने-जाने से कतरा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि, 20 माह पहले औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन समिति का गठन हुआ। तब से समिति की 12 बैठकें हाे चुकीं। हर बैठक में जलजमाव, टूटी सड़क व चहारदिवारी, नाला और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों के समाधान का निर्णय हुआ। लेकिन, समाधान के बदले ये समस्याएं और भी विकराल हाेती गईं। इससे उद्यमियों में भारी आक्रोश है।

उद्यमी संघ के सचिव विक्रम कुमार के अनुसार पिछले दिनों जलजमाव के बीच नाले में गिर कर दो लोगों की मौत के बाद कामगार और उद्यमी भी काफी डरे हैं। रामकृष्ण मिशन आश्रम के सामने बियाडा कार्यालय में भी एक फीट से अधिक पानी जमा है। कई जगहों सड़कों पर तीन-चार फीट पानी है। पर, बियाडा हाथ पर हाथ धरे बैठा है। दो कम पावर के पंप सेट नगर निगम ने लगाया है। यह पानी खींचने के लिए नाकाफी है। बियाडा ने मानसून से पहले औद्योगिक क्षेत्र के नाले की सफाई कर इस साल जलजमाव नहीं हाेने का दावा किया था। दावे काे क्षेत्र की नारकीय स्थिति ने झूठा साबित कर दिया है।
इन इलाकों में लाेग घराें में अब भी कैद !
कालीबाड़ी रोड और अगल-बगल के मोहल्ले। स्टेशन रोड, आमगोला रोड, गन्नीपुर में केंद्रीय विद्यालय वाली गली व मिश्रा टाेला, अघाेरिया बाजार, सादपुरा, बालूघाट मेन रोड, सिकंदरपुर, ब्रह्मपुरा संजय सिनेमा रोड, बीबीगंज, आनंदपुरी, चित्रगुप्त पुरी, भगवानपुर, बटलर रोड और कलमबाग रोड। सदर अस्पताल परिसर में भारी जलजमाव कायम है। मरीजाें, उनके परिजनाें, डॉक्टरों और स्टाफ के लिए आना-जाना मुसीबत है। साकेतपुरी-फतहपुर रोड में यातायात ठप है।
रेलवे लाइन किनारे से हटेगा अतिक्रमण
प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक में चक्कर मैदान इलाके से जलनिकासी में बाधक रेलवे लाइन किनारे से अतिक्रमण हटाने का निर्णय हुआ। बैठक में सेना हेडक्वार्टर के कर्नल सुनील कुमार झा ने चक्कर मैदान में भारी जलजमाव की जानकारी दी। नगर आयुक्त ने बताया कि रेलवे गुमटी नंबर 4 से 5 तक अतिक्रमण की वजह से नाले की सफाई नहीं हो पा रही है। इस पर प्रमंडलीय आयुक्त ने अतिक्रमण हटवाने को कहा। वह रेलवे के साथ भी बैठक करेंगे।
Input: Dainik Bhaskar


